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विहंगम नजारा, आदिशक्ति का जयकारा
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Wed, 29 Mar 2017 11:32 PM IST
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नवरात्र के प्रथम दिन मां के दो स्वरूपों शैलपुत्री और ब्रम्हचारिणी के दर्शन पूजन को लेकर देवीधामों में भक्ति, आस्था का विहंगम नजारा दिखा। मां की भक्ति में लीन श्रद्धालुओं ने नारियल, चुनरी बताशा व फूल-माला अर्पित कर पूरे श्रद्धाभाव से मत्था टेककर मन्नतें मांगीं। मां बेल्हादेवी धाम, बाराही धाम, चंद्रिकन देवी, शीतला देवी, संकटहरणी, चामुंडा देवी सहित पौराणिक देवी धामों के साथ स्थानीय देवी मंदिरों में दर्शन-पूजन का क्रम भोर से शुरू हुआ तो देरशाम तक चलता रहा। शहर से लेकर गांव देवी मां की भक्ति की बयार बहती रही।
शहर के उत्तरी छोर पर सई तट स्थित मां बेल्हादेवी धाम में भोर में पट खुलने से पहले ही ही श्रद्धालुओं का लंबी कतार लग गई थी। अंदर मां का श्रृंगार चल रहा था। कतार में खड़ी महिलाएं, बच्चे और पुरुष नारियल, चुनरी, बताशा, फूल-मालाओं की टोकरी लिए माता के मंत्रों का जाप कर रहे थे। भोर में चार बजे जैसे ही पट खुला और घंटे-घड़ियाल के बीच महाआरती के स्वर मंदिर परिसर में गूंजे तो भक्त मातारानी के जयकारे लगाने लगे। इससे माहौल भक्तिमय हो गया। महाआरती का क्रम पूरा होने के बाद दर्शन पूजन का दौर शुरू हो गया। जैसे जैसे सूर्य की लालिमा प्रखर होने लगी भक्तों का रेला धाम में और बढ़ता गया। दोपहर में दूसरी बेला के श्रृंगार के लिए पट बंद किया गया। श्रृंगार के बाद पुन: दर्शन पूजन का क्र म शुरू हुआ तो देरशाम तक चलता रहा।
मां के दो स्वरूपों के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़
इस बार नवरात्र आठ ही दिनों का है। प्रथम दिन मां के दो स्वरूप शैलपुत्री व ब्रम्हचारिणी के दर्शन पूजन का संयोग था। व्रतधारी साधकों के साथ सभी भक्तों में मां के दोनों स्वरूपों का दर्शन पाने की होड़ थी। ऐसे में कोई भी इस संयोग से चूकना नहीं चाहता था। देवी धाम के पुरोहित ने बताया कि वैसे तो नवरात्र का पर्व नौ दिनों का होता है, लेकिन द्वितीया तिथि की हानि से इस बार नवरात्र आठ दिन का है और पहले ही दिन मां के दो स्वरूपों के दर्शन का विधान था।
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सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैनात रहे पुलिसकर्मी
मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुख्यद्वार के बाहर से मंदिर परिसर के भीतर जगह-जगह पुलिस कर्मियों की तैनाती रही। महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था के लिए महिला पुलिस ने मोर्चा संभाल रखा था। दर्शन पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में भीड़ लगाने से मना कर सभी को बाहर किया जा रहा था, जिससे की भीड़ न हो सके।
शहर के उत्तरी छोर पर सई तट स्थित मां बेल्हादेवी धाम में भोर में पट खुलने से पहले ही ही श्रद्धालुओं का लंबी कतार लग गई थी। अंदर मां का श्रृंगार चल रहा था। कतार में खड़ी महिलाएं, बच्चे और पुरुष नारियल, चुनरी, बताशा, फूल-मालाओं की टोकरी लिए माता के मंत्रों का जाप कर रहे थे। भोर में चार बजे जैसे ही पट खुला और घंटे-घड़ियाल के बीच महाआरती के स्वर मंदिर परिसर में गूंजे तो भक्त मातारानी के जयकारे लगाने लगे। इससे माहौल भक्तिमय हो गया। महाआरती का क्रम पूरा होने के बाद दर्शन पूजन का दौर शुरू हो गया। जैसे जैसे सूर्य की लालिमा प्रखर होने लगी भक्तों का रेला धाम में और बढ़ता गया। दोपहर में दूसरी बेला के श्रृंगार के लिए पट बंद किया गया। श्रृंगार के बाद पुन: दर्शन पूजन का क्र म शुरू हुआ तो देरशाम तक चलता रहा।
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मां के दो स्वरूपों के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़
इस बार नवरात्र आठ ही दिनों का है। प्रथम दिन मां के दो स्वरूप शैलपुत्री व ब्रम्हचारिणी के दर्शन पूजन का संयोग था। व्रतधारी साधकों के साथ सभी भक्तों में मां के दोनों स्वरूपों का दर्शन पाने की होड़ थी। ऐसे में कोई भी इस संयोग से चूकना नहीं चाहता था। देवी धाम के पुरोहित ने बताया कि वैसे तो नवरात्र का पर्व नौ दिनों का होता है, लेकिन द्वितीया तिथि की हानि से इस बार नवरात्र आठ दिन का है और पहले ही दिन मां के दो स्वरूपों के दर्शन का विधान था।
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सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैनात रहे पुलिसकर्मी
मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुख्यद्वार के बाहर से मंदिर परिसर के भीतर जगह-जगह पुलिस कर्मियों की तैनाती रही। महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था के लिए महिला पुलिस ने मोर्चा संभाल रखा था। दर्शन पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में भीड़ लगाने से मना कर सभी को बाहर किया जा रहा था, जिससे की भीड़ न हो सके।