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बेरोजगारों की जेब पर डाका
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Wed, 08 Jul 2015 11:47 PM IST
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बेरोजगारों की जेब पर बुक स्टाल वाले डाका डाल रहे हैं। शहर में खुले कुछ स्टालों पर लोगों को बेवकूफ बनाकर फर्जी भर्ती फार्म धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। जबकि इन भर्तियों का जिक्र न तो रोजगार समाचार पत्रों में होता है और न ही नेट पर। इसके बावजूद इन विक्रेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं होती। यही नहीं इन फर्जी फार्मों के आवेदन में अभ्यर्थियों के सैकड़ों रुपये खर्च हो जाते हैं। किसी भी विभाग में भर्तियां आते ही बेरोजगारों की भीड़ फार्म स्टालों पर पहुंचने लगती है। खरीदारी इतनी अधिक होती है कि कहीं-कहीं तो फार्म तक खत्म हो जाते हैं। इसी का फायदा उठाकर फार्म स्टालों पर बेरोजगारों को बेवकूफ बनाकर लूटा जा रहा है। बंपर भर्ती का बोर्ड लगाकर तमाम कंपनियों व विभागों के आवेदन फार्म रख दिए जाते हैं। उसके बाद उनकी चांदी हो जाती है।
हां अपनी बचत के लिए फार्म के सबसे नीचे वह जरूर लिख देते हैं कि किसी भी त्रुटि के लिए फार्म विक्रेता जिम्मेदार नहीं होगा। इन फार्मों में अधिकांश फर्जी फार्म होते हैं। जिसका आवेदन करने के बाद काल लेटर भी नहीं आता। एक दो नहीं बल्कि कई विभागों के फार्म स्टालों पर रखे जाते हैं। नौकरी के लिए दर-दर भटक रहे बेरोजगार इन फार्मों की खरीदारी करते हैं। यहीं नहीं इन फार्मों पर दिए गए नियमों के आधार पर वह आवेदन शुल्क भी बैंकों और डाकघरों में जमा करते हैं। यह शुल्क 100 से लेकर 500 रुपए तक होता है। इस तरह बेरोजगारों को बेवकूफ बनाकर खुलेआम लूटा जा रहा है।
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हां अपनी बचत के लिए फार्म के सबसे नीचे वह जरूर लिख देते हैं कि किसी भी त्रुटि के लिए फार्म विक्रेता जिम्मेदार नहीं होगा। इन फार्मों में अधिकांश फर्जी फार्म होते हैं। जिसका आवेदन करने के बाद काल लेटर भी नहीं आता। एक दो नहीं बल्कि कई विभागों के फार्म स्टालों पर रखे जाते हैं। नौकरी के लिए दर-दर भटक रहे बेरोजगार इन फार्मों की खरीदारी करते हैं। यहीं नहीं इन फार्मों पर दिए गए नियमों के आधार पर वह आवेदन शुल्क भी बैंकों और डाकघरों में जमा करते हैं। यह शुल्क 100 से लेकर 500 रुपए तक होता है। इस तरह बेरोजगारों को बेवकूफ बनाकर खुलेआम लूटा जा रहा है।
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