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अघोषित कटौती की पड़ताल करने के लिए विद्युत उपकेंद्रों पर अफसर डालेंगे डेरा
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भीषण गर्मी में उपभोक्ताओं को अघोषित बिजली कटौती का दंश झेलना पड़ रहा है। ओवरलोडिंग व ट्रिपिंग के नाम पर उपकेंद्रों से मनमानी कटौती की जा रही है। ग्रामीण इलाकों में रोस्टर धड़ाम हो गया है। इसके लिए काफी हद तक उपकेंद्रों में तैनात लापरवाह कर्मचारी जिम्मेदार हैं। अफसरों की टीम अब घूम-घूमकर बिजली उपकेंद्रों की पड़ताल करेगी। रात में अफसर उपकेंद्रों में डेरा जमाएंगे। वह यह जानने का प्रयास करेंगे कि आखिर बिजली कटौती की वजह क्या है।
जिले में चार विद्युत वितरण पारषेण खंड हैं। रानीगंज, लालगंज, कुंडा और सदर। कुल 67 विद्युत उपकेंद्र हैं। गर्मी के दिनों में रोस्टर के मुताबिक बिजली की आपूर्ति करने का निर्देश दिया है। जहां भी लोकल फॉल्ट या अन्य खामियां मिलती हैं, उन्हें दुरुस्त कर आपूर्ति बहाल करने के लिए कहा गया है, मगर गर्मी के दिनों में खपत बढ़ते से बिजली व्यवस्था चरमरा गई है। सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रामीण इलाकों में है। यहां 18 घंटे रोस्टर के सापेक्ष महज आठ से नौ घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
उमसभरी गर्मी में अघोषित कटौती से ग्रामीण उपभोक्ताओं का बुरा हाल है। ओवरलोडिंग व ट्रिपिंग के नाम पर दिनभर बिजली गुल रहती है। रात में तो और भी हालत खराब रहती है। काफी हद तक इसके लिए उपकेंद्रों में तैनात कर्मचारी भी जिम्मेदार हैं। ट्रिपिंग व सामान्य खामी भी रहती है, तो वे उसे दूर करने का प्रयास नहीं करते। अलबत्ता पूरे फीडर की आपूर्ति बाधित कर छ़ुट्टी ले लेते हैं। इसे लेकर आए दिन उपकेंद्रों पर हंगामा होता है।
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अब लापरवाह कर्मचारियों की खैर नहीं है। विभागीय अफसरों की टीम उपकेंद्रों की पड़ताल करेगी। ट्रिपिंग व ओवरलोडिंग के नाम पर कटौती की जांच करेगी। पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन के निर्देश के बाद अफसरों की टीम गठित की जा रही है। उन उपकेंद्रों पर खास नजर रखी जाएगी, जहां आए दिन कटौती की शिकायतें आ रही हैं। रात में भी पड़ताल की जाएगी। रात में अफसर उपकेंद्रों में रुकेंगे। अधिशाषी अभियंता प्रथम चंद्रमा प्रसाद ने बताया कि रात में भी उपकेंद्रों की जांच की जाएगी। इसके लिए प्लान तैयार किया गया है।
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जिले में चार विद्युत वितरण पारषेण खंड हैं। रानीगंज, लालगंज, कुंडा और सदर। कुल 67 विद्युत उपकेंद्र हैं। गर्मी के दिनों में रोस्टर के मुताबिक बिजली की आपूर्ति करने का निर्देश दिया है। जहां भी लोकल फॉल्ट या अन्य खामियां मिलती हैं, उन्हें दुरुस्त कर आपूर्ति बहाल करने के लिए कहा गया है, मगर गर्मी के दिनों में खपत बढ़ते से बिजली व्यवस्था चरमरा गई है। सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रामीण इलाकों में है। यहां 18 घंटे रोस्टर के सापेक्ष महज आठ से नौ घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
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उमसभरी गर्मी में अघोषित कटौती से ग्रामीण उपभोक्ताओं का बुरा हाल है। ओवरलोडिंग व ट्रिपिंग के नाम पर दिनभर बिजली गुल रहती है। रात में तो और भी हालत खराब रहती है। काफी हद तक इसके लिए उपकेंद्रों में तैनात कर्मचारी भी जिम्मेदार हैं। ट्रिपिंग व सामान्य खामी भी रहती है, तो वे उसे दूर करने का प्रयास नहीं करते। अलबत्ता पूरे फीडर की आपूर्ति बाधित कर छ़ुट्टी ले लेते हैं। इसे लेकर आए दिन उपकेंद्रों पर हंगामा होता है।
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अब लापरवाह कर्मचारियों की खैर नहीं है। विभागीय अफसरों की टीम उपकेंद्रों की पड़ताल करेगी। ट्रिपिंग व ओवरलोडिंग के नाम पर कटौती की जांच करेगी। पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन के निर्देश के बाद अफसरों की टीम गठित की जा रही है। उन उपकेंद्रों पर खास नजर रखी जाएगी, जहां आए दिन कटौती की शिकायतें आ रही हैं। रात में भी पड़ताल की जाएगी। रात में अफसर उपकेंद्रों में रुकेंगे। अधिशाषी अभियंता प्रथम चंद्रमा प्रसाद ने बताया कि रात में भी उपकेंद्रों की जांच की जाएगी। इसके लिए प्लान तैयार किया गया है।