{"_id":"0fa81f9bd418ba83879cd295697fc724","slug":"on-the-verge-of-ending-the-existence-of-bus-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"खत्म होने के कगार पर बस अड्डे का अस्तित्व ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खत्म होने के कगार पर बस अड्डे का अस्तित्व
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sun, 21 Jun 2015 02:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
iप्रतापगढ़। क्षेत्र के लोगों को अब बस अड्डे पर जानकारी के लिए भटकना होगा। कौन सी बस कब आएगी जाएगी इसकी जानकारी यात्रियों को नहीं मिल पाएगी। बस स्टेशन की देखभाल करने के साथ ही इन समस्याओं का समाधान करने वाले लिपिक को प्रयाग डिपो से संबद्ध कर दिया गया है। यानी कुंडा बस स्टेशन के दिन बहुरने वाले नहीं हैं।
कुंडा छोटा जिला माना जाता है। मगर यहां देश भर के लोगों की आंखें लगी रहती हैं। कृपालु महाराज के भक्तिधाम मनगढ़ के कारण देश ही नहीं विदेश से भी लोग कुंडा आते हैं। इसके अलावा इलाहाबाद और लखनऊ के बीच में होने के कारण यहां आए दिन एक से एक मंत्री और अधिकारी रुकते हैं। बावजूद इसके यहां के बस अड्डे की व्यवस्था नहीं सुधर सकी। हालत यह है कि बस अड्डे पर आसपास के तमाम लोगों का कब्जा होता जा रहा है। कुछ दिन तो यहां मौजूद लिपिक बस अड्डे की देखभाल के साथ ही लोगों को बसों की जानकारी देता था लेकिन अब उसे प्रयाग बस स्टेशन से संबद्ध कर दिया गया है। इससे लोगों को बसों की जानकारी के लिए भटकना पड़ रहा है।
नहीं बहुर रहे दिन
कुंडा। बस स्टेशन के दिन नहीं बहुर रहे है। न तो यहां की बिल्डिंग दुरुस्त हो पा रही हैं और न ही किसी की तैनाती। कई बीघे में फैली इस जमीन पर हर कोई कब्जे की फिराक में बैठा हुआ है। यही नहीं इस जमीन पर कब्जे की नीयत से ही आए दिन आयोजन किए जाते हैं। बस के लिए आने वाले यात्री यह देखकर भ्रमित भी हो जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
कुंडा छोटा जिला माना जाता है। मगर यहां देश भर के लोगों की आंखें लगी रहती हैं। कृपालु महाराज के भक्तिधाम मनगढ़ के कारण देश ही नहीं विदेश से भी लोग कुंडा आते हैं। इसके अलावा इलाहाबाद और लखनऊ के बीच में होने के कारण यहां आए दिन एक से एक मंत्री और अधिकारी रुकते हैं। बावजूद इसके यहां के बस अड्डे की व्यवस्था नहीं सुधर सकी। हालत यह है कि बस अड्डे पर आसपास के तमाम लोगों का कब्जा होता जा रहा है। कुछ दिन तो यहां मौजूद लिपिक बस अड्डे की देखभाल के साथ ही लोगों को बसों की जानकारी देता था लेकिन अब उसे प्रयाग बस स्टेशन से संबद्ध कर दिया गया है। इससे लोगों को बसों की जानकारी के लिए भटकना पड़ रहा है।
विज्ञापन
नहीं बहुर रहे दिन
कुंडा। बस स्टेशन के दिन नहीं बहुर रहे है। न तो यहां की बिल्डिंग दुरुस्त हो पा रही हैं और न ही किसी की तैनाती। कई बीघे में फैली इस जमीन पर हर कोई कब्जे की फिराक में बैठा हुआ है। यही नहीं इस जमीन पर कब्जे की नीयत से ही आए दिन आयोजन किए जाते हैं। बस के लिए आने वाले यात्री यह देखकर भ्रमित भी हो जाते हैं।
विज्ञापन