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मौज कर रही अफसरों की फौज
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Wed, 24 Feb 2016 11:32 PM IST
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शासन के आदेश को जिले के अफसरों ने हवा में उड़ा दिया है। सुबह दस से बारह बजे तक विभिन्न विभागों के अफसर नियमित अपने कार्यालयों में नहीं बैठ रहे हैं। डीएम हर रोज इसे लेकर फरमान जारी कर रहे हैं, लेकिन मातहत नाफरमानी करने में जुटे हैं। लगातार सख्ती के बाद भी उनकी आदतों में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है। बुधवार को ‘अमर उजाला’ ने कई विभागों की पड़ताल की। इस दौरान कई अधिकारी गायब मिले। कुछ के कक्ष में तो ताला लटकता मिला। हां फरियादी जरूर उनके इंतजार में बैठे हुए थे।
सुबह 10.05 बजे कचहरी स्थित आबकारी विभाग का दफ्तर तो खुला हुआ था, लेकिन चपरासी छोड़कर वहां कोई मौजूद नहीं था। पूछने पर उसने बताया कि यहां व्यवस्थापन का कार्य चल रहा है। जब जिला आबकारी अधिकारी बच्चालाल को फोन लगाया तो उनका जवाब था कि वह अपने कैंप कार्यालय में बैठे हूं। जिला आपूर्ति अधिकारी के कक्ष में तो सुबह ग्यारह बजे तक ताला लटक रहा था। क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी सतीश मिश्रा भी गायब थे। कार्यालय में केवल सह कनिष्ठ लिपिक आमीना खातून बैठी थीं। सुबह 10.20 बजे कृषि विभाग में उप कृषि निदेशक एके बिशभनोई का कक्ष भी सूना पड़ा था। सामने वाले कमरे में कुछ कर्मचारी जरूर मौजूद थे। वरिष्ठ सहायक अजय सिंह ने बताया कि वह अभी बाहर गए हैं।
बड़ी योजनाओं का कागजी घोड़ा दौड़ाने वाले उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह भी सुबह 10.25 तक कार्यालय नहीं पहुंचे थे। आफिस में केवल दो कर्मचारी थे। कनिष्ठ सहायक ताराचंद्र ने बताया कि साहब निरीक्षण पर निकले हैं। मानधाता में जाम में फंसे हैं। जबकि बाहर मिले एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह प्रतिदिन इलाहाबाद से आते-जाते हैं। ऐसे में लेट तो होना ही है।
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सुबह 10.30 बजे विकास भवन में समाज कल्याण अधिकारी की कुर्सी भी खाली थी। वहां मौजूद कर्मचारियों में से किसी ने कहा कि वह डीडीओ के पास बैठे हैं तो कोई कह रहा था कि उनके पास विकलांग विभाग का अतिरिक्त चार्ज है। इसलिए वहां बैठे हैं। द्वितीय तल पर स्थित लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता शलभ श्रीवास्तव का कमरा भी खाली था। बाहर दो महिला परिचारक मौजूद थीं। पूछने पर बताया कि साहब दौरे पर हैं। डीडीओ रमाकांत तिवारी और डीपीआरओ कुंवर सिंह यादव अपने कक्ष में काम निपटाते नजर आए। सुबह 10.40 बजे सीडीओ महेंद्र बहादुर सिंह का कमरा भी खाली पड़ा था। पूछने पर बताया कि राजीव गांधी आजीविका मिशन की बैठक में संडवाचंद्रिका जा रहा हूं। उसके बाद डीएम के साथ बैठक है। इसलिए आज उपस्थित नहीं हूं।
