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Pratapgarh News: नहरों में पानी नहीं, खेती पर छाए संकट के बादल
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गेहूं की कटाई के बाद किसानों ने दहलनी फसलों की खेती की तैयारी शुरू कर दी है लेकिन नहरों में पानी की पर्याप्त उपलब्धता न होने पर खेती पर संकट आने लगा है। वर्तमान में सिंचाई खंड प्रतापगढ़ क्षेत्र में 257 नहरें हैं और शारदा सहायक खंड-51 में 41 नहरें हैं। इन नहरों से 1830 क्यूसेक के सापेक्ष सिर्फ 900 क्यूसेक पानी ही किसानों को मिल रहा है।
सिंचाई खंड प्रतापगढ़ क्षेत्र में भुपियामऊ, विश्वनाथगंज, मानधाता, जेठवारा, लालगोपालगंज, कुंडा समेत अन्य जगहों में नहर की सीमा 1240 किमी पर समाप्त होती है। दलहनी फसलों की खेती के लिए 257 नहरों में करीब 1200 क्यूसेक पानी की आवश्यकता है। वर्तमान उपलब्धता महज 600 क्यूसेक के आसपास है।
करीब-करीब यही स्थिति शारदा सहायक खंड-51 की भी है। 41 नहरों से करीब 110 किमी परिधि में गौरा, रानीगंज, फतनपुर, पट्टी सहित अन्य क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति की जाती है। 630 क्यूसेक के सापेक्ष 300 क्यूसेक ही उपलब्ध है।
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नहरों में पानी की उपलब्धता न होने से पंपिंग सेट और ट्यूबवेल से किसानों को सिंचाई करनी पड़ेगी। प्रति घंटा सिंचाई के लिए पंप मालिक को तकरीबन 250 रुपये शुल्क लेते हैं। इससे खेती की लागत में इजाफा हो रहा है।
जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह से दलहनी फसलों की बोआई शुरू हो जाती है। सिंचाई के लिए पानी की जरूरत होती है ताकि फसल नमी में अच्छे से उग सके।
वहीं, गौरा निवासी अनुज विश्वकर्मा ने बताया कि गन्ने का अंकुरण शुरू हो गया है। सिंचाई के बाद मूंग की बोआई करनी है लेकिन नहरों में पानी नहीं है। पट्टी के राकेश मिश्रा ने बताया कि नहरों में पानी न होने से खेती में दिक्कत आ रही है। 250 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से सिंचाई करनी पड़ रही है।
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सिंचाई खंड प्रतापगढ़ क्षेत्र में भुपियामऊ, विश्वनाथगंज, मानधाता, जेठवारा, लालगोपालगंज, कुंडा समेत अन्य जगहों में नहर की सीमा 1240 किमी पर समाप्त होती है। दलहनी फसलों की खेती के लिए 257 नहरों में करीब 1200 क्यूसेक पानी की आवश्यकता है। वर्तमान उपलब्धता महज 600 क्यूसेक के आसपास है।
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करीब-करीब यही स्थिति शारदा सहायक खंड-51 की भी है। 41 नहरों से करीब 110 किमी परिधि में गौरा, रानीगंज, फतनपुर, पट्टी सहित अन्य क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति की जाती है। 630 क्यूसेक के सापेक्ष 300 क्यूसेक ही उपलब्ध है।
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नहरों में पानी की उपलब्धता न होने से पंपिंग सेट और ट्यूबवेल से किसानों को सिंचाई करनी पड़ेगी। प्रति घंटा सिंचाई के लिए पंप मालिक को तकरीबन 250 रुपये शुल्क लेते हैं। इससे खेती की लागत में इजाफा हो रहा है।
जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह से दलहनी फसलों की बोआई शुरू हो जाती है। सिंचाई के लिए पानी की जरूरत होती है ताकि फसल नमी में अच्छे से उग सके।
वहीं, गौरा निवासी अनुज विश्वकर्मा ने बताया कि गन्ने का अंकुरण शुरू हो गया है। सिंचाई के बाद मूंग की बोआई करनी है लेकिन नहरों में पानी नहीं है। पट्टी के राकेश मिश्रा ने बताया कि नहरों में पानी न होने से खेती में दिक्कत आ रही है। 250 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से सिंचाई करनी पड़ रही है।