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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   Raining fire instead of rain, Broken 5 year record

पानी की जगह आसमान से बरस रही आग, टूटा पांच साल का रिकार्ड

Sat, 23 Jun 2018 12:09 AM IST
प्रतापगढ़ ब्यूरो
प्रतापगढ़ ब्यूरो Updated Sat, 23 Jun 2018 12:09 AM IST
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 जिस महीने में पुरवा की ठंड हवाओं के बीच बारिश के मौसम की शुरूआत होनी चाहिए, उस महीने में लोगों को हीट स्ट्रोक की मार झेलनी पड़ रही है। पश्चिमी हवाओं के चलते आसमान में बादलों का डेरा नहीं जम पा रहा है। तेजी से लोग बीमारी की जद में आ रहे है। हीट स्ट्रोक से अब तक आधे दर्जन से अधिक लोग जान गंवा चुके है। मौसम विभाग की माने तो पश्चिमी हवाओं के चलते पांच साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। आंकड़ों की माने तो जून के मध्य चरण से ही मानसून आ जाता था, और लोगों को बारिश का लुफ्त उठाते थे। मगर इस बार बारिश के आसार नहीं दिख रहे है। आमतौर पर जून के मध्यम चरण यानी 15 जून के बाद आसमान में बादलों की उमड़- घुमड़ शुरु हो जाती थी। इससे मानसून के आने के संकेत मिल जाते थे। महज एक या दो दिन पुरवा हवाएं रफ्तार भरती और मानसून दस्तक दे जाता। पुरवा हवाओं के बीच रिमझिम बरसात से मौसम सुहावना हो जाता। मगर इस बार ऐसा नही दिख रहा है। जून के महीने के अंतिम चरण में भी मानसून के आने का आसार नहीं दिख रहा है। पश्चिम की गर्म हवाएं पूरे वातावरण को झुलसा रही है। हीट स्ट्रोक का कहर बराबर बना हुआ है, जिसकी चपेट में आकर लोग अस्पताल की डगर थामने को मजबूर हो गए। शुक्रवार को हीट स्ट्रोक के चलते पट्टी कोतवाली क्षेत्र के शेखपुर अठगवां निवासी देवी प्रसाद मिश्रा (70) पुत्र सूर्य दीन की मौत हो गई। दिनभर जिला अस्पताल में मरीजों का डेरा लगा रहा। मौसम विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो 2013 में 16 जून को मानसून आ गया था। 2014 में 18 जून, 2015 में 20 जून तक जबकि 2016 में 19 व 2017 में 22 जून तक मानसून आ गया था। मगर इस बार मानसून के आसार नहीं दिख रहे है।ं मगर इस बार बादलों की बेरूखी के चलते पांच साल का रिकार्ड टूट चुका है। बारिश की संभावना अब तक  नहीं दिख रही है। तापमान 45 के पार जा रहा है। मौसम विभाग की माने तो पुरवा हवाओं के रौ पकडने के बाद ही मौसम में बदलाव दिखेगा।  
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बेकार जा रही किसानों की मेहनत, सूख रही धान की नसर्री  
नहरों में पानी के बजाए धूल उड़ रही है। जिससे फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। बारिश के संभावना भी कम ही दिख रही है। इससे ैिकसानों की मेहनत बेकार जा रही है। मौसम की इस बेरूखी से किसान आहत है।  
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पांच साल के बारिश का आंकड़ा  
2013 में- 1293.8 मिमी
2014- 765.7 मिमी
2015- 678.2 मिमी
2016- 668.3 मिमी
2017- 668.3 मिमी
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