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दूसरे घोटाले की तैयारी में मनरेगा के घपलेबाज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Wed, 22 Jul 2015 11:53 PM IST
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केन्द्र सरकार की रोजगारपरक योजना मनरेगा में घपला करने वालों का चेहरा बेनकाब होने के बाद भी उन पर कार्रवाई नहीं हो सकी। वे आराम से नौकरी कर रहे हैं। आशंका तो इस बात की भी है कि वे आगे भी गोलमाल में लगे हैं। पूर्व सीडीओ मनीष कुमार वर्मा के जरिए दिया गया कार्रवाई का निर्देश और प्रकरण से जुड़े दस्तावेज को अफसर दबाकर बैठे हैं।
बेलखरनाथधाम विकास खंड के मरुआन में मनरेगा से अपात्रों की जमीन में बंधा बना दिया गया। अरविंद यादव की शिकायत पर 30 जनवरी 2015 को सोशल आडीटर ने जांच कर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट अफसरों को दी। रिपोर्ट में बताया गया कि जिनकी जमीन में बंधा बनाया गया वह लाखों रुपये के मालिक और संपन्न व्यक्ति हैं। इस जांच में उन्होंने सात लाख चार हजार 412 रुपये का घोटाला साबित किया। मंगरौरा ब्लाक के चंदौका ग्राम पंचायत में रामकिशोर की शिकायत पर हुई जांच में पाया गया कि जिस व्यक्ति के कुएं का जीर्णोद्धार हुआ उसके पास कुआं है ही नहीं। इस मामले में आडीटर ने 33 हजार 675 रुपये के घपले की रिपोर्ट सात फरवरी 2015 को सौंपी। सदर विकास खंड के महुआर ग्राम पंचायत में मो. गुलशाम आदि की शिकायत पर भी सोशल आडीटर ने जांच की। इस पड़ताल में पाया कि कब्रिस्तान से मुस्लिम बस्ती तक संपर्क मार्ग का काम मशीन से हुआ।
फंसने के भय से कराए गए कार्य का दस्तावेज टीम को नहीं दिया गया। इस काम में करीब एक लाख रुपये के घपले की आशंका जताई गई। विकास खंड मानधाता के मझिगवां में अर्जुन यादव की शिकायत पर जांच हुई तो मिला कि लखपतियों की जमीन में समतलीकरण का काम कराया गया। राकेश के घर से बहरिया नाले की सफाई व खुदाई कार्य हुआ ही नहीं और पैसा निकाल लिया गया। छह मई 2015 को आडिट टीम ने एक लाख 52 हजार 365 रुपये के घपले की रिपोर्ट कार्रवाई के लिए अफसरों को सौंपी। पट्टी के धनसार ग्राम पंचायत में तकरीबन 23 हजार रुपये की रायल्टी धनराशि निकाल ली गई।
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बाबागंज के विधासिन गांव में 25 हजार 750 रुपये का अनाधिकृत रूप से भुगतान का मामला भी पकड़ा गया। बाबागंज ब्लाक के सरायखानदेव ग्राम पंचायत में मनरेगा से तालाब खुलाई में एक लाख 17 हजार 403 रुपये का घोटाला सामने आया। सोशल आडिटर ने उजागर हुए इन घपलों के आरोपियों पर कार्रवाई के लिए फाइल अफसरों को भेज दी। तत्कालीन सीडीओ ने कार्रवाई के लिए विभागों को निर्देश दिए। उनका स्थानांतरण होने के बाद अधिकारियों ने मनरेगा में हुए इन घपलों की फाइलें दबा दीं।
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बेलखरनाथधाम विकास खंड के मरुआन में मनरेगा से अपात्रों की जमीन में बंधा बना दिया गया। अरविंद यादव की शिकायत पर 30 जनवरी 2015 को सोशल आडीटर ने जांच कर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट अफसरों को दी। रिपोर्ट में बताया गया कि जिनकी जमीन में बंधा बनाया गया वह लाखों रुपये के मालिक और संपन्न व्यक्ति हैं। इस जांच में उन्होंने सात लाख चार हजार 412 रुपये का घोटाला साबित किया। मंगरौरा ब्लाक के चंदौका ग्राम पंचायत में रामकिशोर की शिकायत पर हुई जांच में पाया गया कि जिस व्यक्ति के कुएं का जीर्णोद्धार हुआ उसके पास कुआं है ही नहीं। इस मामले में आडीटर ने 33 हजार 675 रुपये के घपले की रिपोर्ट सात फरवरी 2015 को सौंपी। सदर विकास खंड के महुआर ग्राम पंचायत में मो. गुलशाम आदि की शिकायत पर भी सोशल आडीटर ने जांच की। इस पड़ताल में पाया कि कब्रिस्तान से मुस्लिम बस्ती तक संपर्क मार्ग का काम मशीन से हुआ।
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फंसने के भय से कराए गए कार्य का दस्तावेज टीम को नहीं दिया गया। इस काम में करीब एक लाख रुपये के घपले की आशंका जताई गई। विकास खंड मानधाता के मझिगवां में अर्जुन यादव की शिकायत पर जांच हुई तो मिला कि लखपतियों की जमीन में समतलीकरण का काम कराया गया। राकेश के घर से बहरिया नाले की सफाई व खुदाई कार्य हुआ ही नहीं और पैसा निकाल लिया गया। छह मई 2015 को आडिट टीम ने एक लाख 52 हजार 365 रुपये के घपले की रिपोर्ट कार्रवाई के लिए अफसरों को सौंपी। पट्टी के धनसार ग्राम पंचायत में तकरीबन 23 हजार रुपये की रायल्टी धनराशि निकाल ली गई।
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बाबागंज के विधासिन गांव में 25 हजार 750 रुपये का अनाधिकृत रूप से भुगतान का मामला भी पकड़ा गया। बाबागंज ब्लाक के सरायखानदेव ग्राम पंचायत में मनरेगा से तालाब खुलाई में एक लाख 17 हजार 403 रुपये का घोटाला सामने आया। सोशल आडिटर ने उजागर हुए इन घपलों के आरोपियों पर कार्रवाई के लिए फाइल अफसरों को भेज दी। तत्कालीन सीडीओ ने कार्रवाई के लिए विभागों को निर्देश दिए। उनका स्थानांतरण होने के बाद अधिकारियों ने मनरेगा में हुए इन घपलों की फाइलें दबा दीं।