{"_id":"628a7c8aace40202b34d6261","slug":"pratapgarh-court-order-rs-33-45-crore-to-be-paid-in-check-bounce-case","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pratapgarh Court Order : चेक बाउंस मामले में पीड़ित को देने होंगे 33.45 करोड़ रुपये","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pratapgarh Court Order : चेक बाउंस मामले में पीड़ित को देने होंगे 33.45 करोड़ रुपये
Sun, 22 May 2022 11:40 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 22 May 2022 11:40 PM IST
सार
प्रतापगढ़ के कंधई थाना क्षेत्र के रतनमई गांव निवासी लोकपति त्रिपाठी के मुताबिक, उन्होंने मुंबई के अश्विन गिरिराज कुमार अग्रवाल के साथ व्यावसायिक लेन-देन प्रारंभ किया। अश्विन ने लोकपति को पहली बार 30.50 करोड़ और दूसरी बार में 40 लाख का चेक दिया। दोनों चेक बैंक में लगाने के बाद हस्ताक्षर में अंतर होने के कारण बाउंस हो गए।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चेक बाउंस के एक मामले में प्रतापगढ़ की कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मामले में नौ साल बाद स्पेशल जज मोनिका ठाकुर ने सीजेएम कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए आरोपी को 33. 48 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने आरोपी की दलीलों को नहीं माना और पीड़ित को धनराशि का भुगतान करने के लिए कहा है।
विज्ञापन
जिले के कंधई थाना क्षेत्र के रतनमई गांव निवासी लोकपति त्रिपाठी के मुताबिक, उन्होंने मुंबई के अश्विन गिरिराज कुमार अग्रवाल के साथ व्यावसायिक लेन-देन प्रारंभ किया। अश्विन ने लोकपति को पहली बार 30.50 करोड़ और दूसरी बार में 40 लाख का चेक दिया। दोनों चेक बैंक में लगाने के बाद हस्ताक्षर में अंतर होने के कारण बाउंस हो गए।
विज्ञापन
इसकी जानकारी देने के बाद अश्विन ने रुपये देने से हाथ खड़े कर दिए। इस मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद सीजेएम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए अश्विन गिरिराज कुमार अग्रवाल को दोषी पाते हुए 33.45 करोड़ रुपये का भुगतान करने और दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। अश्विन ने एडीजे कोर्ट में अपील दायर की। स्पेशल जज मोनिका ठाकुर ने जुर्माने के साथ ही जेल की सजा को बरकरार रखा है।
विज्ञापन