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प्रत्याशियों को रोज नहीं देना होगा खर्च का हिसाब
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 12 Nov 2017 11:30 PM IST
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नगर निकाय चुनाव लड़ने वाले अध्यक्ष और सभासदों के लिए राहत भरी खबर है। प्रत्याशियों के चुनाव में प्रतिदिन होने वाले खर्च का ब्यौरा अफसरों को नहीं देना है, बल्कि चुनाव के बाद तीन माह के अंदर उन्हें चुनाव और मतगणना का खर्च देना होगा। अगर कोई प्रत्याशी खर्च का हिसाब नहीं देता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
नगर पालिका अध्यक्ष, टाउन एरिया अध्यक्ष और सभासद पद के लिए चुनाव लडने वाले प्रत्याशियों को चुनाव आयोग ने एक बड़ी राहत दी है। चुनाव के दौरान प्रत्याशियों को भरपूर प्रचार-प्रसार करने का मौका देते हुए चुनाव खर्च के झंझट से दूर कर दिया है। अब प्रत्याशियों को चुनाव समाप्त होने के बाद खर्च का ब्यौरा देना होगा। इसके पूर्व हुए चुनावों में प्रत्याशियों को प्रतिदिन का खर्च अफसरों के सामने प्रस्तुत करना होता था। चुनाव समाप्त होने के बाद तीन माह के अंदर प्रत्याशी खर्च का विवरण प्रस्तुत कर सकेंगे। प्रत्याशियों के खर्च के अभिलेख का रजिस्टर देखने के लिए शासन से कोई प्रेक्षक भी नहीं आएगा, बल्कि वरिष्ठ कोषाधिकारी स्वयं जांच करेंगे। इतना अवश्य है कि सभी प्रत्याशियों को खर्च का एक-एक रजिस्टर बनाने को कहा गया है। जिसमें वह प्रतिदिन होने वाले खर्च का विवरण अंकित करेंगे। चुनाव खत्म होने के बाद वह रजिस्टर लेकर वरिष्ठ कोषाधिकारी के कार्यालय में आएंगे। प्रत्याशी खर्च में कोई खेल न कर सकें, इसके लिए प्रेस, प्रिंटिंग प्रेस को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं। कोई प्रत्याशी प्रचार-प्रसार की जो सामग्री प्रयोग करेगा, उस पर प्रतियों की संख्या अंकित करना होगा।
अनुमति की प्रतियों से होगा मिलान
चुनाव में खर्च करने वाले प्रत्याशी आंकड़ों में गड़बड़ी नहीं कर पाएंगे। आरओ प्रत्याशी को जो अनुमति प्रदान करेंगे, उसकी एक प्रति वरिष्ठ कोषाधिकारी को भी दी जाएगी। चुनाव का खर्च रजिस्टर लेकर आने पर अधिकारी उसी से मिलान करेंगे।
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अलग से नहीं खोलवाना होगा खाता
प्रत्याशियों को चुनाव खर्च का विवरण देने के लिए अलग से कोई खाता नहीं खोलवाना होगा। ऐसा बैंकों में एक व्यक्ति के नाम पर दो खाते नहीं खुलने पर रोक लगने के कारण हुआ है। हां इतना अवश्य है कि प्रत्याशियों को चेक या ऑनलाइन भुगतान करने को कहा गया है। रजिस्टर नहीं बनाने वाले और खर्च का विवरण नहीं देने वाले प्रत्याशियों पर आयोग की गाज गिर सकती है।
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नगर पालिका अध्यक्ष, टाउन एरिया अध्यक्ष और सभासद पद के लिए चुनाव लडने वाले प्रत्याशियों को चुनाव आयोग ने एक बड़ी राहत दी है। चुनाव के दौरान प्रत्याशियों को भरपूर प्रचार-प्रसार करने का मौका देते हुए चुनाव खर्च के झंझट से दूर कर दिया है। अब प्रत्याशियों को चुनाव समाप्त होने के बाद खर्च का ब्यौरा देना होगा। इसके पूर्व हुए चुनावों में प्रत्याशियों को प्रतिदिन का खर्च अफसरों के सामने प्रस्तुत करना होता था। चुनाव समाप्त होने के बाद तीन माह के अंदर प्रत्याशी खर्च का विवरण प्रस्तुत कर सकेंगे। प्रत्याशियों के खर्च के अभिलेख का रजिस्टर देखने के लिए शासन से कोई प्रेक्षक भी नहीं आएगा, बल्कि वरिष्ठ कोषाधिकारी स्वयं जांच करेंगे। इतना अवश्य है कि सभी प्रत्याशियों को खर्च का एक-एक रजिस्टर बनाने को कहा गया है। जिसमें वह प्रतिदिन होने वाले खर्च का विवरण अंकित करेंगे। चुनाव खत्म होने के बाद वह रजिस्टर लेकर वरिष्ठ कोषाधिकारी के कार्यालय में आएंगे। प्रत्याशी खर्च में कोई खेल न कर सकें, इसके लिए प्रेस, प्रिंटिंग प्रेस को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं। कोई प्रत्याशी प्रचार-प्रसार की जो सामग्री प्रयोग करेगा, उस पर प्रतियों की संख्या अंकित करना होगा।
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अनुमति की प्रतियों से होगा मिलान
चुनाव में खर्च करने वाले प्रत्याशी आंकड़ों में गड़बड़ी नहीं कर पाएंगे। आरओ प्रत्याशी को जो अनुमति प्रदान करेंगे, उसकी एक प्रति वरिष्ठ कोषाधिकारी को भी दी जाएगी। चुनाव का खर्च रजिस्टर लेकर आने पर अधिकारी उसी से मिलान करेंगे।
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अलग से नहीं खोलवाना होगा खाता
प्रत्याशियों को चुनाव खर्च का विवरण देने के लिए अलग से कोई खाता नहीं खोलवाना होगा। ऐसा बैंकों में एक व्यक्ति के नाम पर दो खाते नहीं खुलने पर रोक लगने के कारण हुआ है। हां इतना अवश्य है कि प्रत्याशियों को चेक या ऑनलाइन भुगतान करने को कहा गया है। रजिस्टर नहीं बनाने वाले और खर्च का विवरण नहीं देने वाले प्रत्याशियों पर आयोग की गाज गिर सकती है।