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कमीशनबाजी की भेंट चढ़ा कृषि यंत्रों में अनुदान
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Wed, 29 Jul 2015 11:35 PM IST
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कृषि यंत्रों की खरीद पर किसानों से कमीशन एडवांस वसूला जाता है। जो किसान कमीशन की रकम देने में आनाकानी करता है उसे योजना के लाभ से हाथ धोना पड़ता है, जबकि विभागीय लोगों की जेब गर्म करने वालों को आरटीजीएस के माध्यम से अनुदान का लाभ दिया जा रहा है। विभाग की इस कमीशनबाजी को लेकर कई बार किसानों ने आवाज उठाई, मगर अभी तक इस पर विराम नहीं लग पाया है। किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद के लिए प्रोत्साहित करने को शासन की ओर से भारी अनुदान दिया जाता है। लेजर लैंड लेबलर, रोटावेटर, पंपसेट, सीडड्रिल, रिजफेरो प्लांटर, फूड स्पेयर आदि कृषि यंत्रों की खरीद पर 35 से 60 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जाता है। किसानों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुके रोटावेटर की खरीद पर 35 हजार रुपये अनुदान मिलता है। विभागीय लोगों ने अपने का पाक-साफ बताने के लिए अनुदान की रकम चयनित किसानों के खाते में आनलाइन भेजने का सिलसिला प्रारंभ किया है।
विभागीय लोगों की मानें तो आनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने वाले किसानों को ही अनुदान का लाभ दिया जाता है। मगर विभाग में लंबे पैमाने पर होने वाले खेल में अनुदान के लिए आवेदन करने वाले लोगों से सत्यापन के नाम पर एडवांस में अनुदान की आधी रकम कमीशन के रूप में वसूल ली जाती है। जो किसान देने में आनाकानी करते हैं उनके सत्यापन के दौरान कमी दिखाकर उनका आवेदन या तो निरस्त कर दिया जाता है या प्रतीक्षा सूची में डाल दिया जाता है। फिर क्या वित्तीय वर्ष के अंत में लक्ष्य की कमी दिखाकर किसानों को ठेंगा दिखा दिया जाता है। कृषि विभाग में यह खेल कई वर्षों से चल रहा है। मगर कोई भी अधिकारी इसे रोकने की पहल नहीं करता है।
जिला कृषि अधिकारी डीपी सिंह ने बताया कि अनुदान में खेल करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पहले आओ, पहले पाओ की तर्ज पर किसानों को अनुदान का लाभ दिया जाएगा। इसके लिए अलग रजिस्टर बनाया गया है।
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विभागीय लोगों की मानें तो आनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने वाले किसानों को ही अनुदान का लाभ दिया जाता है। मगर विभाग में लंबे पैमाने पर होने वाले खेल में अनुदान के लिए आवेदन करने वाले लोगों से सत्यापन के नाम पर एडवांस में अनुदान की आधी रकम कमीशन के रूप में वसूल ली जाती है। जो किसान देने में आनाकानी करते हैं उनके सत्यापन के दौरान कमी दिखाकर उनका आवेदन या तो निरस्त कर दिया जाता है या प्रतीक्षा सूची में डाल दिया जाता है। फिर क्या वित्तीय वर्ष के अंत में लक्ष्य की कमी दिखाकर किसानों को ठेंगा दिखा दिया जाता है। कृषि विभाग में यह खेल कई वर्षों से चल रहा है। मगर कोई भी अधिकारी इसे रोकने की पहल नहीं करता है।
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जिला कृषि अधिकारी डीपी सिंह ने बताया कि अनुदान में खेल करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पहले आओ, पहले पाओ की तर्ज पर किसानों को अनुदान का लाभ दिया जाएगा। इसके लिए अलग रजिस्टर बनाया गया है।
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