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प्रतापगढ़: आयुष्मान के मरीजों का इलाज कर फंसे प्राइवेट अस्पताल

Sat, 23 Nov 2019 01:03 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 23 Nov 2019 01:03 AM IST
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Pratapgarh: Private hospital stranded after treating Ayushmann's patients
जिला अस्पताल में स्थित प्रधानमंत्री जन आरोग्य आयुष्मान वार्ड में भर्ती मरीज। - फोटो : PRATAPGARH
आयुष्मान भारत योजना के तहत चयनित प्राइवेट अस्पताल इस योजना के मरीजों का इलाज करने के बाद बुरे फंस गए हैं। उनका लाखों का भुगतान अटक गया है। नए नियमों के चलते उन्हें स्वास्थ्य विभाग से भुगतान नहीं हो पा रहा है। ऐसे में अस्पताल संचालकों ने अब इलाज हाथ खड़े कर दिए हैं।
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प्रधानमंत्री जन आरोग्य आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब मरीजों का पांच लाख रुपये तक मुफ्त उपचार के लिए सरकार ने जिला व महिला अस्पताल के साथ ही सीएचसी व पीएचसी में व्यवस्था की है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग ने सदर बाजार स्थित रूमा नर्सिंगहोम, पल्टन बाजार स्थित संजीवनी हास्पिटल और अजीत नगर स्थित शांतनु अस्पताल का भी चयन किया।
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यहां आयुष्मान भारत की योजना में शामिल मरीजों के उपचार के लिए अलग से व्यवस्था भी कर दी गई। जिला व महिला अस्पताल में आयुष्मान भारत के मरीजों का उपचार वहां तैनात चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मचारी करते हैं। सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के इलाज व भुगतान के लिए कुछ नियमों में बदलाव कर दिया। जिसके चलते मरीजों के उपचार के बाद भुगतान की समस्या पैदा होने लगी। नए नियमों के अनुसार प्राइवेट अस्पतालों में पैथालाजिस्ट रखना जरूरी है।
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खून व पेशाब की जांच रिपोर्ट आनलाइन ही मानी जाएगी। आपरेशन व उपचार के लिए मरीजों के खून व पेशाब की जांच अस्पतालों में कराई जानी चाहिए। रेडियोलाजिस्ट भी होना चाहिए। नया नियम लागू होने के बाद मरीजों के उपचार के बाद भुगतान में समस्या पैदा हो रही है। भुगतान के लिए डिमांड भेजने पर वहां से कुछ बिलों में आपित्तयां लगाई जा रही हैं।
जिसकी जांच काफी दिनों तक पूरी नहीं हो पाती। इससे भुगतान फंस गया है। तीनों निजी अस्पतालों में अब तक 418 मरीजों का उपचार हो चुका है और लगभग 24 लाख रुपये भुगतान हुए हैं, लेकिन 18 लाख से अधिक का भुगतान अटक गया है। नए नियमों से उत्पन्न हो रही समस्या को देखते हुए अस्पताल संचालकों ने योजना के तहत मरीजों का इलाज करने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
तीनों अस्पतालों में उपचार व भुगतान पर एक नजर
अस्पताल मरीजों की संख्या कुल धनराशि भुगतान
रूमा नर्सिंगहोम 295 25.33 लाख 12.56 लाख
संजीवनी हास्पिटल 95 13.81 लाख 9.49 लाख
शांतनु हास्पिटल 28 3.82 लाख 2.5 लाख
आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब मरीजों के उपचार के लिए तीन निजी अस्पतालों का चयन किया गया है। मरीजों के उपचार के बाद भुगतान के लिए जो डिमांड उनके द्वारा भेजी जाती है, उसकी मानीटरिंग एमडी इंडिया आईएसए के स्तर से होती है। जिस भुगतान पर आपित्तयां लगाई जाती हैं, उससे संबंधित अभिलेख फिर से भेजना होता है। जितना विलंब होगा, उतना भुगतान में समय लगेगा। कुछ नियमों में अब बदलाव हुए हैं। फिलहाल नियमों के हिसाब से अभिलेख उपलब्ध कराते ही भुगतान हो रहा है। रूमा व संजीवनी अस्पताल संचालकों की आपत्ति मिली है। जिसे अधिकारियों को भेजा जा रहा है। डा. सुधाकर सिंह, कार्यक्रम अधिकारी आयुष्मान भारत।
आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत में आवेदन करते समय अस्पताल में उपलब्ध सभी सुविधाओं को दर्शाया गया था। अब नए नियम फिर से लागू किए जा रहे हैं। जिससे मरीजों का उपचार होने के बाद भुगतान में दिक्कत हो रही है। ऐसे में उनका रुपया फंस जाता है। इससे मरीजों का इलाज करने में समस्या हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। डा. मनीष सिंह, संचालक, रूमा नर्सिंगहोम।

आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का उपचार किया जा रहा है। अब फिर से नए नियम थोपे जा रहे हैं। जो सरकारी अस्पतालों में भी नहीं उपलब्ध हैं। पैथालाजिस्ट व रेडियोलाजिस्ट के बिना सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान के अलावा दूसरे मरीजों का उपचार हो रहा है। ऐसे में अब आयुष्मान के मरीजों का उपचार करने में असुविधा हो रही है। अब मरीजों का उपचार न कर पाने असमर्थ होने का पत्र मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय भेज दिया हूं। डा. एसएस गुप्ता, संचालक, संजीवनी हास्पिटल

जिला अस्पताल में स्थित प्रधानमंत्री जन आरोग्य आयुष्मान वार्ड।

जिला अस्पताल में स्थित प्रधानमंत्री जन आरोग्य आयुष्मान वार्ड।- फोटो : PRATAPGARH

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