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मतदाता सूची से नाम गायब होने पर एसडीएम को घेरा
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Mon, 17 Aug 2015 11:33 PM IST
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गांवों में मतदाता सूची का पुनरीक्षण हो चुका है। प्रकाशन के बाद से गांव के प्रधानों के साथ ही भावी प्रत्याशियों के भी होश उड़ गए हैं। इस मामले को लेकर सोमवार की शाम शहाबपुर गांव के लोगों ने एसडीएम का घेराव किया।
बीएलओ के खेल से गांव में हड़कंप मच गया है। गांव में तमाम लोग नाम गायब होने से परेशान हो गए हैं। कुंडा विकास खंड के शहाबपुर गांव में 805 लोगों के नाम काट दिए गए हैं। यह गांव के कुल वोटरों का 40 प्रतिशत है। 2010 में इस गांव में 1715 लोगों के नाम दर्ज हैं। 2010 में सूची पुनरीक्षण के दौरान फिर से 386 लोगों के नाम बढ़े और 84 के नाम विलोपित हुए। 2015 में पुनरीक्षण के दौरान 16 अगस्त को आने वाली सूची देख गांव के लोग परेशानी में पड़ गए। गांव की सूची से 805 लोगों के नाम कट गए हैं।
पूरे के पूरे वार्ड को ही सूची से हटा दिया गया है। बीएलओ के पास पर्याप्त फार्म नहीं हैं और सीमित दिनों में दावे भी नहीं किए जा सकते। इसके चलते गांव के लोग भारी संख्या में एसडीएम के आवास पहुंचे और उनका घेराव किया। एसडीएम ने भी इस कार्य से अपना पल्ला झाड़ते हुए बीडीओ के पास भेज दिया। यही हाल कुंडा विकास खंड के मऊदारा गांव का है। गांव के लोग सूची देखते ही परेशानी में पड़ गए हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि दो दिन में वह इतने दावे कैसे पेश कर दें। उधर सुजौली गांव के वर्तमान प्रधान स्वालिया बीबी पत्नी मोहर्रम अली का भी नाम गायब है। उनकी तीन बहुओं का भी नाम नहीं है। बाबागंज विकास खंड के अर्जुन अतेरू गांव में पुरानी सूची का प्रकाशन कर दिया गया। न तो कोई बढ़ा है और न ही कोई मरा है। ग्रामसभा किशुनी में 33 मतदाताओं का नाम कटा है। यह सब अपने घरों पर रह रहे हैं। सरायछत्ता में 62 नाम सूची में फर्जी तरीके से जोड़ दिया गया है। उन्हें मकान नंबर के साथ ही स्थायी पता भी दिया गया है, लेकिन मौके पर उनके घर गायब हैं।
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बीएलओ के खेल से गांव में हड़कंप मच गया है। गांव में तमाम लोग नाम गायब होने से परेशान हो गए हैं। कुंडा विकास खंड के शहाबपुर गांव में 805 लोगों के नाम काट दिए गए हैं। यह गांव के कुल वोटरों का 40 प्रतिशत है। 2010 में इस गांव में 1715 लोगों के नाम दर्ज हैं। 2010 में सूची पुनरीक्षण के दौरान फिर से 386 लोगों के नाम बढ़े और 84 के नाम विलोपित हुए। 2015 में पुनरीक्षण के दौरान 16 अगस्त को आने वाली सूची देख गांव के लोग परेशानी में पड़ गए। गांव की सूची से 805 लोगों के नाम कट गए हैं।
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पूरे के पूरे वार्ड को ही सूची से हटा दिया गया है। बीएलओ के पास पर्याप्त फार्म नहीं हैं और सीमित दिनों में दावे भी नहीं किए जा सकते। इसके चलते गांव के लोग भारी संख्या में एसडीएम के आवास पहुंचे और उनका घेराव किया। एसडीएम ने भी इस कार्य से अपना पल्ला झाड़ते हुए बीडीओ के पास भेज दिया। यही हाल कुंडा विकास खंड के मऊदारा गांव का है। गांव के लोग सूची देखते ही परेशानी में पड़ गए हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि दो दिन में वह इतने दावे कैसे पेश कर दें। उधर सुजौली गांव के वर्तमान प्रधान स्वालिया बीबी पत्नी मोहर्रम अली का भी नाम गायब है। उनकी तीन बहुओं का भी नाम नहीं है। बाबागंज विकास खंड के अर्जुन अतेरू गांव में पुरानी सूची का प्रकाशन कर दिया गया। न तो कोई बढ़ा है और न ही कोई मरा है। ग्रामसभा किशुनी में 33 मतदाताओं का नाम कटा है। यह सब अपने घरों पर रह रहे हैं। सरायछत्ता में 62 नाम सूची में फर्जी तरीके से जोड़ दिया गया है। उन्हें मकान नंबर के साथ ही स्थायी पता भी दिया गया है, लेकिन मौके पर उनके घर गायब हैं।
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