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सरकारी अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था हुई पंगु
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Tue, 08 Dec 2015 11:37 PM IST
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सरकार की उपेक्षा से स्वास्थ्य सेवाएं यहां दम तोड़ रही हैं। अल्ट्रासाउंड की मशीनें होने के बाद भी मरीज भटक रहे हैं। जिला अस्पताल से लेकर तीन सीएचसी में यहां जांच नहीं हो पा रही। इसके पीछे रेडियोलाजिस्ट न होने का अफसर रोना-रो रहे हैं। इसका फायदा प्राइवेट अल्ट्रासाउंड केन्द्र संचालक उठा रहे हैं।
जिले के सरकारी अस्पतालों में लाखों की अल्ट्रासाउंड मशीनें ठप पड़ी हैं। करीब एक वर्ष से आज तक यहां एक भी जांच नहीं हो सकी। यह स्थिति कुंडा, रानीगंज पट्टी सीएचसी के साथ जिला अस्पताल में भी देखने को मिल रही है। इन अस्पतालों में मशीनें सिर्फ व्यवस्था होने का दंभ भर रही हैं। लेकिन उसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
यहां रेडियोलाजिस्ट की तैनाती कई सालों से नहीं है। इससे जांच का काम प्रभावित हो रहा है। इसका फायदा निजी अल्ट्रासाउंड केन्द्र संचालक उठा रहे हैं। जांच के लिए पहुंचे लोगों से वह मनमाना रकम वसूलते हैं। इसके बावजूद शीर्ष अफसरों की आंख में पट्टी बंधी है। यहां तक हर माह शासन को रिपोर्ट भी भेजी जाती है। जिसे देखने के बाद रेडियोलाजिस्ट की व्यवस्था नहीं की जा सकी। सीएमओ डा. विनोद कुमार पांडेय का रटा रटाया जवाब रहता है कि रेडियोलाजिस्ट की तैनाती के लिए लिखा पढ़ी की गई है। इनकी कमी होने से काम नहीं हो पा रहा है। रेडियोलाजिस्ट मिलने पर ही प्रबंध हो पाएगा। हमेशा बैठकों में भी यह समस्या उठाई जाती है।
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जिले के सरकारी अस्पतालों में लाखों की अल्ट्रासाउंड मशीनें ठप पड़ी हैं। करीब एक वर्ष से आज तक यहां एक भी जांच नहीं हो सकी। यह स्थिति कुंडा, रानीगंज पट्टी सीएचसी के साथ जिला अस्पताल में भी देखने को मिल रही है। इन अस्पतालों में मशीनें सिर्फ व्यवस्था होने का दंभ भर रही हैं। लेकिन उसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
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यहां रेडियोलाजिस्ट की तैनाती कई सालों से नहीं है। इससे जांच का काम प्रभावित हो रहा है। इसका फायदा निजी अल्ट्रासाउंड केन्द्र संचालक उठा रहे हैं। जांच के लिए पहुंचे लोगों से वह मनमाना रकम वसूलते हैं। इसके बावजूद शीर्ष अफसरों की आंख में पट्टी बंधी है। यहां तक हर माह शासन को रिपोर्ट भी भेजी जाती है। जिसे देखने के बाद रेडियोलाजिस्ट की व्यवस्था नहीं की जा सकी। सीएमओ डा. विनोद कुमार पांडेय का रटा रटाया जवाब रहता है कि रेडियोलाजिस्ट की तैनाती के लिए लिखा पढ़ी की गई है। इनकी कमी होने से काम नहीं हो पा रहा है। रेडियोलाजिस्ट मिलने पर ही प्रबंध हो पाएगा। हमेशा बैठकों में भी यह समस्या उठाई जाती है।
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