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डाकघर में बिना पैन वाले सैकड़ों खाते हो जाएंगे सीज
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Mon, 16 Jan 2017 01:23 AM IST
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आपका खाता यदि डाकघर में है और इसमें पैन (परामानेंट एकाउंट नंबर) नहीं लगा है तो समझो खाता सीज हो जाएगा। जिन लोगोें ने पैन नहीं जमा किया है वे 28 फरवरी से पहले संबंधित डाकघरों में जाकर जमा कर दें। ऐसा नही करने की स्थिति में खाता सीज हो सकता है। इनकम टैक्स विभाग के इस आदेश के बाद प्रतापगढ़ में सैकड़ों खाते सीज होने की स्थिति में पहुंच चुके हैं। इनके साथ पैन नहीं लगा हुआ है। खाता खोलते समय इसकी जरूरत नहीं थी। नोटबंदी के बाद अब अचानक इसकी जरूरत पड़ी है। इनकम टैक्स के सूत्रों का मानना है कि इसके पीछे खाताधारकों की ऑनलाइन मानीटरिंग करना मकसद है।
नोटबंदी के बाद सरकार के निर्देश पर हरकत में आए इनकम टैक्स विभाग ने कालेधन वालों की कुंडली खंगालने और उनके खाते मेें जमा धन की मानीटरिंग ऑनलाइन के लिये अब पैन नंबर को अनिवार्य कर दिया है। हालांकि पहले से खुले खाते में पैन अनिवार्य नहीं था। इसलिए लोगों ने इसको जमा करने की जरूरत नहीं समझी थी। डाकघरों वाले भी खाता खोलने की प्रक्रिया हो सरल बनाकर अधिक से अधिक खाता खोलने का लक्ष्य पूरा करने में जुटे रहे। मगर अब इनकम टैक्स की नजर डाकघरों के ऐसे खातेदारों पर पड़ चुकी है जिन्हाेंने पैन कार्ड की छाया प्रति नहीं लगाई है। इनकम टैक्स के अफसरों की मानें तो अभी भी बड़ी संख्या में डाकघरों में खाताधारकों का पैन नहीं जमा है। सभी खातों में पैन की अनिवार्यता के पीछे मानीटरिंग का मकसद है। डाकविभाग के सूत्रों की मानें तो पैन कार्ड लेने के पीछे की असली वजह नोटबंदी के बाद किसके खाते में ढाई लाख या उससे अधिक का लेनदेन हुआ है, इसका खुलासा कराना है।
स्लिप से बन जायेगा काम
यदि पैन नहीं बना है तो उसके लिए अभी से ही आवेदन कर दें। फिलहाल आवेदन की स्लिप ही खाते में लगाई जा सकती है। उससे ही काम बन जायेगा। सूत्रों की मानें तो पैन बनने में डेढ़ से दो महीने का वक्त लगता है। ऐसी स्थिति में खाता सीज होने से बचाने के लिये पैन आवेदन की स्लिप से ही काम चलाया जा सकता है। आयकर विभाग के सूत्रों का कहना है कि सेट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर टैक्स विभाग ने इस आशय का आदेश दिया है।
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नोटबंदी के बाद सरकार के निर्देश पर हरकत में आए इनकम टैक्स विभाग ने कालेधन वालों की कुंडली खंगालने और उनके खाते मेें जमा धन की मानीटरिंग ऑनलाइन के लिये अब पैन नंबर को अनिवार्य कर दिया है। हालांकि पहले से खुले खाते में पैन अनिवार्य नहीं था। इसलिए लोगों ने इसको जमा करने की जरूरत नहीं समझी थी। डाकघरों वाले भी खाता खोलने की प्रक्रिया हो सरल बनाकर अधिक से अधिक खाता खोलने का लक्ष्य पूरा करने में जुटे रहे। मगर अब इनकम टैक्स की नजर डाकघरों के ऐसे खातेदारों पर पड़ चुकी है जिन्हाेंने पैन कार्ड की छाया प्रति नहीं लगाई है। इनकम टैक्स के अफसरों की मानें तो अभी भी बड़ी संख्या में डाकघरों में खाताधारकों का पैन नहीं जमा है। सभी खातों में पैन की अनिवार्यता के पीछे मानीटरिंग का मकसद है। डाकविभाग के सूत्रों की मानें तो पैन कार्ड लेने के पीछे की असली वजह नोटबंदी के बाद किसके खाते में ढाई लाख या उससे अधिक का लेनदेन हुआ है, इसका खुलासा कराना है।
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स्लिप से बन जायेगा काम
यदि पैन नहीं बना है तो उसके लिए अभी से ही आवेदन कर दें। फिलहाल आवेदन की स्लिप ही खाते में लगाई जा सकती है। उससे ही काम बन जायेगा। सूत्रों की मानें तो पैन बनने में डेढ़ से दो महीने का वक्त लगता है। ऐसी स्थिति में खाता सीज होने से बचाने के लिये पैन आवेदन की स्लिप से ही काम चलाया जा सकता है। आयकर विभाग के सूत्रों का कहना है कि सेट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर टैक्स विभाग ने इस आशय का आदेश दिया है।
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