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प्रतापगढ़: सात बीडीओ के भरोसे चल रहे सत्रह विकास खंड
Tue, 05 Feb 2019 12:54 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 05 Feb 2019 12:54 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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जिले के खंड विकास अधिकारियों की भारी कमी है। जनपद के 17 विकास खंडों के लिए मात्र सात बीडीओ की तैनाती की गई है। इससे विकास कार्य जहां प्रभावित हो रहा है, वहीं कर्मचारी मनमानी कर रहे हैं। बीडीओ की कमी से अपर सांख्यिकी अधिकारियों को बीडीओ का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
ग्रामीण इलाकों में विकास का पहिया कैसे आगे बढ़े, कदम-कदम पर इतने रोड़े हैं कि उनसे बच कर निकलना मुश्किल होता है। ब्लाकों में मुखिया के रुप में तैनात होने वाले बीडीओ की कमी के चलते विकास कार्य ठप पड़ा हुआ है। जिले में तैनात सात बीडीओ को दो-दो ब्लाकों का चार्ज दिया गया है। बेलखरनाथधाम और लालगंज में एडीसीओ को अतिरिक्त चार्ज दिया गया है, तो गौरा और शिवगढ़ ब्लाकों की जिम्मेदारी अपर सांख्यिकी अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, जबकि संडवा चंद्रिका विकास खंड में संविदा पर बीडीओ की तैनाती की गई है। बीडीओ की कमी से जहां विकास कार्य ठप है, वहीं ग्राम पंचायतों की समस्याओं का निराकरण करने वाला कोई नहीं है।
बीडीओ की कमी होने कर्मचारी भी मनमानी पर उतर आए हैं। बीते वित्तीय वर्ष में अनियमितता के जो मामले सामने आए हैं, उनमें अधिकांश ऐसेे ब्लाक हैं, जहां स्थाई बीडीओ की तैनाती नहीं हुई है। ब्लाकों का अतिरिक्त प्रभार देखने वाले बीडीओ एक या दो दिन ही विकास खंड में समय देते हैं, ऐसेे में न तो कार्यों का सत्यापन कर पाते हैं और वास्तविकता की जानकारी हो पाती है। फिलहाल जब तक पर्याप्त बीडीओ की तैनाती नहीं होती है, तब तक यह समस्या बरकरार रहेगी।
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मंगरौरा बीडीओ को तीन ब्लाकों का प्रभार
मंगरौरा ब्लाक में तैनात बीडीओ को मनरेगा का तीन ब्लाकों का चार्ज दिया गया है। मंगरौरा, बेलखरनाथधाम और पट्टी ब्लाक भी शामिल है। ऐेसे में वह सिर्फ भुगतान करने के लिए ही ब्लाक में जाते हैं। बाकी समय वह मंगरौरा में ही देते हैं।
बीडीओ भी उठा रहे हैं नाजायज फायदा
जिले में बीडीओ की कमी का फायदा साथी उठा रहे हैं। प्राय: गायब रहने वाले बीडीओ किसी भी ब्लाक में समय नहीं देते हैं। जब कोई शिकायत आती है, तो वह दूसरे ब्लाक में होने का बहाना बताकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। सदर ब्लाक के बीडीओ को गौरा ब्लाक का मनरेगा का चार्ज है। जब वह गायब होते हैं, तो कर्मचारी बताते हैं कि गौरा ब्लाक गए होंगे।
जिले में बीडीओ की बहुत कमी है। शासन को कई बार पत्र लिखा गया, मगर अभी तक मांग पूरी नहीं हो पा रही है। किसी तरह अतिरिक्त प्रभार सौंपकर काम चलाया जा रहा है।
सुदामा प्रसाद, डीडीओ
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ग्रामीण इलाकों में विकास का पहिया कैसे आगे बढ़े, कदम-कदम पर इतने रोड़े हैं कि उनसे बच कर निकलना मुश्किल होता है। ब्लाकों में मुखिया के रुप में तैनात होने वाले बीडीओ की कमी के चलते विकास कार्य ठप पड़ा हुआ है। जिले में तैनात सात बीडीओ को दो-दो ब्लाकों का चार्ज दिया गया है। बेलखरनाथधाम और लालगंज में एडीसीओ को अतिरिक्त चार्ज दिया गया है, तो गौरा और शिवगढ़ ब्लाकों की जिम्मेदारी अपर सांख्यिकी अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, जबकि संडवा चंद्रिका विकास खंड में संविदा पर बीडीओ की तैनाती की गई है। बीडीओ की कमी से जहां विकास कार्य ठप है, वहीं ग्राम पंचायतों की समस्याओं का निराकरण करने वाला कोई नहीं है।
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बीडीओ की कमी होने कर्मचारी भी मनमानी पर उतर आए हैं। बीते वित्तीय वर्ष में अनियमितता के जो मामले सामने आए हैं, उनमें अधिकांश ऐसेे ब्लाक हैं, जहां स्थाई बीडीओ की तैनाती नहीं हुई है। ब्लाकों का अतिरिक्त प्रभार देखने वाले बीडीओ एक या दो दिन ही विकास खंड में समय देते हैं, ऐसेे में न तो कार्यों का सत्यापन कर पाते हैं और वास्तविकता की जानकारी हो पाती है। फिलहाल जब तक पर्याप्त बीडीओ की तैनाती नहीं होती है, तब तक यह समस्या बरकरार रहेगी।
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मंगरौरा बीडीओ को तीन ब्लाकों का प्रभार
मंगरौरा ब्लाक में तैनात बीडीओ को मनरेगा का तीन ब्लाकों का चार्ज दिया गया है। मंगरौरा, बेलखरनाथधाम और पट्टी ब्लाक भी शामिल है। ऐेसे में वह सिर्फ भुगतान करने के लिए ही ब्लाक में जाते हैं। बाकी समय वह मंगरौरा में ही देते हैं।
बीडीओ भी उठा रहे हैं नाजायज फायदा
जिले में बीडीओ की कमी का फायदा साथी उठा रहे हैं। प्राय: गायब रहने वाले बीडीओ किसी भी ब्लाक में समय नहीं देते हैं। जब कोई शिकायत आती है, तो वह दूसरे ब्लाक में होने का बहाना बताकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। सदर ब्लाक के बीडीओ को गौरा ब्लाक का मनरेगा का चार्ज है। जब वह गायब होते हैं, तो कर्मचारी बताते हैं कि गौरा ब्लाक गए होंगे।
जिले में बीडीओ की बहुत कमी है। शासन को कई बार पत्र लिखा गया, मगर अभी तक मांग पूरी नहीं हो पा रही है। किसी तरह अतिरिक्त प्रभार सौंपकर काम चलाया जा रहा है।
सुदामा प्रसाद, डीडीओ