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Pratapgarh: इमरजेंसी सेवा छोड़ जिला व महिला अस्पताल बंद
Wed, 13 May 2020 12:07 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 13 May 2020 12:07 AM IST
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जिला अस्पताल के सामने प्रशासन द्वारा बंद कराया गया अल्ट्रासाउंड सेंटर।
- फोटो : pratapgarh
दो संक्रमित मरीजों के मिलने के बाद जिला व महिला अस्पताल की इमरजेंसी सेवा छोड़ सभी सेवाएं बंद करा दी गईं। महिला अस्पताल में भर्ती होने से पहले गर्भवती महिला की जांच करने वाले अल्ट्रासाउंड केंद्र को भी प्रशासन ने बंद करा दिया। यही से महिला के संक्रमित होने की आशंका जताई जा रही है। जिला अस्पताल में भर्ती संक्रमित मरीज अहमदाबाद में ही संक्रमित हुआ था। खबर लिखे जाने तक मरीजों का उपचार करने वाले चिकित्सकों समेत स्वास्थ्य कर्मचारियों को को होम क्वारंटाइन कराने की तैयारी चल रही थी।
नगर कोतवाली के राजगढ़ की रहने वाली गर्भवती महिला 30 अप्रैल को महिला अस्पताल में उपचार कराने आई थी। चूंकि महिला अस्पताल की एक आया उसकी परिचित थी। प्रसव में समय होने के कारण उसे दवा व अल्ट्रासाउंड जांच के लिए बोलकर घर भेज दिया गया। सात मई को उसने जिला अस्पताल के करीब उदय अल्ट्रासाउंड केंद्र पर जांच कराई। रिपोर्ट लेकर वह नौ मई को फिर महिला अस्पताल पहुंची।
चूंकि उसका पहला बच्चा आपरेशन से पैदा हुआ था। इसलिए दूसरा बच्चा भी आपरेशन से ही होने की संभावना थी। इसलिए महिला अस्पताल की डाक्टर व स्वास्थ्यकर्मियों ने उसे वार्ड में भर्ती कर लिया। बाद में कोरोना की जांच के लिए सैंपल लेकर उसे घर भेज दिया गया था। सोमवार को उसकी जांच रिपोर्ट पाजीटिव आने के बाद हड़कंप मच गया।
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रातभर गर्भवती महिला के संपर्क में आने वालों के बारे में जानकारी जुटाई गई। पता चला कि उदय अल्ट्रासाउंड पर ही उसने जांच कराई। हो सकता है जांच के दौरान ही वह संक्रमित हो गई हो। उसका पति भी दो साल से घर पर ही रहता था। पीड़िता भी काफी दिनों से कहीं नही गई थी। ऐसे में प्रशासनिक अमले ने पुलिस की मौजूदगी में उदय अल्ट्रासाउंड केंद्र को बंद कराते हुए संचालक व जांच करने वाले चिकित्सक को होम क्वारंटाइन पर भेज दिया।
दूसरी ओर जेठवारा के डेरवा सबलगढ़ का रहने वाला व्यक्ति बाएं पैर के कूल्हे का उपचार कराने के लिए अहमदाबाद गया था। लॉकडाउन के चलते वह एंबुलेंस से घर के लिए निकला, लेकिन रास्ते में उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। सात मई को इमरजेंसी में डाक्टर अनुज चौरसिया ने उसकी हालत गंभीर देख मेडिकल वार्ड में भर्ती कर लिया।
बाद में डाक्टर मनोज खत्री भी उसे वार्ड में देखते रहे। उसके साथ वार्ड में कुल 6 मरीज रखे गए थे। आठ मई को उसका सैंपल जांच के लिए भेजा गया। वार्ड में देखभाल के लिए उसकी पत्नी, बेटी और नातिन भी रहती थी। स्टाफ नर्स उसे इंजेक्शन दे रही थी। रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।
