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महिलाओं ने बचाई लालगंज की लाज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sat, 17 Oct 2015 11:45 PM IST
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तीसरे चरण में मतदान को लेकर महिलाओं में गजब का उत्साह देखने को मिला। वास्तविकता तो यह है कि महिलाओं की वोटिंग ने लालगंज की लाज बचा ली। वैसे भी तीसरे चरण में मतदान प्रतिशत सबसे कम रहा।
सांगीपुर, डांडी और अजगरा सहित अन्य बूथों के बाहर जो कतार दिखी, वह महिलाओं की ही थी। दोपहर में धूप होने के बावजूद महिलाएं घर से निकल कर लोकतंत्र के महापर्व का हिस्सा बनीं। जिले के चार ब्लाकों में हुए तीसरे चरण के मतदान में शनिवार को महिलाओं ने सबसे ज्यादा अपने मत का प्रयोग किया। सभी बूथों पर महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग प्रवेशद्वार बनाए गए थे।
अधिकांश बूथों पर पुरुषों की लाइन में गिने-चुने लोग दिखे, जबकि महिलाओं की पंक्ति लंबी देखने को मिली। घर से वोट डालने के लिए निकली महिलाएं भीड़ होने के बावजूद बूथ से नहीं हिलीं, बल्कि लाइन में खड़ी होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करती रहीं। लक्ष्मणपुर विकास खंड के डांडी गांव के लोगों ने मतदान नहीं करने का फैसला किया था। मगर अमर उजाला की टीम जब बूथ पर पहुंची तो वहां महिलाओं की लंबी लाइन देखने को मिली। वास्तव में अगर देखा जाए तो मतदान का जो प्रतिशत बढ़ा है वह सिर्फ महिला मतदाताओं की सक्रियता से ही संभव हो पाया है। ग्रामीण इलाकों के अधिकांश पुरुष रोजी-रोटी के सिलसिले में बाहर रहते हैं, यही कारण रहा पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं बूथों पर ज्यादा नजर आईं।
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सांगीपुर, डांडी और अजगरा सहित अन्य बूथों के बाहर जो कतार दिखी, वह महिलाओं की ही थी। दोपहर में धूप होने के बावजूद महिलाएं घर से निकल कर लोकतंत्र के महापर्व का हिस्सा बनीं। जिले के चार ब्लाकों में हुए तीसरे चरण के मतदान में शनिवार को महिलाओं ने सबसे ज्यादा अपने मत का प्रयोग किया। सभी बूथों पर महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग प्रवेशद्वार बनाए गए थे।
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अधिकांश बूथों पर पुरुषों की लाइन में गिने-चुने लोग दिखे, जबकि महिलाओं की पंक्ति लंबी देखने को मिली। घर से वोट डालने के लिए निकली महिलाएं भीड़ होने के बावजूद बूथ से नहीं हिलीं, बल्कि लाइन में खड़ी होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करती रहीं। लक्ष्मणपुर विकास खंड के डांडी गांव के लोगों ने मतदान नहीं करने का फैसला किया था। मगर अमर उजाला की टीम जब बूथ पर पहुंची तो वहां महिलाओं की लंबी लाइन देखने को मिली। वास्तव में अगर देखा जाए तो मतदान का जो प्रतिशत बढ़ा है वह सिर्फ महिला मतदाताओं की सक्रियता से ही संभव हो पाया है। ग्रामीण इलाकों के अधिकांश पुरुष रोजी-रोटी के सिलसिले में बाहर रहते हैं, यही कारण रहा पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं बूथों पर ज्यादा नजर आईं।
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