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ग्राम न्यायालय की स्थापना के लिए शासन ने मांगे विकल्प
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Thu, 11 Feb 2016 11:29 PM IST
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पर्याप्त भूमि व भवन होने के बाद भी तहसील प्रशासन ग्राम न्यायालय के लिए जमीन न देने के कारण शासन ने अब विकल्प की मांग की है। तहसील प्रशासन के पास बीस एकड़ से अधिक जमीन उपलब्ध है। फिर भी वह मामले को टालमटोल करते हुए रोके हुए है। जिससे अधिवक्ताओं में रोष बढ़ता जा रहा है।
तहसील कार्यालय से लेकर रजिस्ट्री कार्यालय तक लगभग बीस एकड़ से अधिक भूमि राजस्व विभाग की खाली पड़ी हुई है। जिसमें बड़ी बड़ी झाड़ उगी है और वह बेकार पड़ी है। इसके बावजूद तहसील प्रशासन इस जमीन को ग्राम न्यायालय के लिए देने को तैयार नहीं है। इसके अलावा अधिवक्ता भवन कक्ष संख्या 1 का तल आपूर्ति विभाग का हाल सहित अन्य भवन खाली पड़े हैं, जिसमें कार्यालय व न्यायालय आसानी से चल सकता है।
इसके बाद भी पट्टी के विकास को नजरंदाज करते हुए इसकी स्थापना की ओर कोई प्रयास तहसील प्रशासन द्वारा नहीं किया जा रहा है। जिसको लेकर अधिवक्ताओं में रोष बढ़ता ही जा रहा है। पट्टी के अधिवक्ताओं का कथन है कि यदि राजस्व विभाग की जमीन देने में असमर्थ हों तो अन्य विभागों की खाली पड़ी जमीन को प्रस्ताव देकर काम शुरू कराया जाए। इधर शासन ने तहसील प्रशासन को फिर रिमांइडर भेजकर वैकल्पिक व्यवस्था सुझाए जाने की बात कही है। क्योंकि ग्राम न्यायायल अधिनियम पहले से पारित है जिसके चलते लोगों को सस्ता व सरल न्याय उपलब्ध कराना शासन की मंशा है।
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तहसील कार्यालय से लेकर रजिस्ट्री कार्यालय तक लगभग बीस एकड़ से अधिक भूमि राजस्व विभाग की खाली पड़ी हुई है। जिसमें बड़ी बड़ी झाड़ उगी है और वह बेकार पड़ी है। इसके बावजूद तहसील प्रशासन इस जमीन को ग्राम न्यायालय के लिए देने को तैयार नहीं है। इसके अलावा अधिवक्ता भवन कक्ष संख्या 1 का तल आपूर्ति विभाग का हाल सहित अन्य भवन खाली पड़े हैं, जिसमें कार्यालय व न्यायालय आसानी से चल सकता है।
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इसके बाद भी पट्टी के विकास को नजरंदाज करते हुए इसकी स्थापना की ओर कोई प्रयास तहसील प्रशासन द्वारा नहीं किया जा रहा है। जिसको लेकर अधिवक्ताओं में रोष बढ़ता ही जा रहा है। पट्टी के अधिवक्ताओं का कथन है कि यदि राजस्व विभाग की जमीन देने में असमर्थ हों तो अन्य विभागों की खाली पड़ी जमीन को प्रस्ताव देकर काम शुरू कराया जाए। इधर शासन ने तहसील प्रशासन को फिर रिमांइडर भेजकर वैकल्पिक व्यवस्था सुझाए जाने की बात कही है। क्योंकि ग्राम न्यायायल अधिनियम पहले से पारित है जिसके चलते लोगों को सस्ता व सरल न्याय उपलब्ध कराना शासन की मंशा है।
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