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बेलखरनाथधाम ब्लाक में पेयजल का संकट

Thu, 21 Apr 2016 11:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Thu, 21 Apr 2016 11:58 PM IST
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problem in belkharnath dham
water problem
चिलचिलाती धूप से बेहाल पशु-पक्षी प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। वहीं ग्रामीण इलाकों में भी पेयजल संकट गहरा गया है। पानी का जलस्तर 15 फीट नीचे खिसकने के कारण दिन-प्रतिदिन पानी का संकट गहराता जा रहा है। विकास खंड के 81 ग्राम पंचायतों में लगभग 6021 इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हुए हैं। इसमें लगभग सात सौ हैंडपंप तोबा बोल दिए हैं। कुछ हैंडपंप तो ऐसे हैं जो कीचड़ युक्त पानी दे रहे हैं। ब्लाक में मनरेगा के तहत खुदे तालाबों की संख्या लगभग 465 है। इसमें कुछ निजी तालाब मछली पालन के लिए बनाए गए है। मगर किसी भी तालाब में पानी नहीं है। 
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मत्स्य पालन वाले तालाबों में निजी नलकूप से भरा गया पानी घंटे भर में ही पाताल चला जाता है। जानवर प्यास बुझाने के लिए पूरे दिन भटकते रहते हैं। क्षेत्र के डंडवा महोखरी गांव जो खारे पानी के लिए मशहूर है, में भी लगभग पचास हैंडपंप लगे हैं। गांव के रमाशंकर पाठक ने बताया कि करीब नब्बे फीसदी हैंडपंप पानी छोड़ चुके है। इस संबध में तहसील दिवस और ब्लाकों में शिकायत के बाद भी अभी तक ठीक नहीं कराया गया है। लौवार गांव निवासी अनिल सिंह ने बताया कि उनके गांव के लगभग में चालीस हैंडपंप लगे हैं, इसमें से ज्यादातर खराब हो चुके हैं। जयसिंहगढ़ गांव के प्रधान राम आसरे वर्मा ने बताया कि तीस हैंडपंपों में अधिकांश पानी देना बंद कर दिए हैं। जेई जल निगम विध्यवासिनी चौबे ने स्वीकार किया कि जलस्तर करीब 15 फीट नीचे खिसकने के कारण पेयजल का संकट गहरा गया है।
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वहींं पेयजल संकट की जानकारी तहसील दिवस में कई ग्रामीणों ने दी। तहसीलदार महेन्द्र कुमार ने बताया कि जल निगम में कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं है। महज एक लिपिक के भरोसे पूरा जल निगम कार्यालय चल रहा है। इलाके में नहरों व माइनर का जला बिछा, लेकिन वह सब सूखी पड़ी है। डीएम ने निरीक्षण के दौरान धरमपुर लोहिया गांव में निकली माइनर को जेसीबी से गहरा कराया था और विभागीय अधिकारियों पर लापरवाही में कार्रवाई भी की थी। इस संबंध में शीघ्र कोई उपाय नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं जब आबादी का ज्यादा हिस्सा पानी के लिए तरस जायेगा।
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