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आवास आवंटन में हो रहा खेल!
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sat, 23 Jan 2016 12:19 AM IST
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विकास खंड बाबा बेलखरनाथ में इंदिरा आवास आवंटन में बड़े पैमाने पर धांधली व अनियमितता का मामला सामने आया है। एक व्यक्ति के नाम से दो आवास आवंटित करने के मामले में ब्लाक कर्मचारियों की भूमिका सवालों के घेरे में है। यही नहीं अनुसूचित जाति के लिए आवासों की भेजी गई सूची को ही बदल दिया जा रहा है। आश्चर्य की बात है कि ब्लाक मुख्यालयों से जिला मुख्यालय भेजी गई सूची से पात्रों के नाम ही गायब कर दिए गए हैं।
बेलखरनाथ ब्लाक में करीब 148 इंदिरा आवास अनुसूचित जाति के लोगों को मिलने थे। इस संबंध में विभिन्न ग्राम पंचायतों से बीपीएल 2002 की सूची के मुताबिक पात्र लोगों की सूची मांगी गई। ग्राम पंचायतों से सूची ब्लाक कार्यालय में जमा हो गई। आरोप है कि यहीं से सेंटिंग व हेरफेर का सिलसिला शुरू हो गया। ब्लाक मुख्यालय से जिला मुख्यालय गई सूची में जिनका नाम बाबुओं व कर्मचारियों ने तय कर दिया उनका नाम आवास आवंटन की लिस्ट में शामिल हो गया। इसका परिणाम यह हुआ कि जिला मुख्यालय से आई सूची से अधिकांश पात्र लोगों के नाम गायब हो गए। चौंकाने वाली बात यह है कि कई ग्राम पंचायतों में एक भी आवास नहीं दिये गए और कई ग्राम पंचायतों में रेवड़ी की तरह आवास आवंटित कर दिए गए। 20 दिसंबर एवं 28 दिसंबर 2015 को ब्लाक मुख्यालय से जिला मुख्यालय भेजी गई आवासों की सूची एवं 31 दिसंबर को जिला मुख्यालय से वापस आई सूची में भारी फेरबदल किया गया है। तमाम पात्र लोगों के नाम सूची से गायब कर दिए गए हैं। इसमें ब्लाक कर्मचारियों का तर्क है कि आवास उन्हीं लोगों को आवंटित किया गया है जिनका बीपीएल क्रमांक उन्हीं के नाम पर है। जबकि ऐसा नहीं है। हैरत की बात यह भी है कि बगैर किसी जांच व स्थलीय सत्यापन के आवासों का आवंटन किया जा चुका है। मानक व पात्रता को दरकिनार कर दिया गया है। लोगों का कहना है कि सत्यापन हुआ तो तमाम अपात्रों के चयन के खेल का पर्दाफाश हो जाएगा। हाल ही में महोखरी में एक ही व्यक्ति के नाम से दो आवास आवंटित करने का मामला प्रकाश में आया है। कर्मचारी और अधिकारी मामले को दबाने में लगे हैं।
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बेलखरनाथ ब्लाक में करीब 148 इंदिरा आवास अनुसूचित जाति के लोगों को मिलने थे। इस संबंध में विभिन्न ग्राम पंचायतों से बीपीएल 2002 की सूची के मुताबिक पात्र लोगों की सूची मांगी गई। ग्राम पंचायतों से सूची ब्लाक कार्यालय में जमा हो गई। आरोप है कि यहीं से सेंटिंग व हेरफेर का सिलसिला शुरू हो गया। ब्लाक मुख्यालय से जिला मुख्यालय गई सूची में जिनका नाम बाबुओं व कर्मचारियों ने तय कर दिया उनका नाम आवास आवंटन की लिस्ट में शामिल हो गया। इसका परिणाम यह हुआ कि जिला मुख्यालय से आई सूची से अधिकांश पात्र लोगों के नाम गायब हो गए। चौंकाने वाली बात यह है कि कई ग्राम पंचायतों में एक भी आवास नहीं दिये गए और कई ग्राम पंचायतों में रेवड़ी की तरह आवास आवंटित कर दिए गए। 20 दिसंबर एवं 28 दिसंबर 2015 को ब्लाक मुख्यालय से जिला मुख्यालय भेजी गई आवासों की सूची एवं 31 दिसंबर को जिला मुख्यालय से वापस आई सूची में भारी फेरबदल किया गया है। तमाम पात्र लोगों के नाम सूची से गायब कर दिए गए हैं। इसमें ब्लाक कर्मचारियों का तर्क है कि आवास उन्हीं लोगों को आवंटित किया गया है जिनका बीपीएल क्रमांक उन्हीं के नाम पर है। जबकि ऐसा नहीं है। हैरत की बात यह भी है कि बगैर किसी जांच व स्थलीय सत्यापन के आवासों का आवंटन किया जा चुका है। मानक व पात्रता को दरकिनार कर दिया गया है। लोगों का कहना है कि सत्यापन हुआ तो तमाम अपात्रों के चयन के खेल का पर्दाफाश हो जाएगा। हाल ही में महोखरी में एक ही व्यक्ति के नाम से दो आवास आवंटित करने का मामला प्रकाश में आया है। कर्मचारी और अधिकारी मामले को दबाने में लगे हैं।
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