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शहर की तीसरी आंख खराब
ब्यूरो।अमर उजाला प्रतापगढ़
Updated Wed, 27 May 2015 11:13 PM IST
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पुलिस की मदद साबित हो सकने वाली शहर की तीसरी आंख खराब हो गई है। तीसरी आंख यानि सीसीटीवी कैमरा। लाखों रूपये खर्च के बाद शहर में सीसीटीवी कैमरे लगे। ताकि अपराधियों की गर्दन दबोची जा सके। मगर साल भर से भी अधिक समय से सीसीटीवी कैमरे खराब पड़े हैं। घटनाओं के बाद ही अधिकारियों को फुटेज के लिए सीसीटीवी की याद आती है। मगर इसके बाद भी होता कुछ नहीं है।
अपराधियों की निगहबानी के लिए दो वर्ष पूर्व शहर के श्रीराम तिराहा, सिविल लाइन, चौक, सदर बाजार, नगर कोतवाली समेत कुल आठ स्थानों पर तत्कालीन शहर कोतवाल पहुप सिंह की देखरेख में लखनऊ की एक कंपनी ने सीसीटीवी कैमरा लगाया। कुछ दिनों तक तो तीसरी आंख के दम पर पुलिसकर्मी ताल ठोंकते रहे कि घटनाओं को अंजाम देने वाले बदमाश बचकर नहीं भाग सकते लेकिन एक वर्ष बाद ही तीसरी आंख की रोशनी धूमिल होने लगी। कहीं तार गायब हुआ तो कहीं कंप्यूटर में खामी आ गई। किसी तरह खराब कैमरे बनवाए गए। मगर मौजूदा समय में सीसीटीवी कैमरे पूरी तरह से बंद पड़े हैं। वह चाहे नगर कोतवाली का हो या फिर चौक का।
दो कैमरे चालू हालत में हैं। जो कभी कभार मकंद्रूगंज पुलिसकर्मियों की मेहरबानी से चल जाते हैं। श्रीराम तिराहे पर कैमरा हाईमास्ट के पोल में लगा है, लेकिन उसका केबिल गायब है। जिस दुकान पर कंट्रोल रूम बनाया गया है। वहां लगे उपकरण धूल फांक रहे हैं। सिविल लाइन पुलिस चौकी के करीब लगे कैमरे का केबिल कट गया है। जिससे यहां की गतिविधि पर भी नजर नहीं रखी जा रहीा। सदर बजार में लगे कैमरे की हालत भी खराब है। न तो कोई कंट्रोल रूम देखने जाता है और न ही कैमरे की मरम्मत कराने के लिए प्रयास होता है। पुलिस अफसरों की मानें तो कई बार संबंधित कंपनी के से शिकायत कर समस्या दूर करने को कहा गया। अनुबंध के मुताबिक मरम्मत की जिम्मेदारी कंपनी की है। मरम्मत में कंपनी की आनकानी पर अफसर रोक नहीं लगा पा रहे हैं।
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अपराधियों की निगहबानी के लिए दो वर्ष पूर्व शहर के श्रीराम तिराहा, सिविल लाइन, चौक, सदर बाजार, नगर कोतवाली समेत कुल आठ स्थानों पर तत्कालीन शहर कोतवाल पहुप सिंह की देखरेख में लखनऊ की एक कंपनी ने सीसीटीवी कैमरा लगाया। कुछ दिनों तक तो तीसरी आंख के दम पर पुलिसकर्मी ताल ठोंकते रहे कि घटनाओं को अंजाम देने वाले बदमाश बचकर नहीं भाग सकते लेकिन एक वर्ष बाद ही तीसरी आंख की रोशनी धूमिल होने लगी। कहीं तार गायब हुआ तो कहीं कंप्यूटर में खामी आ गई। किसी तरह खराब कैमरे बनवाए गए। मगर मौजूदा समय में सीसीटीवी कैमरे पूरी तरह से बंद पड़े हैं। वह चाहे नगर कोतवाली का हो या फिर चौक का।
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दो कैमरे चालू हालत में हैं। जो कभी कभार मकंद्रूगंज पुलिसकर्मियों की मेहरबानी से चल जाते हैं। श्रीराम तिराहे पर कैमरा हाईमास्ट के पोल में लगा है, लेकिन उसका केबिल गायब है। जिस दुकान पर कंट्रोल रूम बनाया गया है। वहां लगे उपकरण धूल फांक रहे हैं। सिविल लाइन पुलिस चौकी के करीब लगे कैमरे का केबिल कट गया है। जिससे यहां की गतिविधि पर भी नजर नहीं रखी जा रहीा। सदर बजार में लगे कैमरे की हालत भी खराब है। न तो कोई कंट्रोल रूम देखने जाता है और न ही कैमरे की मरम्मत कराने के लिए प्रयास होता है। पुलिस अफसरों की मानें तो कई बार संबंधित कंपनी के से शिकायत कर समस्या दूर करने को कहा गया। अनुबंध के मुताबिक मरम्मत की जिम्मेदारी कंपनी की है। मरम्मत में कंपनी की आनकानी पर अफसर रोक नहीं लगा पा रहे हैं।
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