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नहीं बनी बात, सबने खरीदी निविदा
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Tue, 25 Aug 2015 11:27 PM IST
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जिला पंचायत के ठेकेदारों को मनाने में जुटे विभागीय अधिकारी नाकाम रहे। मंगलवार को बातचीत में कोई नतीजा नहीं निकला। इसके बाद ठेकेदारों ने मनचाही निविदाएं खरीदना प्रारंभ कर दिया। इससे जिला पंचायत परिसर में दिनभर अफरातफरी का माहौल कायम रहा। बुधवार को कार्यों के लिए टेंडर होगा।
जिला पंचायत से करीब दो सौ से अधिक सड़क व दूसरे कार्यों की निविदा निकाली गई है। लोगों की मानें तो विकास कार्यों के लिए होने वाले टेंडर में कार्यों को मैनेज करने के लिए जिला पंचायत के अधिकारी व कर्मचारी कई दिनों से परेशान थे। वे चाहते थे कि कार्यों का आपस में बंटवारा हो जाए, ताकि कार्य करने वाले ठेकेदारों को मनचाहा काम मिल सके। मंगलवार दोपहर तक सभी की सहमति बनाने का प्रयास होता रहा, लेकिन बात नहीं बन सकी। तब तक निविदा बिक्री के लिए काउंटर नहीं खोला गया था।
जब अधिकारियों व कर्मचारियों की लगातार ठेकेदारों से हो रही बातचीत असफल हुई, तब जाकर ठेकेदारों के दबाव में निविदा का काउंटर खोला जा सका। यहां भी ठेकेदार से कर्मचारी कार्यों को लेकर सेटिंग करते रहे, लेकिन कोई उनकी बात सुनने के लिए तैयार नहीं था। जिला पंचायत के एक अफसर तो अंदर से बाहर का चक्कर लगाते रहे। आखिर में निविदा के लिए काउंटर खोला गया और ठेकेदारों ने मनपसंद कार्यो के लिए निविदाएं खरीदीं। आखिर अफसर और कर्मचारी ठेकेदारों को मैनेज करने की कोशिश क्यों कर रहे थे, इस बाबत अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत अनिल शर्मा से जानकारी का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने काल रिसीव नहीं की।
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जिला पंचायत से करीब दो सौ से अधिक सड़क व दूसरे कार्यों की निविदा निकाली गई है। लोगों की मानें तो विकास कार्यों के लिए होने वाले टेंडर में कार्यों को मैनेज करने के लिए जिला पंचायत के अधिकारी व कर्मचारी कई दिनों से परेशान थे। वे चाहते थे कि कार्यों का आपस में बंटवारा हो जाए, ताकि कार्य करने वाले ठेकेदारों को मनचाहा काम मिल सके। मंगलवार दोपहर तक सभी की सहमति बनाने का प्रयास होता रहा, लेकिन बात नहीं बन सकी। तब तक निविदा बिक्री के लिए काउंटर नहीं खोला गया था।
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जब अधिकारियों व कर्मचारियों की लगातार ठेकेदारों से हो रही बातचीत असफल हुई, तब जाकर ठेकेदारों के दबाव में निविदा का काउंटर खोला जा सका। यहां भी ठेकेदार से कर्मचारी कार्यों को लेकर सेटिंग करते रहे, लेकिन कोई उनकी बात सुनने के लिए तैयार नहीं था। जिला पंचायत के एक अफसर तो अंदर से बाहर का चक्कर लगाते रहे। आखिर में निविदा के लिए काउंटर खोला गया और ठेकेदारों ने मनपसंद कार्यो के लिए निविदाएं खरीदीं। आखिर अफसर और कर्मचारी ठेकेदारों को मैनेज करने की कोशिश क्यों कर रहे थे, इस बाबत अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत अनिल शर्मा से जानकारी का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने काल रिसीव नहीं की।
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