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बीडीसी में कम, डीडीसी में अधिक दिखा रुझान
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Thu, 29 Oct 2015 11:24 PM IST
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चौथे चरण के मतदान में बीडीसी सदस्य पद के लिए उतनी सक्रियता नहीं दिखी,
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जितना डीडीसी सदस्य के लिए। एक-एक वोट के लिए प्रत्याशी और समर्थक संघर्ष
करते रहे। इसी का परिणाम रहा कि विहार ब्लाक में सबसे अधिक 65 प्रतिशत
मतदान हुआ है। अंतिम चरण के मतदान में जिला पंचायत सदस्य के दस
प्रत्याशियों का निर्विरोध चयन पहले ही हो चुका था। गुरुवार को मात्र पांच
सीटों और विहार पंचम आंशिक के लिए मतदान हुआ। गुरुवार को हुए मतदान में
क्षेत्र पंचायत सदस्य पद का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों और समर्थकों में
उतनी सक्रियता नहीं दिखी, जितना जिला पंचायत सदस्य के लिए चुनाव लड़ रहे
प्रत्याशियों और समर्थकों में दिखी।
एक-एक वोट के लिए प्रत्याशी और समर्थक अंतिम समय तक संघर्ष करते रहे। प्रत्याशियों में सबसे अधिक संघर्ष विहार पंचम, विहार द्वितीय और विहार चतुर्थ सीटों पर रहा। प्रत्याशी और समर्थक मतदाताओं के घर का एक-एक वोट गिनते रहे। यही कारण रहा कि विहार में सबसे अधिक 65 प्रतिशत, बाबागंज में 59 प्रतिशत, कुंडा में 51 प्रतिशत और कालाकांकर में 56 प्रतिशत मतदान हुआ। चुनाव के दौरान उन बूथों पर मतदाताओं में उतनी रुचि नहीं दिखाई पड़ी, जहां जिला पंचायत सदस्य का चुनाव निर्विरोध हो चुका था। इससे उन बूथों पर सन्नाटा पसरा रहा। जबकि जिस बूथ पर जिला पंचायत सदस्य के प्रत्याशी लड़ रहे थे, वहां मतदाताओं की लंबी लाइन लगी हुई थी।
एक-एक वोट के लिए प्रत्याशी और समर्थक अंतिम समय तक संघर्ष करते रहे। प्रत्याशियों में सबसे अधिक संघर्ष विहार पंचम, विहार द्वितीय और विहार चतुर्थ सीटों पर रहा। प्रत्याशी और समर्थक मतदाताओं के घर का एक-एक वोट गिनते रहे। यही कारण रहा कि विहार में सबसे अधिक 65 प्रतिशत, बाबागंज में 59 प्रतिशत, कुंडा में 51 प्रतिशत और कालाकांकर में 56 प्रतिशत मतदान हुआ। चुनाव के दौरान उन बूथों पर मतदाताओं में उतनी रुचि नहीं दिखाई पड़ी, जहां जिला पंचायत सदस्य का चुनाव निर्विरोध हो चुका था। इससे उन बूथों पर सन्नाटा पसरा रहा। जबकि जिस बूथ पर जिला पंचायत सदस्य के प्रत्याशी लड़ रहे थे, वहां मतदाताओं की लंबी लाइन लगी हुई थी।