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पायका के तहत बने खेल मैदानों के उपकरण गायब
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Tue, 21 Jul 2015 11:14 PM IST
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जिले की हर तीसरी योजना से घपले की दुर्गंध उठ रही है। यदि सच्चाई खंगाली जाए तो मध्य प्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) जैसी स्थिति प्रकाश में आ सकती है। कुछ साल पहले जिले में युवा कल्याण विभाग से संचालित पायका योजना को ही ले लें। इसके तहत ग्राम पंचायतों में बने अधिकांश खेल मैदानों के उपकरण गायब हो गए हैं। उपकरण कहां गए, यह बताने वाला कोई नहीं है। ब्लाक स्तरीय खेल मैदान राजनीतिज्ञों के स्कूलों में बना दिए गए।
गंवई खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने ग्राम पंचायत व ब्लाक स्तर पर खेल मैदान के निर्माण का मसौदा तैयार किया था। इसके तहत जिले में ग्राम पंचायत स्तर पर 220 खेल के मैदान बनाए गए। जमीन समतलीकरण से लेकर खेल उपकरणों को भी लगाया गया। विभागीय सूत्र बताते हैं कि ज्यादातर खेल मैदान के उपकरण कागज पर ही दिख रहे हैं। मैदानों में उपकरण नजर नहीं आते। प्रति खेल मैदान पर एक लाख रुपये सरकार ने खर्च किए थे। इतना पैसा खर्च होने के बाद भी गांव की खेल प्रतिभाओं को इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा।
बताया तो यहां तक जाता है ब्लाक स्तरीय तीन खेल मैदान कुंडा, बिहार व मानधाता में बनाए गए। कुंडा व मानधाता में इसे बनाने के लिए जिन विद्यालयों का चयन किया गया, उनमें जिले के कुछ राजनीतिज्ञों की अच्छी दखल है। चूंकि राजनीतिज्ञों के दखल वाले कॉलेजों में सरकारी योजना से खेल मैदान बने, इसलिए बाहरी गांवों की प्रतिभाएं यहां आने से कतराने लगीं। यदि इस योजना से बने खेल मैदानों की निष्पक्षता से जांच कराई जाए तो जिले में ‘व्यापमं’ जैसे घोटाले उजागर हो सकते हैं। यहां ये बताना जरूरी है कि अब यह योजना बंद कर दी गई है। इसकी जगह राजीव गांधी ब्लाक स्तरीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स संचालित की गई है। जिस पर एक करोड़ से भी अधिक धन खर्च किया जाना है।
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गंवई खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने ग्राम पंचायत व ब्लाक स्तर पर खेल मैदान के निर्माण का मसौदा तैयार किया था। इसके तहत जिले में ग्राम पंचायत स्तर पर 220 खेल के मैदान बनाए गए। जमीन समतलीकरण से लेकर खेल उपकरणों को भी लगाया गया। विभागीय सूत्र बताते हैं कि ज्यादातर खेल मैदान के उपकरण कागज पर ही दिख रहे हैं। मैदानों में उपकरण नजर नहीं आते। प्रति खेल मैदान पर एक लाख रुपये सरकार ने खर्च किए थे। इतना पैसा खर्च होने के बाद भी गांव की खेल प्रतिभाओं को इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा।
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बताया तो यहां तक जाता है ब्लाक स्तरीय तीन खेल मैदान कुंडा, बिहार व मानधाता में बनाए गए। कुंडा व मानधाता में इसे बनाने के लिए जिन विद्यालयों का चयन किया गया, उनमें जिले के कुछ राजनीतिज्ञों की अच्छी दखल है। चूंकि राजनीतिज्ञों के दखल वाले कॉलेजों में सरकारी योजना से खेल मैदान बने, इसलिए बाहरी गांवों की प्रतिभाएं यहां आने से कतराने लगीं। यदि इस योजना से बने खेल मैदानों की निष्पक्षता से जांच कराई जाए तो जिले में ‘व्यापमं’ जैसे घोटाले उजागर हो सकते हैं। यहां ये बताना जरूरी है कि अब यह योजना बंद कर दी गई है। इसकी जगह राजीव गांधी ब्लाक स्तरीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स संचालित की गई है। जिस पर एक करोड़ से भी अधिक धन खर्च किया जाना है।
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