{"_id":"4f45099ad9ab8968348fb3557a9d5c0a","slug":"pratapgarh-news-hindi-news-599","type":"story","status":"publish","title_hn":"बजट के अभाव में ठप हो गए गंवई खेल ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बजट के अभाव में ठप हो गए गंवई खेल
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Tue, 12 Jan 2016 11:27 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गांवों की प्रतिभाओं को निखारने के लिए प्रतिवर्ष ब्लाक स्तरीय होने वाली खेलकूद प्रतियोगिता इस वर्ष नहीं हुई। विभागीय अधिकारी जहां बजट का रोना रो रहे हैं, वहीं जिला योजना से मिले 4.15 लाख रुपये को अब तक खर्च नहीं किया जा सका है। युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल युवाओं की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा है। ग्रामीण इलाकों में गठित युवक मंगल दल और महिला मंगल दल को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि बंद होने के साथ ही गांव में होने वाली खेलकूद प्रतियोगिता पर भी ग्रहण लग गया है।
विभागीय अधिकारियों की उदासीनता का परिणाम रहा कि इस वर्ष जिले के 17 ब्लाकों में से किसी भी ब्लाक में खेलकूद का आयोजन नहीं हुआ। इसकी वजह विभागीय अधिकारी बजट के अभाव का रोना रो रहे हैं। चालू वित्तीय वर्ष में जिला योजना से 4.15 लाख रुपये मिले हुए हैं। यह धनराशि युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न विधाओं में खेलकूद का आयोजन करने के लिए दी गई है। मगर अधिकारी इसको अभी तक खर्च नहीं कर सके हैं। वास्तविकता तो यह है कि जिले के इंटर कॉलेजों में होने वाले वार्षिक खेलकूद के परिणाम की सूची लेकर विभागीय अधिकारी अपने विभाग से प्रतियोगिता कराने का दावा कर रहे हैं। जिला युवा कल्याण अधिकारी डीपी चौरसिया ने बताया कि इस वर्ष बजट नहीं मिलने के कारण खेलकूद प्रतियोगिताएं नहीं हो पाई हैं। जिला योजना से जो धनराशि मिली है, उसे खर्च करने की योजना बनाई जा रही है।
पाइका योजना के तहत जिले के 1105 ग्राम पंचायतों में एक-एक क्रीड़ाश्री की नियुक्ति की गई थी। खेलों को प्रोत्साहन देने के लिए इन लोगों को निश्चित मानदेय भी दिया जाता था। मगर योजना बंद होते ही क्रीड़ाश्री भी बेकार हो गए। राजीव गांधी खेल अभियान के तहत ब्लाकों में एक-एक स्टेडियम बनाए जाने थे। स्टेडियम के लिए 6-6 एकड़ जमीन की आवश्यकता थी। मगर किसी भी ब्लाक में जमीन नहीं मिली। इससे योजना भी अधर में लटकी हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विभागीय अधिकारियों की उदासीनता का परिणाम रहा कि इस वर्ष जिले के 17 ब्लाकों में से किसी भी ब्लाक में खेलकूद का आयोजन नहीं हुआ। इसकी वजह विभागीय अधिकारी बजट के अभाव का रोना रो रहे हैं। चालू वित्तीय वर्ष में जिला योजना से 4.15 लाख रुपये मिले हुए हैं। यह धनराशि युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न विधाओं में खेलकूद का आयोजन करने के लिए दी गई है। मगर अधिकारी इसको अभी तक खर्च नहीं कर सके हैं। वास्तविकता तो यह है कि जिले के इंटर कॉलेजों में होने वाले वार्षिक खेलकूद के परिणाम की सूची लेकर विभागीय अधिकारी अपने विभाग से प्रतियोगिता कराने का दावा कर रहे हैं। जिला युवा कल्याण अधिकारी डीपी चौरसिया ने बताया कि इस वर्ष बजट नहीं मिलने के कारण खेलकूद प्रतियोगिताएं नहीं हो पाई हैं। जिला योजना से जो धनराशि मिली है, उसे खर्च करने की योजना बनाई जा रही है।
विज्ञापन
पाइका योजना के तहत जिले के 1105 ग्राम पंचायतों में एक-एक क्रीड़ाश्री की नियुक्ति की गई थी। खेलों को प्रोत्साहन देने के लिए इन लोगों को निश्चित मानदेय भी दिया जाता था। मगर योजना बंद होते ही क्रीड़ाश्री भी बेकार हो गए। राजीव गांधी खेल अभियान के तहत ब्लाकों में एक-एक स्टेडियम बनाए जाने थे। स्टेडियम के लिए 6-6 एकड़ जमीन की आवश्यकता थी। मगर किसी भी ब्लाक में जमीन नहीं मिली। इससे योजना भी अधर में लटकी हुई है।
विज्ञापन