भूमि सुधार निगम में तो अजीब ही नजारा देखने को मिला। सुबह 10.45 बजे परियोजना प्रबंधक इंद्रपाल साहू का कक्ष एकदम सूना था। अंदर कार्यालय में कुछ लोग जरूर थे। इस बीच वहां पहुंचे एक कर्मचारी ने बताया कि साहब अभी थे। कुछ ही देर पहले डीएम और सीडीओ साहब को किसान मेला का कार्ड पहुंचाने गए हैं। मजे की बात यह है कि डीएम एकतरफ 10 से बारह कार्यालय में बैठने के लिए अफसरों की नकेल कस रहे हैं और इसी समय में अफसर उन्हें कार्ड पहुंचाने निकल जा रहे हैं।
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सुबह 10.05 बजे कचहरी स्थित आबकारी विभाग का दफ्तर तो खुला हुआ था, लेकिन चपरासी छोड़कर वहां कोई मौजूद नहीं था। पूछने पर उसने बताया कि यहां व्यवस्थापन का कार्य चल रहा है। जब जिला आबकारी अधिकारी बच्चालाल को फोन लगाया तो उनका जवाब था कि वह अपने कैंप कार्यालय में बैठे हूं। जिला आपूर्ति अधिकारी के कक्ष में तो सुबह ग्यारह बजे तक ताला लटक रहा था। क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी सतीश मिश्रा भी गायब थे। कार्यालय में केवल सह कनिष्ठ लिपिक आमीना खातून बैठी थीं। सुबह 10.20 बजे कृषि विभाग में उप कृषि निदेशक एके बिशभनोई का कक्ष भी सूना पड़ा था। सामने वाले कमरे में कुछ कर्मचारी जरूर मौजूद थे। वरिष्ठ सहायक अजय सिंह ने बताया कि वह अभी बाहर गए हैं।
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बड़ी योजनाओं का कागजी घोड़ा दौड़ाने वाले उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह भी सुबह 10.25 तक कार्यालय नहीं पहुंचे थे। आफिस में केवल दो कर्मचारी थे। कनिष्ठ सहायक ताराचंद्र ने बताया कि साहब निरीक्षण पर निकले हैं। मानधाता में जाम में फंसे हैं। जबकि बाहर मिले एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह प्रतिदिन इलाहाबाद से आते-जाते हैं। ऐसे में लेट तो होना ही है।
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सुबह 10.30 बजे विकास भवन में समाज कल्याण अधिकारी की कुर्सी भी खाली थी। वहां मौजूद कर्मचारियों में से किसी ने कहा कि वह डीडीओ के पास बैठे हैं तो कोई कह रहा था कि उनके पास विकलांग विभाग का अतिरिक्त चार्ज है। इसलिए वहां बैठे हैं। द्वितीय तल पर स्थित लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता शलभ श्रीवास्तव का कमरा भी खाली था। बाहर दो महिला परिचारक मौजूद थीं। पूछने पर बताया कि साहब दौरे पर हैं। डीडीओ रमाकांत तिवारी और डीपीआरओ कुंवर सिंह यादव अपने कक्ष में काम निपटाते नजर आए। सुबह 10.40 बजे सीडीओ महेंद्र बहादुर सिंह का कमरा भी खाली पड़ा था। पूछने पर बताया कि राजीव गांधी आजीविका मिशन की बैठक में संडवाचंद्रिका जा रहा हूं। उसके बाद डीएम के साथ बैठक है। इसलिए आज उपस्थित नहीं हूं।
भूमि सुधार निगम में तो अजीब ही नजारा देखने को मिला। सुबह 10.45 बजे परियोजना प्रबंधक इंद्रपाल साहू का कक्ष एकदम सूना था। अंदर कार्यालय में कुछ लोग जरूर थे। इस बीच वहां पहुंचे एक कर्मचारी ने बताया कि साहब अभी थे। कुछ ही देर पहले डीएम और सीडीओ साहब को किसान मेला का कार्ड पहुंचाने गए हैं। मजे की बात यह है कि डीएम एकतरफ 10 से बारह कार्यालय में बैठने के लिए अफसरों की नकेल कस रहे हैं और इसी समय में अफसर उन्हें कार्ड पहुंचाने निकल जा रहे हैं।