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चालीस प्रतिशत गेहूं खरीदने में अफसरों को आया पसीना

Wed, 01 Jul 2020 12:03 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2020 12:03 AM IST
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Officers sweat to buy 40 percent wheat
खुले बाजार में सरकारी रेट से अधिक दाम पर गेहूं बिकने के कारण इस बार अफसरों को लक्ष्य के करीब पहुंचने में पसीना छूट गया। शासन के दबाव पर घर-घर खरीद करने के बाद भी विपणन विभाग सिर्फ 40 प्रतिशत ही गेहूं की खरीद कर सका। जिले में 44,000 मीट्रिकटन गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया गया था, मगर मंगलवार को अंतिम दिन तक 17,930 मीट्रिकटन ही गेहूं खरीदा जा सका।
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किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए जिलेभर में 48 गेहूं खरीद केंद्र खोले गए। पहले किसानों से केंद्र पर गेहूं लाकर बेचने को कहा गया, मगर जब किसान खरीद केंद्र पर गेहूं लाने को तैयार नहीं हुए तो घर-घर जाकर खरीद का अभियान चलाया गया। गेहूं खरीद के लिए 30 जून अंतिम दिन था।
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विपणन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक 17,930 मीट्रिकटन ही गेहूं की खरीद हुई है। जबकि, जिले में गेहूं खरीदने के लिए 44,000 मीट्रिकटन का लक्ष्य मिला था। दरअसल, इस बार सरकार ने गेहूं खरीद का जो मूल्य निर्धारित किया था, उससे अधिक मूल्य पर किसान खुले बाजार में ही गेहूं बेच रहे थे। जिला प्रशासन की दूसरी गलती यह हुई कि किसानों के घर-घर जाकर गेहूं खरीदने का निर्णय काफी देर से लिया गया। जब विभागीय कर्मचारी किसान के घर गेहूं खरीदने पहुंचे, तब तक वह खुले बाजार में अनाज बेच चुके थे।
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पिछले साल 57 प्रतिशत हुई थी गेहूं खरीद
वर्ष 2019 में गेहूं खरीद की हालत इतनी खराब नहीं थी। विभागीय अफसरों की मानें तो पिछले साल 57 प्रतिशत गेहूं की खरीद हुई थी। विभाग का तर्क है कि इस बार लॉकडाउन के चलते अधिकांश किसान केंद्र तक आने में परहेज करते रहे। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए व्यापारियों को घर बुलाकर गेहूं बेच दिए।
बिचौलियों को लाभ नहीं मिलने से खरीद में लगा बट्टा
गेहूं खरीद से दलालों को दूर रखने के लिए शासन ने अफसरों की नकेल कस रखी थी। अभी तक कोटे में आने वाला दो रुपये किग्रा का गेहूं सरकारी खरीद केंद्रों पर बेचकर अधिकारी और दलाल जहां मालामाल होते थे, वहीं किसानों को एक रुपये का लाभ नहीं मिलता था। मगर इस बार शासन ने उन्हीं किसानों का गेहूं खरीदने को कहा था, जिनके पास स्वयं की जमीन है। खेत के आधार पर ही किसान गेहूं की बिक्री कर सकते थे। इससे बिचौलियों की दाल नहीं गली और अधिकारी भी मन मसोस कर रह गए।

कोरोना संक्रमण के चलते अफसर करते रहे अपना बचाव
कोरोना संक्रमण काल में गेहूं खरीद होने से अधिकारी सिर्फ कागजों में ही भागदौड़ करते रहे। गेहूं खरीदने और लक्ष्य हासिल करने के लिए अधिक दबाव नहीं बनाने से अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई।
गेहूं खरीद का आज अंतिम दिन है। लक्ष्य हासिल करने का प्रयास किया गया, मगर सफलता नहीं मिल पाई। इस वर्ष लक्ष्य के सापेक्ष 40 प्रतिशत की खरीद हुई है।
धनंजय सिंह, जिला विपणन अधिकारी
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