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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   Not a single hotel near the Fire Department's NOC

एक भी होटल के पास फायर विभाग की एनओसी नहीं

Sun, 21 Jun 2015 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़ Updated Sun, 21 Jun 2015 02:03 AM IST
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प्रतापगढ़। होटल और रेस्टोरेंट से मिल रही दौलत के नशे में चूर मालिकों ने ग्राहकों की सुरक्षा को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है। शहर के एक भी होटल के पास फायर विभाग की एनओसी नहीं है। बिना एनओसी (नान आब्जेशन सर्टिफिकेट) वर्षों से यहां होटल चल रहे हैं। हैरान करने वाली बात ये है कि प्रशासन ने भी कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया। लापरवाही की आग में झुलसने से मौतों के बाद प्र्रशासन की नींद टूटी है। इतने पर भी यदि केवल कोरम और मैनेजिंग व्यवस्था ही लागू रही तो किसी भी दिन इससे भयावह हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
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शहर स्थित होटल गोयल रेजीडेंसी में अग्नि कांड के बाद लापरवाहियों का खुलासा हो रहा है। इस घटना के दूसरे दिन शनिवार को पता चला कि शहर में संचालित एक भी होटल के पास फायर विभाग की एनओसी नहीं है। यही हाल ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे होटलों और रेस्टोरेंट का है। वर्षों से शहर मुख्यालय पर चल रहे तमाम होटलों में ग्राहकों की सुरक्षा के साथ खुलेआम खिलवाड़ होता रहा। सुरक्षा के नाम पर आग रोधी छोटा सा सिलेंडर बांध दिया गया। मगर इसे चलाने का होटल स्टाफ और संचालकों ने कभी फायर विभाग के कर्मचारियों से प्रशिक्षण नहीं लिया। यहां यह बताना जरूरी है कि इस फायर रोधी सिलेंडर की प्रति वर्ष जांच होनी चाहिए।
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 इसके लिए फायर विभाग में दस रुपये का शुल्क जमा करना पड़ता है। शुल्क जमा करने की रसीद के साथ विभाग में जांच के लिए पत्र देना पड़ता है। इसके बाद विभागीय अधिकारी जांच कर फायर उपकरणों के चालू हालत में होने का प्रमाण पत्र देते हैं। इस व्यवस्था और जांच से एनओसी का कोई मतलब नहीं है। हाल यह है कि कुछ साल पहले वैधता समाप्त होने के बाद भी वही प्रमाण पत्र एक दो होटल संचालक रख कर लोगों को विभाग की एनओसी बता रहे हैं। जबकि फायर किटों की जांच प्रति वर्ष होनी चानी चाहिए। चौंकाने वाली बात यह है कि बगैर फायर विभाग की एनओसी के चल रहे इन होटलों में कभी सुरक्षा के लिहाज से अधिकारियों ने भी जांच नहीं की। कार्रवाई की बात करना बेमानी है।
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होटलों में ढांचागत सुरक्षा के ये है मानक
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0 सेट बैक (होटल के चारों तरफ खुला स्थान होना जरूरी)।
0 होटल में कम से कम चौड़ी और ढलान युक्त दो सीढ़ी।
0 फायर स्केप, होटल से आकस्मिक बाहरी सीढ़ी जरूरी।
0 आग लगने पर बजने वाला अलार्म आवश्यक।
0 होजरिल (यह उपकरण आग बुझाने में होता है सहायक)।
0 होटल परिसर में या आसपास फायर हाइड्रेंट जरुरी।
0 फायर रोधी यंत्रों की जांच का होना चाहिए प्रमाण पत्र।
0 होटलों के कमरों में ऐयर पासिंग व खिड़की का इंतजाम।
0 दिन और रात के वक्त होटल में सुरक्षा गार्डों की उपस्थिति।
0 होटल तक फायर गाड़ी पहुंचने का सुगम मार्ग जरूरी।
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इनसेट----
कैसे बुझे फौरन आग, फायर हाईडेंट हैं बेकार
फायर विभाग के लिए शहर में कई साल पूर्व 13 फायर हाईड्रेंट बने थे। फायर हाईड्रेंट की पाइप का लिंक पानी टंकियों से होता है। आग लगने पर गाड़ियों में इसी फायर हाइड्रेंट से फायर विभाग के कर्मी गाड़ियों में पानी भर कर मौके पर पहुंचते हैं। मगर शहर में लगे ज्यादातर फायर हाईड्रेंट गुम हो गए हैं। जो चल भी रहे वे किसी काम के नहीं है। विभाग ने नगर पालिका और जलनिगम सहित कई अफसरों को पत्र लिखा। मगर किसी ने ध्यान नहीं दिया।

