प्रतापगढ़ : राजाभैया की पत्नी ने अक्षय प्रताप सहित सात पर दर्ज कराया केस, धोखाधड़ी और जालसाजी का आरोप
कुंडा के विधायक और सूबे के पूर्व कैबिनेट मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजाभैया की पत्नी भानवी कुमारी ने राजाभैया के बेहद करीबी और एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपालजी सहित पांच लोगों के खिलाफ नई दिल्ली के आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लू) थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया है।
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जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रतापगढ़ के कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया की पत्नी भानवी कुमारी ने विधान परिषद सदस्य अक्षय प्रताप सिंह, चार्टर्ड एकाउंटेंट सहित सात लोगों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराधा शाखा (ईओडब्ल्यू) में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश रचने समेत कई विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज करवाया है। उन्होंने बताया कि आरोपी उन्हें बेदखल कर कंपनी की संपत्तियों को हड़प कर अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।
अपनी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया है कि अक्षय प्रताप ने उनके फर्जी हस्ताक्षर कर उनकी कंपनी के ज्यादातर शेयर हासिल कर लिए हैं। शिकायत पर शाखा ने उत्तर प्रदेश के अमेठी के अक्षय प्रताप सिंह, अनिल कुमार सिंह, इंद्र देव पटेल, प्रतापगढ़ के कुंडा के उमेश कुमार निगम, हरि ओम शंकर श्रीवास्तव, लखनऊ के सीए अरुण कुमार रस्तोगी और राम देव यादव व अन्य अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
भानवी कुमारी सिंह ने बताया कि उनकी कंपनी श्री दा प्रापर्टीज प्राइवेट लिमिटेड है। वह कंपनी की निदेशक हैं और इसमें उनके नाम से सबसे ज्यादा शेयर हैं। एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह ने सीए अरुण कुमार रस्तोगी और अन्य आरोपितों के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा कर उनकी कंपनी के ज्यादातर शेयर हथिया लिए। साथ ही उनके फर्जी हस्ताक्षर कर कंपनी में निदेशक बन गए हैं।
26 जुलाई, 2017 से अवैध रूप से कंपनी के निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया। कंपनी में केवल दो निदेशक थे। इसमें एक वह और दूसरी उनकी बेटी राघवी कुमार शामिल हैं। दोनों में से किसी ने भी कंपनी के किसी भी निदेशक की नियुक्ति को मंजूरी नहीं दी थी। उन्होंने न तो किसी बोर्ड बैठक का आयोजन किया था और न ही उसमें भाग लिया था और न ही संबंधित बोर्ड बैठक के किसी कागजात पर हस्ताक्षर किए थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि उसके जाली हस्ताक्षर कर निदेशक के रूप में अक्षय प्रताप सिंह, अनिल कुमार सिंह और रामदेव यादव की अवैध नियुक्ति की गई है। भानवी कुमारी सिंह ने कंपनी के कुछ दस्तावेज भी पुलिस को सौंपे हैं। इन दस्तावेजों पर उनके डिजिटल हस्ताक्षर हैं। उन्होंने बताया कि यह हस्ताक्षर फर्जी हैं। अक्षय प्रताप ने ही यह हस्ताक्षर शेयर हथियाने के लिए किए हैं। कंपनी की अमेठी, लखनऊ और दिल्ली-एनसीआर में कई संपत्तियां हैं।
राजाभैया के बेहद खास हैं अक्षय प्रताप
विधान परिषद सदस्य अक्षय प्रताप सिंह रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजाभैया के बेहद खास हैं। अक्षय प्रताप सिंह तीन बार से एमएलसी हैं और एक बार प्रतापगढ से सांसद भी रह चुके हैं। वह राजाभैया के रिश्तेदार भी हैं। अक्षय प्रताप सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराए जाने को लेकर राजनैतिक गलियारों में माहौल गर्म हो गया है और इसको राजाभैया के परिवार में चल रहा मतभेद भी सामने आ गया है।
फर्जी पते पर रिवॉल्वर का लाइसेंस लेने पर हो चुकी है सजा
एमएलसी और पूर्व सांसद अक्षय प्रताप सिंह को फर्जी पते पर रिवॉल्वर का लाइसेंस लेने के मामले में एमपीएमएलए कोर्ट से सजा भी मिल चुकी है। एमएलसी चुनाव के ठीक के पहले 23 मार्च 2022 को सात साल की सजा और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी, हालांकि जिला जज की अदालत ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया था।