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प्रतापगढ़: टेलीमेडिसिन की दवाई भी हवा-हवाई
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कोरोना के दौर में स्वास्थ्य विभाग का टेलीमेडिसिन के जरिए मरीजों के इलाज का दावा भी हवा-हवाई साबित हो रहा है। शुरुआती दौर में टेलीमेडिसिन से उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सकों के मोबाइल नंबर सार्वजनिक कर दिए।
इसमें कुछ डॉक्टर तो मरीजों को परामर्श देते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो सीधे मुंह बात तक नहीं करते। कभी उनका फोन कोई और उठाता है और डाक्टर के व्यस्त होने की जानकारी देकर काट देता है। इससे मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
शहर के जोगापुर की रहने वाली सबीना की बहू गर्भवती है। कोरोना के चलते वह अस्पताल जाना बेहतर नहीं समझ रही। उन्होंने सोमवार को महिला अस्पताल के डाक्टरों के मोबाइल नंबर पर फोन किया। दो बार फोन रिसीव नहीं हुआ। तीसरी बार काल रिसीव करते ही महिला चिकित्सक भड़क उठीं। कहा कि अभी वह मरीज देख रही हैं। समस्या क्या है, जल्दी बताओ।
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उन्होंने बहू की बीमारी के बारे में बताते हुए उसका स्वास्थ्य दिन प्रतिदिन खराब होने की बात कही। यह सुनने के बाद डॉक्टर ने कहा कि अभी तक दवा की याद नहीं आई। सबको समस्या नजदीक आने पर ही याद आती है। सबीना डॉक्टर से कोई ताकत की दवा के बारे में पूछ बैठी। यह सुनते ही डॉक्टर ने कहा जो बोल रही हूं, वह सुन लो। ज्यादा बातें नहीं। यह कहते हुए फोन काट दिया। चिलबिला निवासी रवींद्र जायसवाल ने कोरोना से जुड़ी जानकारी के साथ ही तेज बुखार आने पर दवा लेने व एहतियात की जानकारी के लिए सोमवार को जिला अस्पताल के एक डॉक्टर के मोबाइल नंबर पर फोन किया। कई बार उसने फोन किया ,लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। एक बार किसी ने फोन उठाया भी तो बोला गया अभी डॉक्टर साहब व्यस्त हैं, बाद में काल करें।
लालगंज कोतवाली के मिश्रपुर निवासी एक युवक बीस दिन पहले संक्रमित हो गया था। अब उसके एक करीबी की रिपोर्ट भी संक्रमित आई है। सोमवार को उसने सीएमओ कंट्रोल रूम पर फोन किया। कई बार फोन करने के बाद भी रिस्पांस नहीं मिला। बाद में किसी ने फोन उठाया। उसने होम आइसोलेशन में रहते हुए दवाओं के बारे में जानकारी मांगी। उसे बताया गया कि उसके पास कुछ देर में फोन जाएगा। देर शाम तक वह स्वास्थ्य विभाग की काल का इंतजार करता रहा।
8654 मरीजों का टेलीमेडिसीन के जरिए इलाज का दावा
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि अस्पतालों में टेलीमेडिसन के जरिए 30 अगस्त तक कुल 8654 मरीजों का मागदर्शन करने के साथ ही दवा की सलाह दी जा चुकी है।
सीएमओ कार्यालय में कंट्रोल रूम में अब तक 6387 ने कोरोना की जानकारी के लिए फोन किया। स्वास्थ्य विभाग भले ही टेलीमेडिसिन के जरिए लोगों को सलाह देने का दावा कर रहा हो, लेकिन हर दिन स्वास्थ्य विभाग से पत्र जारी करने वाले डीपीएम राजशेखर को यह नहीं मालूम कि एक माह में कितने लोगों ने टेलीमेडिसिन के जरिए अपनी बीमारी की बाबत बातचीत की। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग केवल कागजी आंकड़ेबाजी में ही व्यस्त है।
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इसमें कुछ डॉक्टर तो मरीजों को परामर्श देते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो सीधे मुंह बात तक नहीं करते। कभी उनका फोन कोई और उठाता है और डाक्टर के व्यस्त होने की जानकारी देकर काट देता है। इससे मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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शहर के जोगापुर की रहने वाली सबीना की बहू गर्भवती है। कोरोना के चलते वह अस्पताल जाना बेहतर नहीं समझ रही। उन्होंने सोमवार को महिला अस्पताल के डाक्टरों के मोबाइल नंबर पर फोन किया। दो बार फोन रिसीव नहीं हुआ। तीसरी बार काल रिसीव करते ही महिला चिकित्सक भड़क उठीं। कहा कि अभी वह मरीज देख रही हैं। समस्या क्या है, जल्दी बताओ।
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उन्होंने बहू की बीमारी के बारे में बताते हुए उसका स्वास्थ्य दिन प्रतिदिन खराब होने की बात कही। यह सुनने के बाद डॉक्टर ने कहा कि अभी तक दवा की याद नहीं आई। सबको समस्या नजदीक आने पर ही याद आती है। सबीना डॉक्टर से कोई ताकत की दवा के बारे में पूछ बैठी। यह सुनते ही डॉक्टर ने कहा जो बोल रही हूं, वह सुन लो। ज्यादा बातें नहीं। यह कहते हुए फोन काट दिया। चिलबिला निवासी रवींद्र जायसवाल ने कोरोना से जुड़ी जानकारी के साथ ही तेज बुखार आने पर दवा लेने व एहतियात की जानकारी के लिए सोमवार को जिला अस्पताल के एक डॉक्टर के मोबाइल नंबर पर फोन किया। कई बार उसने फोन किया ,लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। एक बार किसी ने फोन उठाया भी तो बोला गया अभी डॉक्टर साहब व्यस्त हैं, बाद में काल करें।
लालगंज कोतवाली के मिश्रपुर निवासी एक युवक बीस दिन पहले संक्रमित हो गया था। अब उसके एक करीबी की रिपोर्ट भी संक्रमित आई है। सोमवार को उसने सीएमओ कंट्रोल रूम पर फोन किया। कई बार फोन करने के बाद भी रिस्पांस नहीं मिला। बाद में किसी ने फोन उठाया। उसने होम आइसोलेशन में रहते हुए दवाओं के बारे में जानकारी मांगी। उसे बताया गया कि उसके पास कुछ देर में फोन जाएगा। देर शाम तक वह स्वास्थ्य विभाग की काल का इंतजार करता रहा।
8654 मरीजों का टेलीमेडिसीन के जरिए इलाज का दावा
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि अस्पतालों में टेलीमेडिसन के जरिए 30 अगस्त तक कुल 8654 मरीजों का मागदर्शन करने के साथ ही दवा की सलाह दी जा चुकी है।
सीएमओ कार्यालय में कंट्रोल रूम में अब तक 6387 ने कोरोना की जानकारी के लिए फोन किया। स्वास्थ्य विभाग भले ही टेलीमेडिसिन के जरिए लोगों को सलाह देने का दावा कर रहा हो, लेकिन हर दिन स्वास्थ्य विभाग से पत्र जारी करने वाले डीपीएम राजशेखर को यह नहीं मालूम कि एक माह में कितने लोगों ने टेलीमेडिसिन के जरिए अपनी बीमारी की बाबत बातचीत की। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग केवल कागजी आंकड़ेबाजी में ही व्यस्त है।