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प्रतापगढ़ : बायोमेडिकल वेस्ट हटाने के नाम पर दस लाख का खेल
Tue, 19 Feb 2019 12:24 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 19 Feb 2019 12:24 AM IST
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बायोमेडिकल वेस्ट
- फोटो : प्रतापगढ़
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जिला अस्पताल में बायोमेडिकल वेस्ट हटाने के नाम पर लाखों रुपये का खेल हो रहा है। अधिकृत कार्यदायी संस्था कभी कचरा उठाने के लिए नहीं आती है इसके बावजूद प्रतिवर्ष 5.76 लाख रुपये का खर्च कागजों में दिखाकर खेल कर दिया जाता है। इस खेल में स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी शामिल है। जबकि अस्पताल का कचरा नगर पालिका कर्मी उठा रहे हैं।
190 बेड वाले जिला अस्पताल में प्रति दिन निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट को हर दिन हटाने के लिए प्रयागराज की कार्यदायी संस्था संगम मेडीसर प्राइवेट लिमिटेड (बायोवेेस्ट) को शासन ने जिम्मेदारी दी है। नियमानुसार प्रति बेड प्रतिदिन 16 रुपये की दर से कचरा उठाने के नाम पर संस्था को भुगतान किया जाता है।
190 बेड वाले इस अस्पताल में प्रतिदिन तीन हजार 40 रुपये की दर से कार्यदायी संस्था को भुगतान होता है। अगर एक माह का आंकड़ा लिया जाए तो 51 हजार और एक साल का लेखाजोखा रखा जाए तो 10.94 लाख रुपये होते हैं। कार्यदायी संस्था का आलम यह है कि वह कभी बायोमेडिकल वेस्ट उठाते हुए जिला अस्पताल में दिखाई तक नहीं पड़ती।
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अगर नगर पालिका के कर्मचारी अस्पताल के कचरे को न उठाए तो मरीजों के साथ तीमारदार और आसपास के लोगों का जीना हराम हो जाए। मगर जिला अस्पताल के सीएमएस कभी इस ओर ध्यान नहीं देते। मर्चरी के बगल बना कूड़ा डंपिंग जोन में बायोमेडिकल वेस्ट को फेंकवा दिया जाता है। अस्पताल के अन्य कचरों के साथ वेस्ट भी डंपिंग जोन में पड़ा रहता है।
बरसात के दिनों में बायोमेडिकल वेस्ट सड़ता है तो दुर्गंध से लोगों का सांस लेना दूभर हो जाता है। डंपिंग जोन में नाम मात्र का दरवाजा लगा हुआ है। वह दिन और रात खुला रहता है। इसके चलते जानवर पहुंच जाते हैं। बायोमेडिकल वेस्ट खाने से मवेशी भी बीमार पड़ने लगते हैं।
इंफेक्शन होने का बना रहता है खतरा
मरीजों को यूज करने के बाद निडिल को बायोमेडिकल वेस्ट की तरह कूड़ा डंपिंग जोन में फेंक दिया जाता है। सिरिंज और निडिल जानवरों के पैर के नीचे पड़ते हैं। सफाई कर्मचारियों को इंफेक्शन होने का खतरा बना रहता है।
चोरी छिपाने के लिए कूड़ा डंपिंग जोन में फेंका जाता है प्लास्टर
जिला अस्पताल के ज्यादातर हड्डी के चिकित्सक सरकारी कम और प्राइवेट प्लास्टर का प्रयोग ज्यादा करते हैं। किसी का हाथ और पैर टूट जाता है तो उससे मोटी रकम वसूला करते हैं। प्राइवेट में प्लास्टर बांधते हैं। बायोमेडिकल बेस्ट में प्लास्टर न जाए इसलिए प्लास्टर को काटने के बाद उसे चोरी से कूड़ा डंपिंग जोन में भेजवा देते हैं। डंपिंग जोन में वह सड़ता रहता है।
जिला अस्पताल से बायोमेडिकल वेस्ट को नहीं उठाया जा रहा है तो गलत है। इसकी जांच कराई जाएगी। अस्पताल का कचरा उठाने वाली संस्था का भुगतान रोक दिया जाएगा।
एके श्रीवास्तव, सीएमओ।
