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कुंभनगरी गए पंडितजी, ढूंढते फिर रहे यजमान
Thu, 17 Jan 2019 12:36 AM IST
shubham
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
Published by: shubham
Updated Thu, 17 Jan 2019 12:36 AM IST
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Prayagraj Kumbh 2019
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संगम की रेती पर सजे कुंभ में जिले के पुरोहितों और आचार्यों ने भी डेरा दिया है। कुंभ में अनुष्ठान, हवन, कथा, पूजापाठ और कर्मकांड में होने वाली मोटी कमाई को देखते हुए जिले के पुरोहितों और आचार्यों ने प्रयागराज में डेरा डाल दिया है। प्रयागराज के कई मठों और संस्थाओं से बाकायदा टेस्ट लेने के बाद पंडितों को अपने यहां बुला लिया है। अब चार मार्च तक पंडितजी संगम की रेती पर ही देश-विदेश से आने वाले लोगों के ग्रह-गोचर दुरुस्त करेंगे। इससे उन्हें मोटी कमाई भी होगी। इधर, जिले पुरोहितों के चले जाने से जिले के यजमानों की परेशानी बढ़ गई है। पूजापाठ कराने के लिए उन्हें ढूंढने पर भी पंडित नहीं मिल रहे हैं।
प्रयागराज में आयोजित कुंभ में धर्म-कर्म के लिए एक महीने के माघ मास मेें कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। सुख-समृद्धि के साथ ही मोक्ष की प्राप्ति के लिए पूजन, हवन के साथ विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के लिए देश ही नहीं विदेश से भी लोग संगम की रेती पर पहुंच रहे हैं। इनमें कई बड़े व्यवसायी, सेठ, साहूकार और राजनेताओं ने पहले से अपना कार्यक्रम निर्धारित करा रखा है।
कुंभ मेले में प्रयागराज के कई मठों एवं संस्थाओं ने ऐसे कार्यों को संपन्न कराने की जिम्मेदारी ली है। इसके लिए मठों एवं संस्थाओं ने पुरोहितों एवं कर्मकांड के जानकार पंडितों को बुलाया है। अच्छी दक्षिणा के फेर में जिले से भी बड़ी संख्या में पुरोहित और आचार्यों ने संगम का रुख कर लिया है। यही कारण है कि शहर से लेकर गांव तक पंडित पुरोहितों का टोटा हो गया है। जिससे यजमानों की परेशानी बढ़ गई है। माघ मास के शुभ संयोग में घरों में हवन, अनुष्ठान पूजन कराने की योजनाएं बनाए यजमान परेशान हैं।
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उन्हें ढूंढने से भी पंडित नहीं मिल रहे हैं। वह पुरोहितों से संपर्क कर रहे हैं तो कुंभ में व्यस्त होने का हवाला दिया जा रहा है। आचार्य प्रभाकरनाथ पांडेय ने बताया कि प्रयागराज में बड़े अनुष्ठान, यज्ञ, पूजन, पाठ हो रहे हैं। मठों एवं संस्थाओं ने आयोजन का जिम्मा लिया है। इसके लिए अच्छी दक्षिणा पर पंडितों एवं जानकारों की बुकिंग की है।
संस्कृत के साथ अंग्रेजी भाषा के जानकार पुरोहितों को मिलती है मोटी दक्षिणा
आचार्य पं. आलोक मिश्र ने बताया कि विदेशी यजमानों के अनुष्ठान, यज्ञ एवं कर्मकांड कराने वाले ऐसे पुरोहित जो अंग्रेजी की जानकारी रखते हैं, उन्हें अच्छी दक्षिणा मिलती है। अंग्रेजी भाषा के जानकार पंडित उन्हें कर्मकांड व अनुष्ठान से संबंधित सभी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी देकर संतुष्ट करते हैं। हालांकि इसमें भी बिचौलिए हेरफेर करते हैं।
निर्धारित दक्षिणा पर 25 दिन की बुकिंग
पं. आलोक मिश्र ने बताया कि मेले में लखचंडी यज्ञ, शतचंडी यज्ञ, गायत्री महायज्ञ, अनुष्ठान व पाठ के लिए जगह-जगह स्थल बनाए गए हैं। जहां तीन से चार हजार पंडितों की बुकिंग की गई है। इसके लिए प्रतिदिन वरीयता के अनुसार एक से दो हजार रुपये तक की दक्षिणा निर्धारित की गई है।
रजिस्ट्रेशन, साक्षात्कार फिर हुआ सेलेक्शन
