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पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में दिखा उत्साह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Tue, 13 Oct 2015 11:14 PM IST
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मंगलवार को हुए दूसरे चरण के मतदान में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अधिक उत्साह देखने को मिला। इससे महिलाओं का मत ही निर्णायक साबित होगा। मतदाता पहचान पत्र नहीं होने की दशा में भी वह बगैर मतदान किए वापस नहीं लौटी। वह राशन कार्ड और बैंक पासबुक लेकर मतदान करने पहुंची।
जिले में दूसरे चरण का मतदान मंगलवार को संडवा चंद्रिका, सदर, मंगरौरा और मानधाता ब्लाकों में हुआ। चारों ब्लाकों के सभी मतदान केंद्रों पर महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग लाइन थी। अधिकांश बूथों पर पुरुषों की लाइन में गिने-चुने लोग दिखे, जबकि महिलाओं की पंक्ति लंबी देखने को मिली। वे लाइन में खड़े होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करती रहीं। घर से वोट डालने के लिए निकलीं महिलाएं भीड़ होने के बावजूद बूथों से नहीं हिलीं। मानधाता बूथ पर 83 वर्षीय जगवंती अपनी बहू के साथ से वोट देने पहुंची।
जगवंती से जब बात की गई तो लड़खड़ाती आवाज में बोली कि ‘वोट देब हमार अधिकार अहाई, अगर हम वोट न देब तो गांव के सही मनई न चुना जाई’। यह बात सिर्फ जगवंती की ही नहीं है, लाइन में खड़ी महिलाएं इस बात की गवाह हैं कि वह अपने अधिकार को लेकर कितना सतर्क थीं। अगर महिलाएं वोट देने के लिए घर से न निकलतीं तो शायद मतदान प्रतिशत का प्रतिशत और कम हो जाता। गांव में जो पुरुष मौजूद थे, वे बूथों पर लाइन लगाना नहीं चाहते थे। शायद यही वजह रही कि बूथों पर पुरुषों की संख्या कम देखने को मिली।
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जिले में दूसरे चरण का मतदान मंगलवार को संडवा चंद्रिका, सदर, मंगरौरा और मानधाता ब्लाकों में हुआ। चारों ब्लाकों के सभी मतदान केंद्रों पर महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग लाइन थी। अधिकांश बूथों पर पुरुषों की लाइन में गिने-चुने लोग दिखे, जबकि महिलाओं की पंक्ति लंबी देखने को मिली। वे लाइन में खड़े होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करती रहीं। घर से वोट डालने के लिए निकलीं महिलाएं भीड़ होने के बावजूद बूथों से नहीं हिलीं। मानधाता बूथ पर 83 वर्षीय जगवंती अपनी बहू के साथ से वोट देने पहुंची।
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जगवंती से जब बात की गई तो लड़खड़ाती आवाज में बोली कि ‘वोट देब हमार अधिकार अहाई, अगर हम वोट न देब तो गांव के सही मनई न चुना जाई’। यह बात सिर्फ जगवंती की ही नहीं है, लाइन में खड़ी महिलाएं इस बात की गवाह हैं कि वह अपने अधिकार को लेकर कितना सतर्क थीं। अगर महिलाएं वोट देने के लिए घर से न निकलतीं तो शायद मतदान प्रतिशत का प्रतिशत और कम हो जाता। गांव में जो पुरुष मौजूद थे, वे बूथों पर लाइन लगाना नहीं चाहते थे। शायद यही वजह रही कि बूथों पर पुरुषों की संख्या कम देखने को मिली।
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