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इंस्पेक्टर और कोटेदार के खेल में अफसर फेल

Fri, 02 Nov 2018 12:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Fri, 02 Nov 2018 12:21 AM IST
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officer fail in the game of inspector and kotedaar
गेहूं के भीगे बोरे - फोटो : अमर उजाला

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जिले के सप्लाई इंस्पेक्टर और कोटेदारों के  खेल में अफसर फेल हो गए हैं। ग्रामीण इलाकों में लाभार्थियों को नियमित राशन का वितरण नहीं करना आम बात हो गई है। गरीबों के हक का राशन खुले बाजार में बेचा जा रहा है। अंत्योदय योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी को 35 किग्रा राशन देने का मानक है, मगर उन्हें 25 किग्रा राशन दिया जा रहा है। इससे कोटेदारों के  खिलाफ जब कभी शिकायत होती है, तो विभागीय अधिकारी सप्लाई इंस्पेक्टर से पूछ करके रिपोर्ट लगा देेते हैं।


विभागीय अधिकारियों की लापरवाही  के चलते कोटेदार मनमानी पर उतारू हो गए हैं। गांव में राश्न नहीं बांटने की समस्या आम हो गई है। उपभोक्ताओं की शिकायतों की जांच करने के बजाय कोटेदारों से सेटिंग मोटी रकम ऐंठ रहे हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत प्रत्येक यूनिट को पांच किग्रा राशन दिया जाता है। जिसमें तीन किग्रा गेहूं और दो किग्रा चावल दिया जाता है। जबकि अंत्योदय योजना के तहत प्रत्येक परिवार को 35 किग्रा राशन देने का मानक है। संडवा चंद्रिका के बंडाखुटार और अधारपुर गांव के कोटेदार की शिकायत कई बार की गई, मगर कोई भी सुनने को तैयार नहीं है।
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विभागीय जानकारों की मानें तो केवल अक्तूबर माह में 431 शिकायतें कोटेदारों के अनियमितता की आई, मगर जांच के नाम सिर्फ खाना पूर्ति की गई। अभी तक एक भी कोटेदार के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है। जबकि जनवरी से अक्तूबर के मध्य 29 कोटेदारों के हुई जांच सही मिलने पर पैदल करके कोटा अंयत्र सम्बध्द किया गया। वास्तव में विभागीय अधिकारी अगर मुस्तैद हो जाएं, तो कोटेदारों के  कालाबाजारी पर रोक लग सकती है।  
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डीएसओ कार्यालय में राशन कार्ड बनाने का खेल नहीं खत्म हो रहा है। दो सौ रुपये में यूनिट और पांच सौ रुपये में नया राशन कार्ड बनाने का खेल चल रहा है। दरअसल में किसका राशनकार्ड कब काट दिया जाएगा और कब बन जाएगा। इसको उपभोक्ताओं को नहीं पता रहता है। डीएसओ कार्यालय में मौजूद कर्मचारी खुलेआम यह खेल कर रहे हैं।  



कोटेदारों की जो भी शिकायते मिलती है, उसकी जांच कराई जाती है, जो कोटेदार दोषी मिलते है, उनके दुकानें निलंबित कर दी जाती है। जो प्रकरण लंबित है, उनकी जल्द जांच कराकर उनके  खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  
सुनील कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी।
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