आचार्य पं. प्रभाकरनाथ पांडेय ने बताया कि यज्ञ, अनुष्ठान, पाठ सहित सभी धार्मिक कर्मकांडों की कितनी जानकारी पुरोहितों को है, इसके लिए मठों एवं संस्थाओं के लोगों ने बाकायदा साक्षात्कार लिया। इसके बाद फिर सेलेक्शन हुआ।
विदेशी संस्थाएं भी हैं मैदान में
यज्ञ, अनुष्ठान को संपन्न कराने के लिए विदेशी संस्थाएं भी प्रयागराज में आई हैं। जो विदेशियों को डील कर रही हैं। ये संस्थाएं भी यहां के पुरोहितों की योग्यता की परीक्षा लेकर उन्हें अच्छी दक्षिणा दे रही हैं।
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प्रयागराज में आयोजित कुंभ में धर्म-कर्म के लिए एक महीने के माघ मास मेें कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। सुख-समृद्धि के साथ ही मोक्ष की प्राप्ति के लिए पूजन, हवन के साथ विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के लिए देश ही नहीं विदेश से भी लोग संगम की रेती पर पहुंच रहे हैं। इनमें कई बड़े व्यवसायी, सेठ, साहूकार और राजनेताओं ने पहले से अपना कार्यक्रम निर्धारित करा रखा है।
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कुंभ मेले में प्रयागराज के कई मठों एवं संस्थाओं ने ऐसे कार्यों को संपन्न कराने की जिम्मेदारी ली है। इसके लिए मठों एवं संस्थाओं ने पुरोहितों एवं कर्मकांड के जानकार पंडितों को बुलाया है। अच्छी दक्षिणा के फेर में जिले से भी बड़ी संख्या में पुरोहित और आचार्यों ने संगम का रुख कर लिया है। यही कारण है कि शहर से लेकर गांव तक पंडित पुरोहितों का टोटा हो गया है। जिससे यजमानों की परेशानी बढ़ गई है। माघ मास के शुभ संयोग में घरों में हवन, अनुष्ठान पूजन कराने की योजनाएं बनाए यजमान परेशान हैं।
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उन्हें ढूंढने से भी पंडित नहीं मिल रहे हैं। वह पुरोहितों से संपर्क कर रहे हैं तो कुंभ में व्यस्त होने का हवाला दिया जा रहा है। आचार्य प्रभाकरनाथ पांडेय ने बताया कि प्रयागराज में बड़े अनुष्ठान, यज्ञ, पूजन, पाठ हो रहे हैं। मठों एवं संस्थाओं ने आयोजन का जिम्मा लिया है। इसके लिए अच्छी दक्षिणा पर पंडितों एवं जानकारों की बुकिंग की है।
संस्कृत के साथ अंग्रेजी भाषा के जानकार पुरोहितों को मिलती है मोटी दक्षिणा
आचार्य पं. आलोक मिश्र ने बताया कि विदेशी यजमानों के अनुष्ठान, यज्ञ एवं कर्मकांड कराने वाले ऐसे पुरोहित जो अंग्रेजी की जानकारी रखते हैं, उन्हें अच्छी दक्षिणा मिलती है। अंग्रेजी भाषा के जानकार पंडित उन्हें कर्मकांड व अनुष्ठान से संबंधित सभी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी देकर संतुष्ट करते हैं। हालांकि इसमें भी बिचौलिए हेरफेर करते हैं।
निर्धारित दक्षिणा पर 25 दिन की बुकिंग
पं. आलोक मिश्र ने बताया कि मेले में लखचंडी यज्ञ, शतचंडी यज्ञ, गायत्री महायज्ञ, अनुष्ठान व पाठ के लिए जगह-जगह स्थल बनाए गए हैं। जहां तीन से चार हजार पंडितों की बुकिंग की गई है। इसके लिए प्रतिदिन वरीयता के अनुसार एक से दो हजार रुपये तक की दक्षिणा निर्धारित की गई है।
रजिस्ट्रेशन, साक्षात्कार फिर हुआ सेलेक्शन
आचार्य पं. प्रभाकरनाथ पांडेय ने बताया कि यज्ञ, अनुष्ठान, पाठ सहित सभी धार्मिक कर्मकांडों की कितनी जानकारी पुरोहितों को है, इसके लिए मठों एवं संस्थाओं के लोगों ने बाकायदा साक्षात्कार लिया। इसके बाद फिर सेलेक्शन हुआ।
विदेशी संस्थाएं भी हैं मैदान में
यज्ञ, अनुष्ठान को संपन्न कराने के लिए विदेशी संस्थाएं भी प्रयागराज में आई हैं। जो विदेशियों को डील कर रही हैं। ये संस्थाएं भी यहां के पुरोहितों की योग्यता की परीक्षा लेकर उन्हें अच्छी दक्षिणा दे रही हैं।