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जान जोखिम में देख बच्चों को छत से फेंका, खुद भी कूदे
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 24 Jan 2016 11:32 PM IST
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नवाबगंज थाना क्षेत्र के पाइकगंज परियावां में शनिवार रात बड़ा हादसा टल गया। देर रात शार्ट सर्किट के कारण अचानक दुकान में आग लग गई। थोड़ी ही देर बाद लपटों ने ऊपर के कमरे को भी अपनी आगोश में लिया। खुद को आग से घिरे देख दंपति को कुछ समझ में नहीं आया तो वह भागकर छत पर पहुंच गए। नीचे उतरने वाली सीढ़ी भी जल रही थी। जान जोखिम में देख दंपति ने अपने दो बच्चों को छत से नीचे फेंक दिया। हालांकि नीचे खड़े लोगों ने दोनों को लपक लिया। जान बचाने के लिए पति-पत्नी को भी छत से कूदना पड़ा। इससे पत्नी का पैर टूट गया, जबकि उसका पति झुलस गया। लोगों के निकलते ही तेज धमाके के साथ घर में रखा सिलेंडर फट गया। इससे खलबली मच गई। बड़ी संख्या में जुटे लोगों ने किसी तरह आग पर काबू पाया।
नवाबगंज थाना क्षेत्र के पाइकगंज परियावां निवासी संजय यादव पुत्र रामप्रताप यादव चौराहे पर किराये का कमरा लेकर मेडिकल स्टोर चलाता है। दुकान के ऊपर बने कमरे में वह बच्चों के साथ रहता है। शनिवार की रात लगभग 3 बजे शार्ट सर्किट से दुकान में आग लग गई। धुआं बाहर निकला तो बरामदे मे सो रहे मोहल्ले के राहुल की नजर पड़ी तो उसने शोर मचाना शुरू कर दिया। इस पर मुहल्ले के लोगों की नींद टूट गई और वे भागकर मौके पर पहुंचे। आग ऊपर कमरे तक पहुंच गई थी और नीचे आने के लिए कोई रास्ता नहीं था। ऐसे में संजय की बेटी खुशी और बेटे अहम को छत से नीचे फेंका गया। नीचे मौजूद राजेश व प्रदीप ने उन्हें लपक लिया।
यही नहीं संजय की पत्नी सविता को भी छत से कूदना पड़ा। इससे उसका एक पैर टूट गया। उधर संजय कुछ सामान निकालने लगा। जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गया। आग बढ़ने पर उसे भी छत से कूदना पड़ा। जैसे ही सब बाहर निकले कि कमरे में रखा गैस सिलेंडर तेज धमाके के साथ फट गया। इससे आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। आग लगने से उसके घर में रखा कूलर, फ्रिज सहित गृहस्थी का सारा सामान जल गया। ग्रामीणों ने फोन कर बिजली कटवाई और आग पर काबू करने का प्रयास करने लगे। सूचना पर फायर ब्रिगेड व पुलिस भी मौके पर पहुंची। तब जाकर किसी तरह आग पर काबू पाया गया।
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रात में आग लगने के बाद यदि मोहल्ले के लोगों की निगाह न पड़ती तो कमरों में कई लाशें झुलसी हुई मिलतीं। बस कुछ ही सेकेंड पहले सभी सुरक्षित निकल गए। मोहल्ले के लोगों ने भी होशियारी का परिचय देते हुए सभी को छत से कूदने को कह दिया। यदि फायर ब्रिगेड और सीढ़ी का इंतजाम करते तो इतनी देर में सिलेंडर फट जाता और फिर लाशें ही मिलतीं। फिलहाल संजय और उसकी पत्नी का इलाज चल रहा है।
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नवाबगंज थाना क्षेत्र के पाइकगंज परियावां निवासी संजय यादव पुत्र रामप्रताप यादव चौराहे पर किराये का कमरा लेकर मेडिकल स्टोर चलाता है। दुकान के ऊपर बने कमरे में वह बच्चों के साथ रहता है। शनिवार की रात लगभग 3 बजे शार्ट सर्किट से दुकान में आग लग गई। धुआं बाहर निकला तो बरामदे मे सो रहे मोहल्ले के राहुल की नजर पड़ी तो उसने शोर मचाना शुरू कर दिया। इस पर मुहल्ले के लोगों की नींद टूट गई और वे भागकर मौके पर पहुंचे। आग ऊपर कमरे तक पहुंच गई थी और नीचे आने के लिए कोई रास्ता नहीं था। ऐसे में संजय की बेटी खुशी और बेटे अहम को छत से नीचे फेंका गया। नीचे मौजूद राजेश व प्रदीप ने उन्हें लपक लिया।
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यही नहीं संजय की पत्नी सविता को भी छत से कूदना पड़ा। इससे उसका एक पैर टूट गया। उधर संजय कुछ सामान निकालने लगा। जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गया। आग बढ़ने पर उसे भी छत से कूदना पड़ा। जैसे ही सब बाहर निकले कि कमरे में रखा गैस सिलेंडर तेज धमाके के साथ फट गया। इससे आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। आग लगने से उसके घर में रखा कूलर, फ्रिज सहित गृहस्थी का सारा सामान जल गया। ग्रामीणों ने फोन कर बिजली कटवाई और आग पर काबू करने का प्रयास करने लगे। सूचना पर फायर ब्रिगेड व पुलिस भी मौके पर पहुंची। तब जाकर किसी तरह आग पर काबू पाया गया।
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रात में आग लगने के बाद यदि मोहल्ले के लोगों की निगाह न पड़ती तो कमरों में कई लाशें झुलसी हुई मिलतीं। बस कुछ ही सेकेंड पहले सभी सुरक्षित निकल गए। मोहल्ले के लोगों ने भी होशियारी का परिचय देते हुए सभी को छत से कूदने को कह दिया। यदि फायर ब्रिगेड और सीढ़ी का इंतजाम करते तो इतनी देर में सिलेंडर फट जाता और फिर लाशें ही मिलतीं। फिलहाल संजय और उसकी पत्नी का इलाज चल रहा है।