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पंचायत चुनाव की आहट से बढ़ी चुनावी सरगर्मी
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़
Updated Tue, 21 Apr 2015 11:12 PM IST
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पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही गावों में सियासत गरमाने लगी है। मौजूदा पंचायत प्रतिनिधि विरोधियों के निशाने पर हैं। लगातार आ रही शिकायतों के निस्तारण पर विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सिरदर्दी भी बढ़ती जा रही है।
आगामी नवंबर माह में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। ऐसे में प्रधान, बीडीसी सदस्य एवं जिला पंचायत सदस्य पद के दावेदारों ने क्षेत्र में अपनी गोटियां बिछाना शुरू कर दिया है। इसके लिए वह वर्तमान प्रतिनिधियों की कमियों को ढूंढकर उन्हें घेरने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं जिला प्रशासन भी चुनावी तैयारियों में लग गया है। चुनावी क्षेत्रों के परिसीमन का कार्य लगभग पूरा करा लिया गया है। मतदाताओं को रिझाने के लिए दावेदार भरसक प्रयास कर रहे हैं। जबकि अपनी कुर्सी जाने के डर से वर्तमान प्रतिनिधि मतदाताओं को क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों को गिनाने में लगे हुए हैं। क्षेत्रों में हर दिन किसी न किसी नए उम्मीदवार का नाम सामने आ रहा है।
ऐसे में समीकरणों के बनने और बिगाड़ने का खेल शुरू हुआ है। अधिकांश जनप्रतिनिधि जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाए हैं। उन्हें इस बात का भय सता रहा है कि आगामी चुनाव में उन्हें इसका खामियाजा न भुगतना पड़ जाए। इसलिए अंतिम चरण में जोर शोर से विकास कार्य कराए जा रहे हैं। वहीं अधिकारिक सूत्रों की मानें तो ग्रामीण क्षेत्रों से वर्तमान प्रतिनिधियों के खिलाफ शिकायतें आ रही हैं। जिसमें सरकार की विभिन्न लोकलुभावन योजनाओं में कथित तौर पर अनियमितता बरतने और अपने चहेतों को रेवड़ी बांटने की शिकायतें प्रमुख हैं। हालांकि ग्रामीण जनता अभी अपने भावी प्रतिनिधि के बारे में कुछ भी बोलने से कतरा रही है।
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आगामी नवंबर माह में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। ऐसे में प्रधान, बीडीसी सदस्य एवं जिला पंचायत सदस्य पद के दावेदारों ने क्षेत्र में अपनी गोटियां बिछाना शुरू कर दिया है। इसके लिए वह वर्तमान प्रतिनिधियों की कमियों को ढूंढकर उन्हें घेरने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं जिला प्रशासन भी चुनावी तैयारियों में लग गया है। चुनावी क्षेत्रों के परिसीमन का कार्य लगभग पूरा करा लिया गया है। मतदाताओं को रिझाने के लिए दावेदार भरसक प्रयास कर रहे हैं। जबकि अपनी कुर्सी जाने के डर से वर्तमान प्रतिनिधि मतदाताओं को क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों को गिनाने में लगे हुए हैं। क्षेत्रों में हर दिन किसी न किसी नए उम्मीदवार का नाम सामने आ रहा है।
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ऐसे में समीकरणों के बनने और बिगाड़ने का खेल शुरू हुआ है। अधिकांश जनप्रतिनिधि जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाए हैं। उन्हें इस बात का भय सता रहा है कि आगामी चुनाव में उन्हें इसका खामियाजा न भुगतना पड़ जाए। इसलिए अंतिम चरण में जोर शोर से विकास कार्य कराए जा रहे हैं। वहीं अधिकारिक सूत्रों की मानें तो ग्रामीण क्षेत्रों से वर्तमान प्रतिनिधियों के खिलाफ शिकायतें आ रही हैं। जिसमें सरकार की विभिन्न लोकलुभावन योजनाओं में कथित तौर पर अनियमितता बरतने और अपने चहेतों को रेवड़ी बांटने की शिकायतें प्रमुख हैं। हालांकि ग्रामीण जनता अभी अपने भावी प्रतिनिधि के बारे में कुछ भी बोलने से कतरा रही है।
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