{"_id":"99101edee2dc61f53efc1f55e2a28460","slug":"pratapgarh-news-hindi-news-48","type":"story","status":"publish","title_hn":"कई सरकारें बदलीं, पर नहीं बदली बसहा के लोगों की जिंदगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कई सरकारें बदलीं, पर नहीं बदली बसहा के लोगों की जिंदगी
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Mon, 15 Jun 2015 10:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सूबे की सरकार बदलती रही, लेकिन जनपद के कई गांवों की दशा अब भी जस की तस बनी हुई है। अलग-अलग दलों के लोगों ने भले ही सांसद और विधायक के रूप में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया हो, लेकिन रानीगंज थाना क्षेत्र के बसहा के ग्रामीणों को खारे पानी से निजात नहीं दिला सके। गांव के करीब से गुजरी सई नदी के किनारे कपड़ा, बर्तन धोने और नहाने के लिए मजबूर हैं ग्रामीण। कैबिनेट मंत्री शिवाकांत ओझा के विकास का दावा बसहा में खोखला दिखता है।
शहर से बीस किमी दूर बसहा के ग्रामीण कई दशक देख चुके हैं। नेताओं के वादों के दावों में वे छलते चले गए। प्रदेश सरकार के मंत्री शिवाकांत ओझा का यह क्षेत्र है। इसके पहले बसपा से रामशिरोमणि को भी जनता ने मौका दिया था, लेकिन वे भी बस्ती के लोगों के लिए कुछ नहीं कर सके। मौजूदा सांसद भी इस गांव से मुंह मोड़े हुए हैं। गांव में खारे पानी के चलते ग्रामीणों को तमाम समस्या का सामना करना पड़ता है। सुबह हो या शाम नदी के तट पर ग्रामीणों को मेला लगा रहता है। सूर्योदय के साथ ग्रामीणों की दिनचर्या नदी के तट से प्रारंभ होती है और सूर्यास्त होने पर ही जाकर समाप्त होती है।
गांव के रामप्यारे, प्रवीण कुमार, आत्माराम, चंद्रभान, जोखूराम, संजू सरोज, मनोरमा देवी, विमला देवी, फूलकली, सुभना देवी, रामपती व सरोजा ने जनप्रतिनिधियों की अनदेखी पर नाराजगी जताई। कहा कि सिर्फ चुनाव में ही नेताओं के दर्शन होते हैं। वे वादे तो बड़े-बड़े करते हैं, लेकिन पांच साल में भी अपने दावे पूरे नहीं कर सके। लोगों को इस बात का भय रहता है कि सई नदी में पुरुष व महिलाओं का नहाना होता है। कपड़े, बर्तन भी वहीं धुलते हैं। ऐसे में महिलाओं को यह भय बराबर सताता रहता है कि कहीं उनकी आबरू पर कोई डाका डाल दे। इसके चलते कई युवतियों का समूह एक साथ नदी की ओर जाता है। फिलहाल नेताओं के वादों के जाल में बसहा के लोग उलझे रहे और उनका अब तक भला नहीं हो सका।
विज्ञापन
विज्ञापन
शहर से बीस किमी दूर बसहा के ग्रामीण कई दशक देख चुके हैं। नेताओं के वादों के दावों में वे छलते चले गए। प्रदेश सरकार के मंत्री शिवाकांत ओझा का यह क्षेत्र है। इसके पहले बसपा से रामशिरोमणि को भी जनता ने मौका दिया था, लेकिन वे भी बस्ती के लोगों के लिए कुछ नहीं कर सके। मौजूदा सांसद भी इस गांव से मुंह मोड़े हुए हैं। गांव में खारे पानी के चलते ग्रामीणों को तमाम समस्या का सामना करना पड़ता है। सुबह हो या शाम नदी के तट पर ग्रामीणों को मेला लगा रहता है। सूर्योदय के साथ ग्रामीणों की दिनचर्या नदी के तट से प्रारंभ होती है और सूर्यास्त होने पर ही जाकर समाप्त होती है।
विज्ञापन
गांव के रामप्यारे, प्रवीण कुमार, आत्माराम, चंद्रभान, जोखूराम, संजू सरोज, मनोरमा देवी, विमला देवी, फूलकली, सुभना देवी, रामपती व सरोजा ने जनप्रतिनिधियों की अनदेखी पर नाराजगी जताई। कहा कि सिर्फ चुनाव में ही नेताओं के दर्शन होते हैं। वे वादे तो बड़े-बड़े करते हैं, लेकिन पांच साल में भी अपने दावे पूरे नहीं कर सके। लोगों को इस बात का भय रहता है कि सई नदी में पुरुष व महिलाओं का नहाना होता है। कपड़े, बर्तन भी वहीं धुलते हैं। ऐसे में महिलाओं को यह भय बराबर सताता रहता है कि कहीं उनकी आबरू पर कोई डाका डाल दे। इसके चलते कई युवतियों का समूह एक साथ नदी की ओर जाता है। फिलहाल नेताओं के वादों के जाल में बसहा के लोग उलझे रहे और उनका अब तक भला नहीं हो सका।
विज्ञापन