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नगर पालिका अध्यक्ष का वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार छिना
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Mon, 24 Aug 2015 11:18 PM IST
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लोकायुक्त की रिपोर्ट पर वित्तीय अनियमितता के मामले में शासन ने नगर पालिका अध्यक्ष बेल्हा हरिप्रताप सिंह का वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार छीन लिया है। 15 दिन के भीतर उनसे प्रकरण में जवाब मांगा भी है। इस अवधि में जवाब न दिए जाने पर नगर पालिका अध्यक्ष पद से उन्हें बर्खास्त करने की चेतावनी भी दी गई है।
सभासद मोहिब्बुल आरफीन व उमेशचंद ने लोकायुक्त के यहां नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ परिवाद दायर किया था। लोकायुक्त ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच डीएम को सौंपा था। जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट में कुल पंद्रह मामलों का आरोप प्रमाणित किया गया। जिसमें 10 अदद हाईमास्ट विद्युत उपकरण प्रकाश व्यवस्था के लिए वर्ष 2003 से 2007 के मध्य लगाए गए। इन उपकरणों की आपूर्ति एक ही स्थानीय संस्था से कराई गई। उपकरण आपूर्ति के लिए स्थानीय साप्ताहिक समाचार पत्र में निविदा प्रकाशित कराया गया था। इस निविदा का प्रकाशन राष्ट्रीय या प्रांतीय समाचार पत्र में नहीं हुआ।
कराए गए काम का भुगतान किया गया मगर दरों का सत्यापन तकनीकी विभाग से न कराते हुए पलिका को आर्थिक क्षति पहुुंचाया गई है। इसी तरह अन्य 14 मामलों में डीएम ने लगे आरोपों को साबित किया था। बताया गया कि प्रकरण की गंभीरता व वित्तीय अनियमितता को देखते हुए लोकायुक्त ने रिपोर्ट शासन को भेज दी। भेजे गए रिपोर्ट को शासन ने गंभीरता से लिया और नगर पालिका अध्यक्ष हरिप्रताप सिंह के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार को छीनते हुए प्रकरण में पंद्रह दिन के भीतर जवाब मांगा है। निर्धारित समय के भीतर जवाब न देने पर उन्हें पद से बर्खास्त करने की चेतावनी भी दी है। इस मामले को लेकर नगर पालिका में देर रात तक हड़कंप रहा।
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सभासद मोहिब्बुल आरफीन व उमेशचंद ने लोकायुक्त के यहां नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ परिवाद दायर किया था। लोकायुक्त ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच डीएम को सौंपा था। जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट में कुल पंद्रह मामलों का आरोप प्रमाणित किया गया। जिसमें 10 अदद हाईमास्ट विद्युत उपकरण प्रकाश व्यवस्था के लिए वर्ष 2003 से 2007 के मध्य लगाए गए। इन उपकरणों की आपूर्ति एक ही स्थानीय संस्था से कराई गई। उपकरण आपूर्ति के लिए स्थानीय साप्ताहिक समाचार पत्र में निविदा प्रकाशित कराया गया था। इस निविदा का प्रकाशन राष्ट्रीय या प्रांतीय समाचार पत्र में नहीं हुआ।
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कराए गए काम का भुगतान किया गया मगर दरों का सत्यापन तकनीकी विभाग से न कराते हुए पलिका को आर्थिक क्षति पहुुंचाया गई है। इसी तरह अन्य 14 मामलों में डीएम ने लगे आरोपों को साबित किया था। बताया गया कि प्रकरण की गंभीरता व वित्तीय अनियमितता को देखते हुए लोकायुक्त ने रिपोर्ट शासन को भेज दी। भेजे गए रिपोर्ट को शासन ने गंभीरता से लिया और नगर पालिका अध्यक्ष हरिप्रताप सिंह के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार को छीनते हुए प्रकरण में पंद्रह दिन के भीतर जवाब मांगा है। निर्धारित समय के भीतर जवाब न देने पर उन्हें पद से बर्खास्त करने की चेतावनी भी दी है। इस मामले को लेकर नगर पालिका में देर रात तक हड़कंप रहा।
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