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अब जिले में होगी एमडीआर टीबी जांच
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Wed, 24 Feb 2016 11:36 PM IST
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टीबी के गंभीर रोगियों के लिए इलाहाबाद से आने वाली एमडीआर टीबी (मल्टी ड्रग्स रेजिसटेंट) की रिपोर्ट का इंतजार खत्म हुआ। अब उनकी यह जांच जिला टीबी क्लीनिक पर हो जाएगी। जिस मशीन से यह जांच की जाती है उसकी सुविधा क्लीनिक पर होने जा रही है। गांव, देहात के एमडीआर के मरीज अब नजदीक के टीबी यूनिट पर अपना बलगम परीक्षण के लिए दे सकते हैं। इसके लिए उनको मुख्यालय आने की जरूरत नहीं है।
सामान्य तौर पर टीबी से पीड़ितों की कैटेगरी एक और दो की बलगम की जांच टीबी क्लीनिक, सीएचसी और पीएचसी की टीबी यूनिट पर हो जाया करती है। डॉक्टरों के अनुसार दोनों ही स्टेज पर दवा करने के बाद भी जब टीबी ठीक नहीं होती है तो मरीज को तीसरी कैटेगरी में रखा जाता है। इसका नाम एमडीआर टीबी है। इस तरह के मरीजों के बलगम की जांच की सुविधा प्रतापगढ़ में नहीं थी। इस तरह के जो भी केस टीबी यूनिट या जिला अस्पताल से टीबी क्लीनिक पर आते हैं, उनके बलगम को एकत्र करके जांच के लिए इलाहाबाद के टीबी अस्पताल में भेजा जाता है। जिले में एमडीआर जांच मशीन के न होने से डॉक्टरों को मजबूरी में ऐसा करना पड़ता है।
इससे मरीजों को भी काफी दिक्कतें आती हैं। जो रिपोर्ट कुछ घंटों में मिल जानी चाहिए उसके लिए एक सप्ताह तक इंतजार करना पड़ता है। इलाहाबाद से रिपोर्ट आने के बाद ही डॉक्टर मरीज का आगे का इलाज चालू करते हैं। उसके पहले उसकी दवा बंद रखी जाती है। महकमे ने एमडीआर टीबी की जांच के लिए जिला मुख्यालय की टीबी क्लीनिक पर मशीन लगाने की तैयारी की है। मशीन लगने के बाद जो भी मरीज एमडीआर कैटेगरी का होगा उसकी जांच यहीं पर हो जाएगी। मरीजों को इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं है। मशीन का नाम सीबी एनएएटी (कॉर्टेज बेस्ड न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफीकेशन टेस्ट) है। डॉक्टरों के अनुसार इसकी जांच रिपोर्ट तीन घंटे में मिल जाएगी। इसी रिपोर्ट को इलाहाबाद से आने में एक सप्ताह का समय लग जाता था।
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सामान्य तौर पर टीबी से पीड़ितों की कैटेगरी एक और दो की बलगम की जांच टीबी क्लीनिक, सीएचसी और पीएचसी की टीबी यूनिट पर हो जाया करती है। डॉक्टरों के अनुसार दोनों ही स्टेज पर दवा करने के बाद भी जब टीबी ठीक नहीं होती है तो मरीज को तीसरी कैटेगरी में रखा जाता है। इसका नाम एमडीआर टीबी है। इस तरह के मरीजों के बलगम की जांच की सुविधा प्रतापगढ़ में नहीं थी। इस तरह के जो भी केस टीबी यूनिट या जिला अस्पताल से टीबी क्लीनिक पर आते हैं, उनके बलगम को एकत्र करके जांच के लिए इलाहाबाद के टीबी अस्पताल में भेजा जाता है। जिले में एमडीआर जांच मशीन के न होने से डॉक्टरों को मजबूरी में ऐसा करना पड़ता है।
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इससे मरीजों को भी काफी दिक्कतें आती हैं। जो रिपोर्ट कुछ घंटों में मिल जानी चाहिए उसके लिए एक सप्ताह तक इंतजार करना पड़ता है। इलाहाबाद से रिपोर्ट आने के बाद ही डॉक्टर मरीज का आगे का इलाज चालू करते हैं। उसके पहले उसकी दवा बंद रखी जाती है। महकमे ने एमडीआर टीबी की जांच के लिए जिला मुख्यालय की टीबी क्लीनिक पर मशीन लगाने की तैयारी की है। मशीन लगने के बाद जो भी मरीज एमडीआर कैटेगरी का होगा उसकी जांच यहीं पर हो जाएगी। मरीजों को इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं है। मशीन का नाम सीबी एनएएटी (कॉर्टेज बेस्ड न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफीकेशन टेस्ट) है। डॉक्टरों के अनुसार इसकी जांच रिपोर्ट तीन घंटे में मिल जाएगी। इसी रिपोर्ट को इलाहाबाद से आने में एक सप्ताह का समय लग जाता था।
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