संख्या बल कमी से जूझ रहा फायर विभाग
अग्निशमन विभाग में एफएसओ के कुल छह पद यहां सृजित हैं। मगर तैनाती केवल एक की ही है। इसी तरह एफएसएसओ के सात पद हैं, मगर एक पर भी किसी की तैनाती नहीं है। एलएफएम के 13 पद के सापेक्ष 12 पर तैनाती है। विभाग को 13 चालकों की जरूरत है, मगर मौजूदा समय में केवल आठ ही तैनात हैं। विभाग में सिपाहियों की भी जबरदस्त कमी है। सूत्र बताते हैं कि 101 पद के सापेक्ष केवल 42 सिपाहियों की तैनाती है। जिन्हें जिले के कुल छह फायर स्टेशन सदर, कुंडा, सांगीपुर, लालगंज, संग्रामगढ़ और पट्टी में तैनात किया गया है। मतलब यह कि एक फायर स्टेशन पर मात्र सात सिपाही ही तैनात हैं। इसके लिए भी लिखापढ़ी की गई, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

फायर विभाग की एनओसी के नियम व आवेदन प्रक्रिया
फायर विभाग से एनओसी प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है। इसके बाद आवेदन रसीद संग चार प्रतियों में फायर प्लान के साथ सारे प्रमाण पत्र देने पड़ते हैं। यह प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद फाइल सीएफओ इलाहाबाद के पास जाती है। वह अपने स्तर से आवेदनकर्ता के दावों और प्रतिष्ठानों एवं घरों की गहन जांच करते हैं। पड़ताल में मानक पूरा होने के बाद सीएफओ फायर विभाग की एनओसी जारी करते हैं।
इनसेट----
जानें क्या है स्टूमेंट कार्यशीलता प्रमाण पत्र
प्रतिष्ठानाें में लगे अग्निशमन यंत्रों की जांच के लिए लोगों को दस रुपये की फीस जमा कर जिले के अग्निशमन अधिकारी के यहां आवेदन करना होता है। आवेदन बाद कर्मचारी, अधिकारी प्रतिष्ठान की जांच करते हैं। यह देखा जाता है कि वहां लगे यंत्र सही से चल रहे हैं अथवा नहीं। सबकुछ ठीक होने के बाद वह स्टूमेंट कार्यशीलता प्रमाण पत्र जारी कर देते हैं। जबकि विभाग की एनओसी लेने के लिए वह तमाम प्रक्रियाएं पूर्ण करनी पड़ती हैं, जो ढांचागत सुरक्षा के मानकों में दर्ज हैं।

वर्जन-------
शहर के किसी भी होटल संचालक ने विभाग से एनओसी नहीं लिया। कुछ के पास स्टूमेंट कार्यशीलता का प्रमाण पत्र है, मगर उसकी भी वैधता समाप्त हो गई है। एनओसी सीएफओ कार्यालय इलाहाबाद से जारी होती है। एनओसी तभी मिलती है जब फायर सुरक्षा के सारे मानक पूरे होते हैं। विभाग में कर्मचारियों की कमी तो है। खराब फायर हाईड्रेंट की बाबत लिखापढ़ी की जा चुकी है।
अब्दुल अब्बास हुसैन, अग्शिनशमन, अधिकारी
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