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खुली बैठक में खुल रहे पूर्व प्रधानों के राज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sun, 27 Dec 2015 11:06 PM IST
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गांव की खुली बैठक में पूर्व प्रधानों के बड़े-बड़े राज खुले। ग्रामीणों को पता ही नहीं और उनके नाम पर आवास देकर पैसा निकाल लिया गया। यही नहीं शिक्षक, आंगनबाड़ी, ग्राम रोजगार सेवक बीपीएल कार्ड का लाभ ले रहे थे। इस पर बैठक में हंगामा हुआ।
क्षेत्र के कई गांवों में शनिवार को खुली बैठक का आयोजन किया गया। इसमें पूर्व प्रधानों के बड़े-बड़े राज खुले। बिहार विकास खंड के गोगऊर गांव में प्रधान पिंटू की सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्रामीण उस समय हैरत में पड़ गए जब उन्हें पता चला कि एक पिछड़ी जाति के व्यक्ति को अनुसूचित जाति का बताकर दो-दो आवास दे दिए गए। इसके साथ ही गांव के राम किशुन को इंदिरा आवास दिया गया है लेकिन उनका कहना है कि उन्हें आवास का पैसा ही नहीं मिला। प्रधान ने इंदिरा आवास के डिमांड में अपना नाम भी भेज दिया था।
यही नहीं इस गांव की वंदना पांडेय रोजगार सेवक, विष्णु कुमार शुक्ल संस्कृत विद्यालय के शिक्षक, एक आंगनबाड़ी व इंद्रनारायण होमगार्ड सहित कई ऐसे लोगों को बीपीएल कार्ड दिया गया था जो इसके लायक नहीं थे। इन नामों का खुलासा बैठक में हुआ तो गांव के लोग दंग रह गए। इसके बाद ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस पर उन्हें प्रधान सहित ग्राम पंचायत अधिकारी ने किसी तरह से उन्हें समझाबुझाकर शांत किया।
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क्षेत्र के कई गांवों में शनिवार को खुली बैठक का आयोजन किया गया। इसमें पूर्व प्रधानों के बड़े-बड़े राज खुले। बिहार विकास खंड के गोगऊर गांव में प्रधान पिंटू की सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्रामीण उस समय हैरत में पड़ गए जब उन्हें पता चला कि एक पिछड़ी जाति के व्यक्ति को अनुसूचित जाति का बताकर दो-दो आवास दे दिए गए। इसके साथ ही गांव के राम किशुन को इंदिरा आवास दिया गया है लेकिन उनका कहना है कि उन्हें आवास का पैसा ही नहीं मिला। प्रधान ने इंदिरा आवास के डिमांड में अपना नाम भी भेज दिया था।
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यही नहीं इस गांव की वंदना पांडेय रोजगार सेवक, विष्णु कुमार शुक्ल संस्कृत विद्यालय के शिक्षक, एक आंगनबाड़ी व इंद्रनारायण होमगार्ड सहित कई ऐसे लोगों को बीपीएल कार्ड दिया गया था जो इसके लायक नहीं थे। इन नामों का खुलासा बैठक में हुआ तो गांव के लोग दंग रह गए। इसके बाद ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस पर उन्हें प्रधान सहित ग्राम पंचायत अधिकारी ने किसी तरह से उन्हें समझाबुझाकर शांत किया।
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