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Pratapgarh News: मेडिकल कॉलेज में जल्द शुरू होगा प्लास्टिक सर्जरी
Sun, 04 Aug 2024 03:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
Updated Sun, 04 Aug 2024 03:56 AM IST
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जन्मजात विकृति, ऑपरेशन, जलने, चोट लगने से शरीर का स्वरूप बदल गया है तो इलाज के लिए प्रयागराज नहीं जाना होगा। जल्द ही मेडिकल कॉलेज में प्लास्टिक सर्जरी शुरू होगी। इसके लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन तैयारी में जुटा हुआ है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डाॅ. सलिल श्रीवास्तव ने बताया कि बीते सात साल पहले मेडिकल कॉलेज में 36 लाख की लागत से प्लॉस्टिक सर्जरी और बर्न यूनिट केयर का निर्माण शासन ने कराया, लेकिन चिकित्सकों के अभाव में इसका संचालन शुरू नहीं हो सका। इस बीच में सात सीएमएस आए और चले गए, लेकिन किसी ने शासन को पत्र तक लिखना उचित नहीं समझा।
ऐसे में जन्मजात या अन्य वजह से हुई विकृति का उपचार के लिए लोग परेशान होते हैं। औसतन छह माह में इस तरह के सौ से अधिक मरीजों को इलाज कराने के लिए प्रयागराज जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि इसके संचालन के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। चिकित्सकों के साथ कर्मचारियों की तैनाती की मांग की गई है। दो माह के भीतर चिकित्सक के मिलने की उम्मीद है।
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इस तरह के मरीजों का होगा इलाज
कटे होंठ, तालू, गर्दन में टेढ़ापन, नाक-कान के विकार, जुड़ी या फिर अंगुलियां, टेढ़ा हाथ, जले मरीजों की सर्जरी के साथ किसी कारण बस हाथ, पैर कुछ भी कट जाने वाले मरीजों की तत्काल सर्जरी की जाएगी।
बगैर प्रयोग जर्जर हो गया भवन
प्लास्टिक सर्जरी और बर्न यूनिट केयर में भले ही किसी मरीजों को अबतक भर्ती कर इलाज न किया गया हो, लेकिन भवन पूरी तरह से जर्जर हो गया है। वार्डों में लगे एसी तक गायब हो गए हैं। जबकि इसी भवन को कोविड कंट्रोल रूम बनाया गया था। इसके बाद एचआईवी के मरीजों का यहां इलाज किया जाता है।
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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डाॅ. सलिल श्रीवास्तव ने बताया कि बीते सात साल पहले मेडिकल कॉलेज में 36 लाख की लागत से प्लॉस्टिक सर्जरी और बर्न यूनिट केयर का निर्माण शासन ने कराया, लेकिन चिकित्सकों के अभाव में इसका संचालन शुरू नहीं हो सका। इस बीच में सात सीएमएस आए और चले गए, लेकिन किसी ने शासन को पत्र तक लिखना उचित नहीं समझा।
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ऐसे में जन्मजात या अन्य वजह से हुई विकृति का उपचार के लिए लोग परेशान होते हैं। औसतन छह माह में इस तरह के सौ से अधिक मरीजों को इलाज कराने के लिए प्रयागराज जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि इसके संचालन के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। चिकित्सकों के साथ कर्मचारियों की तैनाती की मांग की गई है। दो माह के भीतर चिकित्सक के मिलने की उम्मीद है।
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इस तरह के मरीजों का होगा इलाज
कटे होंठ, तालू, गर्दन में टेढ़ापन, नाक-कान के विकार, जुड़ी या फिर अंगुलियां, टेढ़ा हाथ, जले मरीजों की सर्जरी के साथ किसी कारण बस हाथ, पैर कुछ भी कट जाने वाले मरीजों की तत्काल सर्जरी की जाएगी।
बगैर प्रयोग जर्जर हो गया भवन
प्लास्टिक सर्जरी और बर्न यूनिट केयर में भले ही किसी मरीजों को अबतक भर्ती कर इलाज न किया गया हो, लेकिन भवन पूरी तरह से जर्जर हो गया है। वार्डों में लगे एसी तक गायब हो गए हैं। जबकि इसी भवन को कोविड कंट्रोल रूम बनाया गया था। इसके बाद एचआईवी के मरीजों का यहां इलाज किया जाता है।