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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   Prevention of the nomination letter to the candidate's candidate

सभापति के प्रत्याशी को नामांकन पत्र देने से रोका, हंगामा

Tue, 30 Jan 2018 11:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़ Updated Tue, 30 Jan 2018 11:15 PM IST
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सहकारी समिति देवासा के सभापति पद को लेकर नामांकन पत्र न देने पर हंगामा हो गया। कुछ ही देर में अधिकारियों के पास शिकायत पहुंची कि पुलिस की मौजूदगी में कुछ लोग प्रत्याशी को अगवा कर ले गए हैं। इस जानकारी के बाद आला अधिकारी मौके की ओर रवाना हुए। अफसर रानीगंज विधायक के कार्यालय पर पहुंचे। जहां कार्यकर्ताओं से तकरार भी हुई। कुछ ही देर में विधायक रानीगंज धीरज ओझा पहुंचे। इस दौरान प्रत्याशी को बंद मोबाइल रहस्मय तरीके से आन हो गया और उसने खुद को चाय की दुकान पर बैठे रहने की जानकारी दी। जिसके बाद अधिकारियों ने राहत की सांस ली।
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देवासा समिति के सभापति के लिए मंगलवार को नामांकन पत्र खरीदने का समय 11 बजे से लेकर 12 तक रखा गया था। निर्वाचन अधिकारी संतोष पासवान व सचिव अजय यादव की मौजूदगी में नामांकन पत्रों की बिक्री हो रही थी। इस बीच रमेश कुमार पांडेय ने नामांकन पत्र खरीदा। प्रत्यक्षदशयों की मानें तो राकेश कुमार तिवारी नामांकन पत्र खरीदने पहुंचा तो उसे पर्चा देने से मना कर दिया गया। इस बात की शिकायत उसने अधिकारियों से की। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए और पुलिस की मौजूदगी में राकेश को वाहन में बैठाकर ले गए। थोड़ी ही देर में प्रत्याशी राकेश के अपहरण की खबर जिलाधिकारी के साथ ही शासन तक पहुंच गई।
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इसके बाद एसडीएम रानीगंज और सीओ रानीगंज को मौके पर भेजा गया। बाद में अफसर भारी पुलिस बल के साथ रानीगंज विधायक के कार्यालय पर पहुंचे। जहां कार्यकर्ताओं की पुलिस से तकरार हुई। मामले की जानकारी मिलते ही विधायक धीरज ओझा मौके पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वह चाहे तो पूरा कार्यालय देख लें। गलत आरोप लगाया जा रहा है। तभी अपर जिलाधिकारी सोमदत्त मौर्य और एएसपी पूर्वी राकेश सिंह भी वहां पहुंच गए।
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बातचीत चल ही रही थी कि राकेश का मोबाइल आन हो गया। एसओ रानीगंज के पूछने पर उसने बताया कि वह चाय की दुकान पर बैठा है। जिसके बाद पुलिस उसे थाने ले गई। जहां पूछताछ के बाद उसने खुद के साथ किसी प्रकार की घटना से इनकार कर दिया। उसने पुलिस को लिखकर दिया कि उसका किसी ने अपहरण नहीं किया था। वह समिति पर गया जरूर था, लेकिन नामांकन पत्र नहीं खरीदा और वहां से लौट आया।
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