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अब ठगी नहीं कर पाएंगी चिटफंड कंपनियां
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sat, 24 Mar 2018 12:04 AM IST
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पांच साल में धन दोगुना करने का झांसा देकर चिटफंड कंपनियां अब जिले के लोगों को ठग नहीं पाएंगी। आरबीआई ने जनता को लूटने वाली चिटफंड कंपनियों के लाइसेंस और कार्य पद्धति की जांच का अधिकार प्रशासनिक अधिकारियों को दे दिया है। इससे धोखाधड़ी करके ग्राहकों से होनी वाली ठगी पर प्रतिबंध लगाने में मदद मिलेगी।
जागरूकता के दौर में भी लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं, लेकिन अब आम लोगों की आंखों में धूल झोंककर ठगने वाली चिटफंड कंपनियों पर अब नकेल कसने की तैयारी कर ली गई है। शहर और ग्रामीण इलाकों में अपना सिक्का जमाने वाली चिटफंड कंपनियों के खिलाफ जांच का अभियान किसी भी समय चल सकता है। दरअसल बेल्हा में भी अभी तक एक दर्जन से अधिक चिटफंड कंपनियां सैकड़ों ग्राहकों के लाखों रुपये लेकर फरार हो चुकी हैं। शिकार लोगों में गांव के अनपढ़ लोगों के साथ ही पढ़ा-लिखा तबका भी शामिल है।
चिटफंड कंपनियां कम समय में धन दोगुना करने की लालच देकर अपने अभिकर्ताओं के माध्यम से जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका डालती हैं। यह चिटफंड कंपनियां अपने एजेंटों को इतना कमीशन देती हैं कि वह ग्राहकों को बैंक में रुपये रखने के बजाय निजी कंपनियों में रखने के लिए राजी कर लेते हैं। मगर अब बगैर आरबीआई से लाइसेंस प्राप्त किए कोई भी चिटफंड कंपनी अपना कार्यालय नहीं खोल सकती है। अगर ऐसा होता है जांच के बाद अधिकारी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराएंगे।
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छले जा रहे हैं गांव के लोग
ग्रामीण इलाकों में अभी भी चिटफंड कंपनियों के अभिकर्ता घूम-घूमकर अपना जाल फैला रहे हैं। कई बार ठगे जाने के बाद भी वह सबक नहीं सीख रहे हैं। अभिकर्ताओं के बहकावे में आकर वह चिटफंड कंपनियों में रुपये जमा कर रहे हैं। हालांकि जिले में इन कंपनियों ने सार्वजनिक तौर पर कहीं कार्यालय नहीं खोला है।
अगर कोई चिटफंड कंपनी ग्राहकों को गुमराह करके ठग रही है, तो उसकी जांच करके उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। अगर जिले में चिटफंड कंपनियां सक्रिय है, तो अभियान चलाकर जांच की जाएंगी और संचालकों को गिरफ्तार करके जेल भेजा जाएगा।
शिवपूजन, मुख्य राजस्व अधिकारी।
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जागरूकता के दौर में भी लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं, लेकिन अब आम लोगों की आंखों में धूल झोंककर ठगने वाली चिटफंड कंपनियों पर अब नकेल कसने की तैयारी कर ली गई है। शहर और ग्रामीण इलाकों में अपना सिक्का जमाने वाली चिटफंड कंपनियों के खिलाफ जांच का अभियान किसी भी समय चल सकता है। दरअसल बेल्हा में भी अभी तक एक दर्जन से अधिक चिटफंड कंपनियां सैकड़ों ग्राहकों के लाखों रुपये लेकर फरार हो चुकी हैं। शिकार लोगों में गांव के अनपढ़ लोगों के साथ ही पढ़ा-लिखा तबका भी शामिल है।
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चिटफंड कंपनियां कम समय में धन दोगुना करने की लालच देकर अपने अभिकर्ताओं के माध्यम से जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका डालती हैं। यह चिटफंड कंपनियां अपने एजेंटों को इतना कमीशन देती हैं कि वह ग्राहकों को बैंक में रुपये रखने के बजाय निजी कंपनियों में रखने के लिए राजी कर लेते हैं। मगर अब बगैर आरबीआई से लाइसेंस प्राप्त किए कोई भी चिटफंड कंपनी अपना कार्यालय नहीं खोल सकती है। अगर ऐसा होता है जांच के बाद अधिकारी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराएंगे।
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छले जा रहे हैं गांव के लोग
ग्रामीण इलाकों में अभी भी चिटफंड कंपनियों के अभिकर्ता घूम-घूमकर अपना जाल फैला रहे हैं। कई बार ठगे जाने के बाद भी वह सबक नहीं सीख रहे हैं। अभिकर्ताओं के बहकावे में आकर वह चिटफंड कंपनियों में रुपये जमा कर रहे हैं। हालांकि जिले में इन कंपनियों ने सार्वजनिक तौर पर कहीं कार्यालय नहीं खोला है।
अगर कोई चिटफंड कंपनी ग्राहकों को गुमराह करके ठग रही है, तो उसकी जांच करके उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। अगर जिले में चिटफंड कंपनियां सक्रिय है, तो अभियान चलाकर जांच की जाएंगी और संचालकों को गिरफ्तार करके जेल भेजा जाएगा।
शिवपूजन, मुख्य राजस्व अधिकारी।