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जिले के 68 गांवों में एक भी व्यक्ति का नहीं बना गोल्डेन कार्ड
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कैम्प कार्यालय में विकास कार्यो की समीक्षा बैठक करते डीएम रूपेश कुमार।
- फोटो : PRATAPGARH
जिले के 68 गांवों में आयुष्मान योजना के तहत एक भी व्यक्ति का गोल्डन कार्ड नहीं बनाया गया है। शुक्रवार को डीएम की समीक्षा बैठक में इसका खुलासा हुआ। जिलाधिकारी ने सीएमओ से जल्द पात्र व्यक्तियों का गोल्डन कार्ड बनाकर स्वास्थ्य योजना का लाभ देने को कहा है।
बैठक में यह भी सामने आया कि जिले में नई सड़कों के निर्माण के लिए बजट नहीं मिला है। इससे नये कार्य नहीं होंगे। पुरानी सड़कों की मरम्मत और गड्ढामुक्त करने का अभियान चलाया जा रहा है।
डीएम डा. रूपेश कुमार ने शुक्रवार को कैंप कार्यालय पर विभागीय योजनाओं की समीक्षा कर वास्तविक स्थिति की जानकारी ली। बिजली विभाग के एक्सईएन के सरकारी विभागों पर बिल बकाया होने की शिकायत करने पर डीएम ने सभी विभागों से बकाया बिल जमा करने को कहा है।
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सीएमओ ने बताया कि 68 गांव ऐसे हैं, जहां पर अभी तक एक भी गोल्डन कार्ड नहीं बनाए गए हैं। इस पर डीएम ने पात्र व्यक्तियों को चिह्नित कर गोल्डन कार्ड बनाने को कहा। बताया कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत 3,161 मरीजों का इलाज किया गया है।
पशुपालन विभाग ने खुरपका-मुंहपका पशुओं के टीकाकरण 47 प्रतिशत होने और सितंबर माह के अंत तक 80 प्रतिशत टीकाकरण पूर्ण होने का दावा किया। डीएम ने आवारा पशुओं को पकड़कर गो संरक्षण केंद्र में भेजने का निर्देश दिया है। डीएम ने कन्या सुमंगला योजना, श्रम योगी मानधन योजना, हैंडपंप रिबोर, आपरेशन कायाकल्प की प्रगति की जानकारी ली। बैठक में सीडीओ अश्विनी कुमार पांडेय, एडीएम शत्रोहन वैश्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
जिले में श्रमिकों के लिए चल रही हैं 13 योजनाएं
जिले के श्रमिकों के लिए 13 योजनाएं चल रही हैं, मगर योजना का लाभ तभी मिलेगा जब श्रमिक अपना रजिस्ट्रेशन विभाग में कराएंगे। श्रम प्रवर्तन अधिकारी डा. महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना, संत रविदास शिक्षा सहायता योजना, मेधावी छात्र पुरस्कार योजना, आवासीय विद्यालय योजना, कौशल विकास तकनीकी उन्नयन एवं प्रमाणन योजना, निर्माण कामगार कन्या विवाह सहायता योजना, सौर ऊर्जा सहायता योजना, निर्माण कामगार आवास सहायता योजना, चिकित्सा सुविधा योजना, गंभीर बीमारी सहायता योजना, महात्मा गांधी पेंशन सहायता योजना, निर्माण कामगार मृत्यु, विकलांगता एवं अक्षमता पेंशन योजना तथा निर्माण कामगार अंत्येष्टि सहायता योजनाएं संचालित की जा रही हैं। संत रविदास शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के 25 वर्ष तक के अधिकतम 02 बच्चों (पुत्र/पुत्रियों) को कक्षा-1 से उच्चतर शिक्षा के लिए न्यूनतम रुपये 150 मासिक से रुपये 2000 मासिक तक विभिन्न दरों से छात्रवृत्ति का भुगतान किया जाता है।
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बैठक में यह भी सामने आया कि जिले में नई सड़कों के निर्माण के लिए बजट नहीं मिला है। इससे नये कार्य नहीं होंगे। पुरानी सड़कों की मरम्मत और गड्ढामुक्त करने का अभियान चलाया जा रहा है।
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डीएम डा. रूपेश कुमार ने शुक्रवार को कैंप कार्यालय पर विभागीय योजनाओं की समीक्षा कर वास्तविक स्थिति की जानकारी ली। बिजली विभाग के एक्सईएन के सरकारी विभागों पर बिल बकाया होने की शिकायत करने पर डीएम ने सभी विभागों से बकाया बिल जमा करने को कहा है।
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सीएमओ ने बताया कि 68 गांव ऐसे हैं, जहां पर अभी तक एक भी गोल्डन कार्ड नहीं बनाए गए हैं। इस पर डीएम ने पात्र व्यक्तियों को चिह्नित कर गोल्डन कार्ड बनाने को कहा। बताया कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत 3,161 मरीजों का इलाज किया गया है।
पशुपालन विभाग ने खुरपका-मुंहपका पशुओं के टीकाकरण 47 प्रतिशत होने और सितंबर माह के अंत तक 80 प्रतिशत टीकाकरण पूर्ण होने का दावा किया। डीएम ने आवारा पशुओं को पकड़कर गो संरक्षण केंद्र में भेजने का निर्देश दिया है। डीएम ने कन्या सुमंगला योजना, श्रम योगी मानधन योजना, हैंडपंप रिबोर, आपरेशन कायाकल्प की प्रगति की जानकारी ली। बैठक में सीडीओ अश्विनी कुमार पांडेय, एडीएम शत्रोहन वैश्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
जिले में श्रमिकों के लिए चल रही हैं 13 योजनाएं
जिले के श्रमिकों के लिए 13 योजनाएं चल रही हैं, मगर योजना का लाभ तभी मिलेगा जब श्रमिक अपना रजिस्ट्रेशन विभाग में कराएंगे। श्रम प्रवर्तन अधिकारी डा. महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना, संत रविदास शिक्षा सहायता योजना, मेधावी छात्र पुरस्कार योजना, आवासीय विद्यालय योजना, कौशल विकास तकनीकी उन्नयन एवं प्रमाणन योजना, निर्माण कामगार कन्या विवाह सहायता योजना, सौर ऊर्जा सहायता योजना, निर्माण कामगार आवास सहायता योजना, चिकित्सा सुविधा योजना, गंभीर बीमारी सहायता योजना, महात्मा गांधी पेंशन सहायता योजना, निर्माण कामगार मृत्यु, विकलांगता एवं अक्षमता पेंशन योजना तथा निर्माण कामगार अंत्येष्टि सहायता योजनाएं संचालित की जा रही हैं। संत रविदास शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के 25 वर्ष तक के अधिकतम 02 बच्चों (पुत्र/पुत्रियों) को कक्षा-1 से उच्चतर शिक्षा के लिए न्यूनतम रुपये 150 मासिक से रुपये 2000 मासिक तक विभिन्न दरों से छात्रवृत्ति का भुगतान किया जाता है।