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दुग्ध उत्पादकों के लाखों रुपये फंसे
ब्यूरो।अमर उजाला प्रतापगढ़
Updated Tue, 19 May 2015 11:37 PM IST
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दुग्ध उत्पादक संघ को दूध बेचकर दर्जनों किसान परेशान हैं। उनके लाखों रुपये फंस गए हैं। उसका भुगतान नहीं हो पा रहा है। करीब तीन साल से बकाया पैसे के लिए किसान संघ के चक्कर काट रहे हैं। बकाये का भुगतान न होने से परेशान किसानों ने संघ को दूध बेचना बंद कर दिया है। इससे दुग्ध उत्पाक संघ की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
तीन साल पहले दुग्ध उत्पादक संघ किसानों से दूध खरीदना शुरू किया। संघ को जिले के किसान प्रतिदिन एक हजार लीटर से अधिक दूध बेचते थे। खरीदा गया दूध संघ पराग को देता रहा। दूध बेचने वाले किसानों का करीब 85 लाख रुपया संघ के ऊपर बकाया हो गया। भुगतान के लिए कई बार किसानों ने धरना-प्रदर्शन तक किया। दबाव बना तो धीरे-धीरे कुछ पैसे का किसी तरह जुगाड़ कर भुगतान किया गया। फिर भी अभी लगभग 34 लाख रुपये का भुगतान होना शेष है। इस पैसे के लिए किसान काफी परेशान हैं। हर रोज कोई न कोई किसान भुगतान के लिए संघ का चक्कर लगा रहा है।
स्थिति यह है कि अब संघ के अधिकारी किसानों के तगादे से बचने के लिए उनके सामने आने से बचते रहते हैं। पैसा न मिलने की वजह से अधिकांश किसानों ने संघ के हाथ दूध बेचना बंद कर दिया है। अब वे प्राइवेट संस्थाओं को दूध बेचकर तत्काल नकद पैसा प्राप्त कर रहे हैं। ऐसी दशा में दुग्ध उत्पादक संघ में ताला लगने की स्थिति बन गई है। इन दिनों संघ को मात्र 100 से 150 लीटर दूध ही मिल पा रहा है।
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तीन साल पहले दुग्ध उत्पादक संघ किसानों से दूध खरीदना शुरू किया। संघ को जिले के किसान प्रतिदिन एक हजार लीटर से अधिक दूध बेचते थे। खरीदा गया दूध संघ पराग को देता रहा। दूध बेचने वाले किसानों का करीब 85 लाख रुपया संघ के ऊपर बकाया हो गया। भुगतान के लिए कई बार किसानों ने धरना-प्रदर्शन तक किया। दबाव बना तो धीरे-धीरे कुछ पैसे का किसी तरह जुगाड़ कर भुगतान किया गया। फिर भी अभी लगभग 34 लाख रुपये का भुगतान होना शेष है। इस पैसे के लिए किसान काफी परेशान हैं। हर रोज कोई न कोई किसान भुगतान के लिए संघ का चक्कर लगा रहा है।
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स्थिति यह है कि अब संघ के अधिकारी किसानों के तगादे से बचने के लिए उनके सामने आने से बचते रहते हैं। पैसा न मिलने की वजह से अधिकांश किसानों ने संघ के हाथ दूध बेचना बंद कर दिया है। अब वे प्राइवेट संस्थाओं को दूध बेचकर तत्काल नकद पैसा प्राप्त कर रहे हैं। ऐसी दशा में दुग्ध उत्पादक संघ में ताला लगने की स्थिति बन गई है। इन दिनों संघ को मात्र 100 से 150 लीटर दूध ही मिल पा रहा है।
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