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प्रतापगढ़: सपाइयों को मायूसी, बसपा के खाते में गई लोस सीट
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सपा
- फोटो : amar ujala
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लोकसभा चुनाव में प्रतापगढ़ की सीट बसपा की झोली में चली गई है। गुरुवार को इसका बाकायदा एलान भी कर दिया गया। इससे जिले के दिग्गज सपाइयों को तगड़ा झटका लगा है। उन्होंने टिकट और सीट सपा के खाते में रखने के लिए लखनऊ से दिल्ली तक एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। ऐसे में अब उनमें मायूसी है।
बसपा से गठबंधन के बाद जिले के सपाई भी खासे गदगद थे। सभी को भरोसा था कि गठबंधन प्रत्याशी को जीत मिल सकती है। इसे देखते हुए लखनऊ से दिल्ली तक का चक्कर सपा के दिग्गज काटने लगे थे। पूर्व सांसद सीएन सिंह, पूर्व मंत्री शिवाकांत ओझा, सपा नेता आसिफ निजामुद्दीन समेत कई बाहरी लोग भी गठबंधन का प्रत्याशी बनने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से लगे थे।
ताकि सीट खाते में जाते ही उनका टिकट पक्का हो जाए। भले ही बसपा ने गत दिनों अशोक त्रिपाठी को लोकसभा प्रभारी बनाते हुए एक तरह से उन्हें ग्रीन सिग्नल दे दिया, लेकिन इसके बावजूद सपा के दिग्गज पार्टी सुप्रीमो से सीट को अपने खाते में लेने की जिद पर अड़े थे। वह इस बात का तर्क देते रहे कि जिले से सपा का खाता खुल चुका है और बसपा अभी तक जीत दर्ज नहीं कर सकी है।
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गुरुवार को सपा-बसपा गठबंधन के बाद लोकसभा सीट के बंटवारे की घोषणा होते ही सपा नेताओं को जोर का झटका लगा। अब सीट बसपा के पाले में चली गई है। इससे सपा नेताओं में मायूसी देखने को मिली। बसपा ने सबसे पहले लोकसभा चुनाव के लिए ब्राह्मण समाज के नेता को ग्रीन सिग्नल देते हुए लोकसभा प्रभारी बना दिया है।
बसपा कार्यकर्ता हैं उत्साहित
सपा-बसपा गठबंधन के बाद लोकसभा सीट बसपा के खाते में जाने पर कार्यकर्ता खासे उत्साहित हैं। वह सपा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर रणनीति बनाने में जुटे हैं। दोनों दलों के नेता दिलों की दूरियां मिटा रहे हैं, ताकि लोस चुनाव में वह एकजुट होकर मतदाताओं को गठबंधन प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करा सकें।
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बसपा से गठबंधन के बाद जिले के सपाई भी खासे गदगद थे। सभी को भरोसा था कि गठबंधन प्रत्याशी को जीत मिल सकती है। इसे देखते हुए लखनऊ से दिल्ली तक का चक्कर सपा के दिग्गज काटने लगे थे। पूर्व सांसद सीएन सिंह, पूर्व मंत्री शिवाकांत ओझा, सपा नेता आसिफ निजामुद्दीन समेत कई बाहरी लोग भी गठबंधन का प्रत्याशी बनने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से लगे थे।
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ताकि सीट खाते में जाते ही उनका टिकट पक्का हो जाए। भले ही बसपा ने गत दिनों अशोक त्रिपाठी को लोकसभा प्रभारी बनाते हुए एक तरह से उन्हें ग्रीन सिग्नल दे दिया, लेकिन इसके बावजूद सपा के दिग्गज पार्टी सुप्रीमो से सीट को अपने खाते में लेने की जिद पर अड़े थे। वह इस बात का तर्क देते रहे कि जिले से सपा का खाता खुल चुका है और बसपा अभी तक जीत दर्ज नहीं कर सकी है।
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गुरुवार को सपा-बसपा गठबंधन के बाद लोकसभा सीट के बंटवारे की घोषणा होते ही सपा नेताओं को जोर का झटका लगा। अब सीट बसपा के पाले में चली गई है। इससे सपा नेताओं में मायूसी देखने को मिली। बसपा ने सबसे पहले लोकसभा चुनाव के लिए ब्राह्मण समाज के नेता को ग्रीन सिग्नल देते हुए लोकसभा प्रभारी बना दिया है।
बसपा कार्यकर्ता हैं उत्साहित
सपा-बसपा गठबंधन के बाद लोकसभा सीट बसपा के खाते में जाने पर कार्यकर्ता खासे उत्साहित हैं। वह सपा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर रणनीति बनाने में जुटे हैं। दोनों दलों के नेता दिलों की दूरियां मिटा रहे हैं, ताकि लोस चुनाव में वह एकजुट होकर मतदाताओं को गठबंधन प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करा सकें।