जिला महिला अस्पताल और जिला अस्पताल में हमारी एक गाड़ी जाती है। जो बायोमेडिकल वेस्ट को उठाकर हंडिया स्थित प्लांट में लेकर आती है। यहां बायोमेडिकल वेस्ट को नष्ट किया जाता है। जिला अस्पताल में बायोमेडिकल बेस्ट प्वाइंट के न होने के कारण हो सकता है कि कचरा न उठा हो। दो दिनों के अंदर डंपिंग जोन से बायोमेडिकल वेस्ट को उठवा दिया जाएगा।
अखंड प्रताप सिंह, संगम बायोमेडिकल वेस्ट प्रयागराज।
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190 बेड वाले जिला अस्पताल में प्रति दिन निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट को हर दिन हटाने के लिए प्रयागराज की कार्यदायी संस्था संगम मेडीसर प्राइवेट लिमिटेड (बायोवेेस्ट) को शासन ने जिम्मेदारी दी है। नियमानुसार प्रति बेड प्रतिदिन 16 रुपये की दर से कचरा उठाने के नाम पर संस्था को भुगतान किया जाता है।
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190 बेड वाले इस अस्पताल में प्रतिदिन तीन हजार 40 रुपये की दर से कार्यदायी संस्था को भुगतान होता है। अगर एक माह का आंकड़ा लिया जाए तो 51 हजार और एक साल का लेखाजोखा रखा जाए तो 10.94 लाख रुपये होते हैं। कार्यदायी संस्था का आलम यह है कि वह कभी बायोमेडिकल वेस्ट उठाते हुए जिला अस्पताल में दिखाई तक नहीं पड़ती।
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अगर नगर पालिका के कर्मचारी अस्पताल के कचरे को न उठाए तो मरीजों के साथ तीमारदार और आसपास के लोगों का जीना हराम हो जाए। मगर जिला अस्पताल के सीएमएस कभी इस ओर ध्यान नहीं देते। मर्चरी के बगल बना कूड़ा डंपिंग जोन में बायोमेडिकल वेस्ट को फेंकवा दिया जाता है। अस्पताल के अन्य कचरों के साथ वेस्ट भी डंपिंग जोन में पड़ा रहता है।
बरसात के दिनों में बायोमेडिकल वेस्ट सड़ता है तो दुर्गंध से लोगों का सांस लेना दूभर हो जाता है। डंपिंग जोन में नाम मात्र का दरवाजा लगा हुआ है। वह दिन और रात खुला रहता है। इसके चलते जानवर पहुंच जाते हैं। बायोमेडिकल वेस्ट खाने से मवेशी भी बीमार पड़ने लगते हैं।
इंफेक्शन होने का बना रहता है खतरा
मरीजों को यूज करने के बाद निडिल को बायोमेडिकल वेस्ट की तरह कूड़ा डंपिंग जोन में फेंक दिया जाता है। सिरिंज और निडिल जानवरों के पैर के नीचे पड़ते हैं। सफाई कर्मचारियों को इंफेक्शन होने का खतरा बना रहता है।
चोरी छिपाने के लिए कूड़ा डंपिंग जोन में फेंका जाता है प्लास्टर
जिला अस्पताल के ज्यादातर हड्डी के चिकित्सक सरकारी कम और प्राइवेट प्लास्टर का प्रयोग ज्यादा करते हैं। किसी का हाथ और पैर टूट जाता है तो उससे मोटी रकम वसूला करते हैं। प्राइवेट में प्लास्टर बांधते हैं। बायोमेडिकल बेस्ट में प्लास्टर न जाए इसलिए प्लास्टर को काटने के बाद उसे चोरी से कूड़ा डंपिंग जोन में भेजवा देते हैं। डंपिंग जोन में वह सड़ता रहता है।
जिला अस्पताल से बायोमेडिकल वेस्ट को नहीं उठाया जा रहा है तो गलत है। इसकी जांच कराई जाएगी। अस्पताल का कचरा उठाने वाली संस्था का भुगतान रोक दिया जाएगा।
एके श्रीवास्तव, सीएमओ।
जिला महिला अस्पताल और जिला अस्पताल में हमारी एक गाड़ी जाती है। जो बायोमेडिकल वेस्ट को उठाकर हंडिया स्थित प्लांट में लेकर आती है। यहां बायोमेडिकल वेस्ट को नष्ट किया जाता है। जिला अस्पताल में बायोमेडिकल बेस्ट प्वाइंट के न होने के कारण हो सकता है कि कचरा न उठा हो। दो दिनों के अंदर डंपिंग जोन से बायोमेडिकल वेस्ट को उठवा दिया जाएगा।
अखंड प्रताप सिंह, संगम बायोमेडिकल वेस्ट प्रयागराज।