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मेडिकल कालेज निर्माण में अड़चन डालने वाले कर्मचारियों पर तबादले की तलवार

Tue, 31 Dec 2019 12:30 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 31 Dec 2019 12:30 AM IST
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Pratapgarh medical college construction
शासन ने मांगी कर्मचारियों की सूची, लंबे समय से जमे हैं एक ही स्थान पर, सीएमएस ने जानकारी से किया इनकार
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प्रतापगढ़। मेडिकल कॉलेज निर्माण में अड़चन डालने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों पर तबादले की तलवार लटक रही है। शासन इनका गैर जनपद तबादला कर सकता है। यह कर्मचारी लंबे समय से प्रतापगढ़ में ही जमे हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि शासन से कर्मचारियों की सूची मांगी गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिले को मेडिकल कालेज का तोहफा दिया था। निर्माण की जिम्मेदारी राजकीय निर्माण निगम रायबरेली को दी गई थी। 2020 तक भवन तैयार कर विभाग को हैंडओवर करना था। सीएम के भूमि पूजन के बाद पूरे केशवराय में मेडिकल कॉलेज का निर्माण शुरू हो गया। तेज गति से काम चल रहा है। जिला और महिला अस्पताल के जर्जर भवन को तोड़कर दोनों अस्पताल को संयुक्त करने के साथ सात-सात मंजीला दो भवन बनाए जाने थे। एक भवन मेडिकल कॉलेज के लिए तो दूसरा जिला अस्पताल के स्टाफ नर्स और फार्मासिस्ट के आवास के लिए बनना था। शासन के आदेश पर जर्जर भवन को जेई ने चिंह्नित कर लिया। सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों को आवास को खाली करने का आदेश भी दे दिया गया, मगर अभी तक कर्मचारी तो दूर सीएमएस तक ने सरकारी आवास को खाली नहीं किया।
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कुछ कर्मचारी पुराने भवन को तोड़ने के पहले नए भवन का निर्माण कराकर देने की मांग करते हुए कोर्ट चले गए। जिस पर पुराने भवन तोड़ने पर न्यायालय ने रोक लगा दी। स्वास्थ्य विभाग के एक जिम्मेदार कर्मचारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि शासन से कोर्ट जाने वाले कर्मचारियों की सूची मांगी गई है। उनका तबादला गैरजनपद किया जा सकता है। यह कर्मचारी लंबे समय से प्रतापगढ़ में ही जमे हैं। हालांकि इस मामले में जिला अस्पताल के सीएमएस ने जानकारी से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि शासन क्या करने जा रहा है, इसके बारे में हमे जानकारी नहीं है। सीएमओ से बात करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नेटवर्क क्षेत्र से बाहर बता रहा था। डिप्टी सीएमओ सीपी शर्मा ने बताया कि सीएमओ मीटिंग में लखनऊ गए हैं।
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कर्मचारियों की बढ़ी धड़कन
मेडिकल निर्माण में रोड़ा बन रहे स्वास्थ्य कर्मचारियों की धड़कन बढ़ गई है। सबसे ज्यादा दिक्कत उन कर्मचारियों और डॉक्टरों को हैं जो वर्षों से जिला अस्पताल में जमे हैं।
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