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राजकीय विद्यालय में पढ़ाती हैं प्राइवेट शिक्षिकाएं
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Wed, 03 Feb 2016 11:16 PM IST
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राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्राइवेट शिक्षिकाओं को रखकर बच्चों को शिक्षा दिलाई जा रही है। शिक्षकों को घर के काम से फुर्सत ही नहीं है। शिक्षकों के विद्यालय न आने से बच्चों को बुनियादी शिक्षा के साथ समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है।
कालाकांकर विकास खंड के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय वाजिदपुर की कक्षा नौ में 35 व कक्षा 10 में 28 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। आने वाले छात्रा-छात्राओं की संख्या नाम मात्र को होती है। इसका कारण है कि शिक्षकों को विद्यालय आने की फुर्सत नहीं मिलती। विद्यालय में 1500 रुपये पर दो शिक्षिकाएं शिक्षकों ने रख दी हैं। वही बच्चों को अपनी जानकारी के अनुसार शिक्षा देती हैं। बुधवार को विद्यालय में प्राइवेट शिक्षिकाएं ही बच्चों को पढ़ाती मिलीं। विद्यालयों में शौचालय तो है, लेकिन पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके चलते बच्चों को पीने के लिए पानी भी नहीं मिल पाता है। यही नहीं विद्यालय के खिड़की दरवाजे भी टूटे पड़े हैं।
बिजली न होने के कारण पंखे, कम्प्यूटर भी नहीं चलते। यही नहीं बाउंड्रीवाल न होने के कारण अराजकतत्व भी रात में यहीं अपना बसेरा बनाते हैं। बुनियादी सुविधाएं न होने से आसपास के लोग इस विद्यालय में बच्चों का दाखिला कराने से हिचकिचाते हैं। विद्यालय में देर से पहुंची प्रधानाचार्य मंजू यादव ने बताया कि बच्चियों को मदद के लिए रखा गया है। विद्यालय की समस्याओं के बारे में जिला विद्यालय निरीक्षक को चिट्ठी भेजी गई है।
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कालाकांकर विकास खंड के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय वाजिदपुर की कक्षा नौ में 35 व कक्षा 10 में 28 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। आने वाले छात्रा-छात्राओं की संख्या नाम मात्र को होती है। इसका कारण है कि शिक्षकों को विद्यालय आने की फुर्सत नहीं मिलती। विद्यालय में 1500 रुपये पर दो शिक्षिकाएं शिक्षकों ने रख दी हैं। वही बच्चों को अपनी जानकारी के अनुसार शिक्षा देती हैं। बुधवार को विद्यालय में प्राइवेट शिक्षिकाएं ही बच्चों को पढ़ाती मिलीं। विद्यालयों में शौचालय तो है, लेकिन पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके चलते बच्चों को पीने के लिए पानी भी नहीं मिल पाता है। यही नहीं विद्यालय के खिड़की दरवाजे भी टूटे पड़े हैं।
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बिजली न होने के कारण पंखे, कम्प्यूटर भी नहीं चलते। यही नहीं बाउंड्रीवाल न होने के कारण अराजकतत्व भी रात में यहीं अपना बसेरा बनाते हैं। बुनियादी सुविधाएं न होने से आसपास के लोग इस विद्यालय में बच्चों का दाखिला कराने से हिचकिचाते हैं। विद्यालय में देर से पहुंची प्रधानाचार्य मंजू यादव ने बताया कि बच्चियों को मदद के लिए रखा गया है। विद्यालय की समस्याओं के बारे में जिला विद्यालय निरीक्षक को चिट्ठी भेजी गई है।
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