{"_id":"ec4ee7cf7e76d078e38f7e4441dd2dbd","slug":"pratapgarh-news-hindi-news-572","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेल्हा में हर तरफ धड़ल्ले से प्रयोग हो रही पॉलीथिन ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेल्हा में हर तरफ धड़ल्ले से प्रयोग हो रही पॉलीथिन
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Mon, 04 Jan 2016 11:17 PM IST
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शासन की रोक के बावजूद जिले में पॉलीथिन पर प्रतिबंध का असर कहीं नहीं दिखाई पड़ रहा है। दुकानदार थोक में पॉलीथिन बेचने के साथ ही फुटकर भी खुलेआम बेच रहे हैं। दुकानदार हों या ठेला वाले, सभी ग्राहकों को पालीथिन में ही सामान दे रहे हैं। सई के किनारे भी पॉलीथिन का अंबार लगा हुआ है।
शासन ने पालीथिन के उत्पादन और बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए दिशा निर्देश जारी किया है। जिसे जिम्मेदार अधिकारियों को अमल में लाना है। शासन के आदेश के बाद से ही लोग पॉलीथिन के स्थान पर दूसरे कैरी बैग की व्यवस्था करने में जुट गए। जिले में अधिकारियों ने शायद शासन के आदेश को गंभीरता से नहीं लिया। तभी तो बेल्हा में खुलेआम पॉलीथिन की बिक्री के साथ उसका जमकर प्रयोग किया जा रहा है।
पॉलीथिन का प्रयोग आम तौर पर खरीददार व दुकानदार करते हैं। उपयोग के बाद इसे कचरे में फेंक दिया जाता है। शहर में अमूमन पॉलीथिन नालियों में फेंक दी जाती हैं। जबकि ग्रामीण इलाके में घूर गड्ढे में डाल दी जाती है। यही पॉलीथिन गांवों में खेतों तक पहुंच जाती है और शहर में नालियों को जाम कर देती है।
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सई नदी के तट पर पॉलीथिन का भंडार दिखाई पड़ता है। बेल्हा देवी तट पर पॉलीथिन ही पॉलीथिन है। रोक के लिए कई बार आला अधिकारियों ने बोर्ड भी लगाया, लेकिन इसका असर कहीं नहीं दिखाई दे रहा है। सई नदी में नालों के जरिए पॉलीथिन बराबर पहुंच रही है।
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शासन ने पालीथिन के उत्पादन और बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए दिशा निर्देश जारी किया है। जिसे जिम्मेदार अधिकारियों को अमल में लाना है। शासन के आदेश के बाद से ही लोग पॉलीथिन के स्थान पर दूसरे कैरी बैग की व्यवस्था करने में जुट गए। जिले में अधिकारियों ने शायद शासन के आदेश को गंभीरता से नहीं लिया। तभी तो बेल्हा में खुलेआम पॉलीथिन की बिक्री के साथ उसका जमकर प्रयोग किया जा रहा है।
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पॉलीथिन का प्रयोग आम तौर पर खरीददार व दुकानदार करते हैं। उपयोग के बाद इसे कचरे में फेंक दिया जाता है। शहर में अमूमन पॉलीथिन नालियों में फेंक दी जाती हैं। जबकि ग्रामीण इलाके में घूर गड्ढे में डाल दी जाती है। यही पॉलीथिन गांवों में खेतों तक पहुंच जाती है और शहर में नालियों को जाम कर देती है।
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सई नदी के तट पर पॉलीथिन का भंडार दिखाई पड़ता है। बेल्हा देवी तट पर पॉलीथिन ही पॉलीथिन है। रोक के लिए कई बार आला अधिकारियों ने बोर्ड भी लगाया, लेकिन इसका असर कहीं नहीं दिखाई दे रहा है। सई नदी में नालों के जरिए पॉलीथिन बराबर पहुंच रही है।