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कैसे रोके जाएंगे बवाली, होमगार्डों के भरोसे थानों की रखवाली

Mon, 29 Feb 2016 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Mon, 29 Feb 2016 11:48 PM IST
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जनपद की कोतवाली व थानों में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सिपाही के स्थान पर होमगार्ड व पीआरडी के जवानों से पहरेदारी कराई जा रही है। मानिकपुर थाने पर तैनात संतरी की हत्या के बाद भी आला अधिकारी चेत नहीं रहे हैं। वर्तमान में पुलिस अधिकारियों के साथ ही कोतवाल व थानेदारों की मनमानी के चलते सिपाहियों की ड्यूटी थाने पर संतरी के रूप में नहीं लग रही है। जबकि थानों की पहरेदारी करने का जिम्मा सिपाहियों का है। थाने में तैनात सिपाहियों से चक्रवार पहरेदारी का काम लिया जाता है। इसके लिए जीडी में तस्करा भी बराबर दर्ज होता है। जिले के हर थानों में मौजूदा समय में होमगार्ड और पीआरडी के जवानोें को पहरे पर लगाया जाता है।
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रात हो या दिन पुलिस अफसरों के आदेश के बाद होमगार्ड संतरी व मुंशी को छोड़कर थानेदार व कोतवाल अफसर गश्त के लिए रवाना हो जाते हैं। अब ऐसे हालात में थाने पर भी कुछ ही पुलिसकर्मी बचते हैं। होमगार्डों से थाने में नियम विरुद्ध संतरी की ड्यूटी ली जाती है। वह भी एक होमगार्ड से आठ घंटे तक पहरेदारी की ड्यूटी ली जाती है। इससे इतर सिपाहियों को संतरी की ड्यूटी महज कुछ घंटे ही करनी पड़ती है। मानिकपुर में संतरी ड्यूटी पर मौजूद होमगार्ड की हत्या के बाद भी आला अफसर नहीं चेत रहे हैं। अभी भी थानों की पहरेदारी होमगार्डों से ही कराई जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि थाना परिसर में कोई बवाल होने लगेगा तो होमगार्ड व पीआरडी के जवान स्थानीय होने के नाते मैदान छोड़ देंगे। जिससे थानों पर अप्रिय वारदात अंजाम देने वाले अपनी मंशा में कामयाब हो सकते हैं।
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होमगार्डों को सरकारी असलहा चलाने व ऐसे हालात से निपटने के लिए प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। केवल उन लोगों को शुरुआती दौर में ही असलहा चलाने का हुनर सिखाया जाता है। इसके बाद कभी कोई प्रशिक्षण नहीं होता है। जबकि पुलिसकर्मियों को बराबर आधुनिक व पुराने असलहों का प्रशिक्षण समय-समय पर दिया जाता रहता है। ऐसे में हमला व बवाल के दौरान सिपाही साहस का परिचय देते हुए बदमाशों पर जवाबी हमला बोल सकते हैं लेकिन होमगार्ड अप्रशिक्षित होने के कारण असलहा चलाने मेें अक्षम साबित होते हैं।
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