प्रशासन ने उसका यात्रा इतिहास खंगालने के बाद एंबुलेंस चालक की जांच कराने की सूचना अहमदाबाद भेजी। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि चूंकि जिला व महिला अस्पताल हॉटस्पाट में शामिल है। ऐसे में इमरजेंसी केस को छोड़ सभी सेवाएं बंद करा दी गई हैं। जिन डाक्टर व स्वास्थ्यकर्मियों ने संक्रमित मरीजों को उपचार किया है, उन लोगों की सूची तैयार की जा रही है। ताकि उन लोगों की भी जांच कराने के साथ ही उन्हें होम क्वारंटीन कराया जा सके।
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नगर कोतवाली के राजगढ़ की रहने वाली गर्भवती महिला 30 अप्रैल को महिला अस्पताल में उपचार कराने आई थी। चूंकि महिला अस्पताल की एक आया उसकी परिचित थी। प्रसव में समय होने के कारण उसे दवा व अल्ट्रासाउंड जांच के लिए बोलकर घर भेज दिया गया। सात मई को उसने जिला अस्पताल के करीब उदय अल्ट्रासाउंड केंद्र पर जांच कराई। रिपोर्ट लेकर वह नौ मई को फिर महिला अस्पताल पहुंची।
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चूंकि उसका पहला बच्चा आपरेशन से पैदा हुआ था। इसलिए दूसरा बच्चा भी आपरेशन से ही होने की संभावना थी। इसलिए महिला अस्पताल की डाक्टर व स्वास्थ्यकर्मियों ने उसे वार्ड में भर्ती कर लिया। बाद में कोरोना की जांच के लिए सैंपल लेकर उसे घर भेज दिया गया था। सोमवार को उसकी जांच रिपोर्ट पाजीटिव आने के बाद हड़कंप मच गया।
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रातभर गर्भवती महिला के संपर्क में आने वालों के बारे में जानकारी जुटाई गई। पता चला कि उदय अल्ट्रासाउंड पर ही उसने जांच कराई। हो सकता है जांच के दौरान ही वह संक्रमित हो गई हो। उसका पति भी दो साल से घर पर ही रहता था। पीड़िता भी काफी दिनों से कहीं नही गई थी। ऐसे में प्रशासनिक अमले ने पुलिस की मौजूदगी में उदय अल्ट्रासाउंड केंद्र को बंद कराते हुए संचालक व जांच करने वाले चिकित्सक को होम क्वारंटाइन पर भेज दिया।
दूसरी ओर जेठवारा के डेरवा सबलगढ़ का रहने वाला व्यक्ति बाएं पैर के कूल्हे का उपचार कराने के लिए अहमदाबाद गया था। लॉकडाउन के चलते वह एंबुलेंस से घर के लिए निकला, लेकिन रास्ते में उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। सात मई को इमरजेंसी में डाक्टर अनुज चौरसिया ने उसकी हालत गंभीर देख मेडिकल वार्ड में भर्ती कर लिया।
बाद में डाक्टर मनोज खत्री भी उसे वार्ड में देखते रहे। उसके साथ वार्ड में कुल 6 मरीज रखे गए थे। आठ मई को उसका सैंपल जांच के लिए भेजा गया। वार्ड में देखभाल के लिए उसकी पत्नी, बेटी और नातिन भी रहती थी। स्टाफ नर्स उसे इंजेक्शन दे रही थी। रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।
प्रशासन ने उसका यात्रा इतिहास खंगालने के बाद एंबुलेंस चालक की जांच कराने की सूचना अहमदाबाद भेजी। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि चूंकि जिला व महिला अस्पताल हॉटस्पाट में शामिल है। ऐसे में इमरजेंसी केस को छोड़ सभी सेवाएं बंद करा दी गई हैं। जिन डाक्टर व स्वास्थ्यकर्मियों ने संक्रमित मरीजों को उपचार किया है, उन लोगों की सूची तैयार की जा रही है। ताकि उन लोगों की भी जांच कराने के साथ ही उन्हें होम क्वारंटीन कराया जा सके।